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उत्तर प्रदेश: हापुड़ में नकली टमाटर सॉस का भंडाफोड़: एसिड और केमिकल से तैयार ‘जहरीला स्वाद’, स्ट्रीट फूड खाने वालों के लिए बड़ा खतरा

उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले से सामने आई एक चौंकाने वाली घटना ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। जिले के पन्नापुरी इलाके में खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा की गई छापेमारी में एक अवैध फैक्ट्री का पर्दाफाश हुआ है, जहां टमाटर सॉस के नाम पर खतरनाक केमिकल्स और एसिड से तैयार जहरीला मिश्रण बनाया जा रहा था। इस कार्रवाई में करीब 200 लीटर संदिग्ध सॉस बरामद किया गया है, जिसे बेहद गंदी और अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों में तैयार किया जा रहा था। इस खुलासे के बाद स्थानीय लोगों के बीच डर का माहौल है, खासकर उन लोगों में जो रोजाना सड़क किनारे मिलने वाले चाउमीन, मोमोज और अन्य फास्ट फूड का सेवन करते हैं।

बिना टमाटर के बन रही थी सॉस

जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि इस सॉस को बनाने में टमाटर का उपयोग बिल्कुल नहीं किया जा रहा था। अधिकारियों के मुताबिक, सॉस को लाल रंग और गाढ़ापन देने के लिए प्रतिबंधित सिंथेटिक रंग, सड़े-गले पदार्थ और इंडस्ट्रियल ग्रेड एसिड का इस्तेमाल किया जा रहा था। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने बताया कि यह मिश्रण देखने में ही इतना खराब और बदबूदार था कि इसे किसी भी हालत में खाने योग्य नहीं माना जा सकता।

खाद्य सुरक्षा विभाग को लंबे समय से शिकायत मिल रही थी कि बाजार में ‘वेजिटेबल सॉस’ के नाम पर घटिया और मिलावटी उत्पाद बेचे जा रहे हैं। इसी के आधार पर टीम ने एक मकान में छापा मारा, जहां यह अवैध फैक्ट्री संचालित हो रही थी। छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में तैयार सॉस, केमिकल्स और उपकरण बरामद किए गए।

स्ट्रीट फूड के जरिए लोगों तक पहुंच रहा था जहर

जांच में यह भी सामने आया कि इस नकली सॉस की सप्लाई स्थानीय बाजारों, छोटे ढाबों और सड़क किनारे लगने वाले ठेलों तक की जा रही थी। सस्ते दाम में उपलब्ध होने के कारण कई विक्रेता इस सॉस का इस्तेमाल कर रहे थे, जिससे आम लोगों की सेहत के साथ गंभीर खिलवाड़ हो रहा था।

खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुनील कुमार त्यागी ने बताया कि बरामद सॉस को तुरंत नष्ट करवा दिया गया है और उसके नमूने जांच के लिए लैब भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि इस पूरे नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान की जा रही है और रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सेहत के लिए ‘स्लो पॉइजन’

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की मिलावटी सॉस शरीर के लिए धीरे-धीरे जहर का काम करती है। इसमें इस्तेमाल होने वाले खतरनाक केमिकल्स लंबे समय में गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकते हैं। मेडिकल रिसर्च के अनुसार, सॉस को लाल रंग देने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला ‘रोडामाइन-बी’ जैसे सिंथेटिक रंग कैंसर जैसी घातक बीमारी का कारण बन सकते हैं।

इसके अलावा, इंडस्ट्रियल ग्रेड एसिड पेट की आंतरिक परत को नुकसान पहुंचाता है, जिससे अल्सर, गैस्ट्रिक इंफेक्शन और पाचन तंत्र से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि ऐसे मिलावटी उत्पादों में लेड और कॉपर जैसे भारी धातु भी मिलाए जाते हैं, जो किडनी और लिवर को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचा सकते हैं।

बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक

डॉक्टरों के मुताबिक, इस तरह के जहरीले खाद्य पदार्थ बच्चों के लिए और भी ज्यादा खतरनाक होते हैं। बच्चों के शरीर के अंग अभी विकसित हो रहे होते हैं, ऐसे में इन केमिकल्स का असर तेजी से होता है। इससे उनकी इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है और भविष्य में गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

प्रशासन की सख्ती और चेतावनी

इस मामले के सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए लोगों से अपील की है कि वे बाहर के खुले और संदिग्ध खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचें। साथ ही, खाद्य विक्रेताओं को भी चेतावनी दी गई है कि वे केवल प्रमाणित और सुरक्षित उत्पादों का ही इस्तेमाल करें, अन्यथा उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

खाद्य सुरक्षा विभाग ने यह भी कहा है कि आने वाले समय में ऐसे अवैध कारोबार के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाएगा, ताकि जनता को सुरक्षित भोजन मिल सके।

क्या करें आम लोग?

इस घटना के बाद आम लोगों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे अपने खान-पान को लेकर सतर्क रहें। सड़क किनारे मिलने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करते समय साफ-सफाई और इस्तेमाल किए जा रहे उत्पादों की गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए। संभव हो तो घर का बना खाना ही प्राथमिकता दें और बच्चों को भी बाहर के फास्ट फूड से दूर रखें।

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