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ट्रंप की धमकियों का असर फीका, भारतीय बाजार ने दिखाई मजबूती

The Hill India News
Last updated: April 6, 2026 7:28 am
The Hill India News
Published: April 6, 2026
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नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और Donald Trump की ईरान को लेकर सख्त बयानबाज़ी के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने सोमवार को जिस तरह का प्रदर्शन किया, उसने साफ संकेत दे दिया कि अब बाजार केवल बयानबाज़ी से डरने वाला नहीं है। पहले जहां ऐसे भू-राजनीतिक घटनाक्रमों से बाजार में तेज गिरावट देखने को मिलती थी, वहीं अब निवेशकों का रुख अधिक संतुलित और डेटा-आधारित होता जा रहा है।

सप्ताह के पहले कारोबारी दिन, तीन दिन के लंबे वीकेंड के बाद बाजार की शुरुआत भले ही सतर्कता के साथ हुई, लेकिन प्री-ओपनिंग सेशन में ही हल्की तेजी ने यह संकेत दे दिया था कि निवेशकों ने स्थिति को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया है। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 185 अंकों की बढ़त के साथ खुला, जबकि निफ्टी 50 भी 0.30 फीसदी की मजबूती के साथ 22,780 के आसपास कारोबार करता दिखा। हालांकि, बाजार खुलने के कुछ ही देर बाद हल्की मुनाफावसूली देखने को मिली और सेंसेक्स करीब 326 अंक गिरकर 72,993 पर पहुंच गया, वहीं निफ्टी 50 भी 106 अंकों की गिरावट के साथ 22,607 पर आ गया।

इस उतार-चढ़ाव के बावजूद एक महत्वपूर्ण बात यह रही कि बाजार में घबराहट का माहौल नहीं दिखा। निवेशक स्थिति को समझते हुए सतर्क जरूर रहे, लेकिन पैनिक सेलिंग से बचते नजर आए। सोशल मीडिया पर भी यह चर्चा तेज रही कि जैसे ईरान ने ट्रंप की धमकियों को नजरअंदाज किया, वैसे ही बाजार ने भी इन बयानों को अधिक तवज्जो नहीं दी।

अगर सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें, तो शुरुआती कारोबार में कई सेक्टर हरे निशान में दिखाई दिए। बैंकिंग और ऑटो सेक्टर ने बाजार को सहारा दिया। निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स में 0.51 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई, जबकि प्राइवेट बैंक इंडेक्स भी 0.30 फीसदी ऊपर रहा। इसके अलावा ऑटो, फाइनेंशियल सर्विसेज और आईटी सेक्टर में भी खरीदारी देखने को मिली। व्यापक बाजार में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला, जहां निफ्टी 100, 200 और 500 इंडेक्स में 0.31 फीसदी तक की बढ़त दर्ज की गई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी हल्की मजबूती बनी रही।

हालांकि, सभी सेक्टरों में तेजी नहीं थी। मेटल, फार्मा और रियल्टी सेक्टर में हल्की कमजोरी देखने को मिली। खासकर मेटल सेक्टर पर दबाव कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक मांग को लेकर चिंता के कारण बना रहा। इसी बीच, बाजार में अस्थिरता का संकेत देने वाला इंडिया VIX 2 फीसदी से ज्यादा उछल गया, जो यह दर्शाता है कि निवेशक पूरी तरह निश्चिंत नहीं हैं और किसी भी अनिश्चितता के लिए तैयार रहना चाहते हैं।

वैश्विक संकेतों की बात करें तो सुबह गिफ्ट निफ्टी में गिरावट देखी गई थी, जो यह संकेत दे रही थी कि बाजार की शुरुआत कमजोर रह सकती है। यह गिरावट मुख्य रूप से मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण थी। लेकिन भारतीय बाजार ने इन संकेतों को पूरी तरह फॉलो नहीं किया और अपनी अलग दिशा दिखाई।

विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार अब केवल राजनीतिक बयानों के बजाय ठोस आर्थिक आंकड़ों और नीतिगत फैसलों पर अधिक ध्यान दे रहा है। पिछले सप्ताह अमेरिकी बाजार मजबूत रोजगार आंकड़ों के चलते बढ़त के साथ बंद हुए थे, जिसने वैश्विक निवेशकों के मनोबल को कुछ हद तक समर्थन दिया। हालांकि, मध्य पूर्व में जारी तनाव, खासकर Strait of Hormuz के आसपास की गतिविधियां, निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और यहां किसी भी प्रकार का व्यवधान तेल की कीमतों को तेजी से ऊपर ले जा सकता है।

बाजार के जानकारों का कहना है कि इस सप्ताह भारतीय बाजार के लिए सबसे बड़ा ट्रिगर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक होगी। ब्याज दरों और नीतिगत रुख को लेकर लिए गए फैसले बाजार की दिशा तय कर सकते हैं। इसके अलावा, अगर मध्य पूर्व में तनाव कम होने के संकेत मिलते हैं, तो बाजार में तेजी को और मजबूती मिल सकती है।

घरेलू स्तर पर कुछ सकारात्मक संकेत भी देखने को मिल रहे हैं। कमर्शियल वाहनों की बिक्री में सुधार से यह संकेत मिल रहा है कि आर्थिक गतिविधियां धीरे-धीरे पटरी पर आ रही हैं और कॉर्पोरेट आय में सुधार की उम्मीद की जा सकती है। यह फैक्टर बाजार के लिए सपोर्टिव साबित हो सकता है।

हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है। पिछले कारोबारी सत्र में FIIs ने करीब 9,931 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 7,200 करोड़ रुपये से ज्यादा की खरीदारी कर बाजार को सहारा दिया। यह ट्रेंड बताता है कि विदेशी निवेशक अभी भी सतर्क हैं, जबकि घरेलू निवेशकों का भरोसा बना हुआ है।

कुल मिलाकर, मौजूदा स्थिति यह संकेत देती है कि भारतीय शेयर बाजार अब पहले की तुलना में अधिक परिपक्व हो चुका है। वैश्विक तनाव और राजनीतिक बयानबाज़ी का असर पूरी तरह खत्म तो नहीं हुआ है, लेकिन बाजार अब इन पर अति-प्रतिक्रिया देने के बजाय संतुलित रुख अपना रहा है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और RBI के फैसलों पर निर्भर करेगी।

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