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उत्तराखंड: अब साल भर खुला रहेगा ‘छोटा लद्दाख’, नेलांग घाटी में सर्दियों में भी दिखेगा रोमांच, एसओपी जारी

उत्तरकाशी/देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश में विंटर टूरिज्म (शीतकालीन पर्यटन) को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। चीन सीमा से सटे सामरिक और प्राकृतिक रूप से महत्वपूर्ण गंगोत्री नेशनल पार्क के अंतर्गत आने वाली नेलांग घाटी अब पर्यटकों के लिए साल के 12 महीने खुली रहेगी। अब तक भारी बर्फबारी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सर्दियों में बंद रहने वाली यह घाटी अब ‘एडवेंचर लवर्स’ के लिए बारहमासी गंतव्य बनेगी।

शासन के निर्देशों पर वन विभाग ने इसके लिए एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार कर ली है, जिससे शीतकाल के दौरान भी यहाँ सुरक्षित और नियंत्रित पर्यटन गतिविधियों को संचालित किया जा सके।

दिसंबर से मार्च तक नहीं थमेंगे पर्यटकों के कदम

परंपरागत रूप से, गंगोत्री नेशनल पार्क के कपाट हर साल 1 अप्रैल से 30 नवंबर तक ही खुलते थे। सर्दियों की शुरुआत होते ही गंगोत्री-गोमुख ट्रेक, केदारताल और नेलांग घाटी जैसे क्षेत्रों में सुरक्षा कारणों से पर्यटकों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया जाता था। लेकिन नई नीति के तहत, अब भैरवघाटी से नेलांग तक के 23 किलोमीटर और नेलांग से नागा तक के 7 किलोमीटर के दायरे को दिसंबर से मार्च के बीच भी खुला रखा जाएगा।

यह कदम न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और पार्क के राजस्व में भी बड़ी वृद्धि दर्ज करेगा। लद्दाख जैसी भू-आकृतियों और मरुस्थलीय हिमालयी सुंदरता के कारण इसे ‘छोटा लद्दाख’ के नाम से भी जाना जाता है, जो अब सर्दियों में सफेद बर्फ की चादर ओढ़े पर्यटकों का स्वागत करेगा।

सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन के लिए सख्त SOP

नेलांग घाटी एक संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र है, इसलिए यहाँ पर्यटन को ‘खुली छूट’ के बजाय ‘नियंत्रित पहुंच’ के सिद्धांत पर आगे बढ़ाया जा रहा है। नेशनल पार्क प्रशासन द्वारा जारी SOP के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • पर्यटकों की सीमा: घाटी की पारिस्थितिकी को बचाने के लिए प्रतिदिन अधिकतम 100 पर्यटकों और 20 वाहनों को ही प्रवेश की अनुमति मिलेगी।

  • समय सीमा: पर्यटकों को सुबह 8:00 बजे से 11:00 बजे के बीच प्रवेश करना होगा और शाम 5:00 बजे तक पार्क क्षेत्र से बाहर निकलना अनिवार्य होगा।

  • पंजीकरण: प्रवेश के लिए पर्यटकों को निर्धारित सुरक्षा जांच और पंजीकरण की प्रक्रिया से गुजरना होगा।

चीन सीमा पर बढ़ेगी भारत की सॉफ्ट पावर

सामरिक दृष्टि से देखें तो नेलांग घाटी चीन सीमा के अत्यंत निकट है। यहाँ पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से न केवल सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा मजबूत होगा, बल्कि यह क्षेत्र में भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ को भी प्रदर्शित करेगा। बर्फ से ढकी चोटियां, शांत वातावरण और तिब्बती सीमा से सटा यह क्षेत्र उन लोगों के लिए स्वर्ग के समान है जो भीड़भाड़ से दूर एकांत और रोमांच की तलाश में रहते हैं।

गंगोत्री नेशनल पार्क के उप निदेशक हरीश नेगी ने बताया, “शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकता है। हमने सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने के लिए यह SOP तैयार की है। नेलांग घाटी में अब पर्यटक सुरक्षित ढंग से हिमालय के शीतकालीन सौंदर्य का अनुभव कर सकेंगे।”

विंटर टूरिज्म के लिए नया अध्याय

उत्तराखंड अब केवल ‘चारधाम यात्रा‘ तक सीमित नहीं रहना चाहता। नेलांग घाटी को साल भर खोलने का निर्णय औली, मुनस्यारी और चकराता के बाद राज्य में विंटर टूरिज्म का एक नया केंद्र विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम है। यह उन फोटोग्राफर्स और वन्यजीव प्रेमियों के लिए भी सुनहरा मौका होगा जो सर्दियों में हिमालयी वन्यजीवों और बर्फबारी के दुर्लभ दृश्यों को कैमरे में कैद करना चाहते हैं।

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