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धामी सरकार ने कार्यकर्ताओं को दिया चैत्र नवरात्र का बड़ा उपहार, लगा दी बोर्ड और परिषदों में नियुक्तियों की झड़ी

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में पिछले काफी समय से जिस ‘दायित्वों के पिटारे’ के खुलने का इंतजार हो रहा था, आखिरकार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उस पर मुहर लगा दी है। अप्रैल महीने की शुरुआत और हिंदू नववर्ष के उल्लास के बीच, धामी सरकार ने भारतीय जनता पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं को विभिन्न बोर्डों, निगमों, परिषदों और समितियों में अहम जिम्मेदारियां सौंपकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है।

हालिया कैबिनेट विस्तार के बाद यह माना जा रहा था कि सरकार अब संगठन के उन चेहरों को तवज्जो देगी जो लंबे समय से जमीन पर पार्टी की जड़ों को मजबूत कर रहे हैं। इस उत्तराखंड सरकार नए दायित्व सूची 2026 के जरिए न केवल कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने की कोशिश की गई है, बल्कि आगामी राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाने का भी प्रयास किया गया है।

प्रमुख नियुक्तियां: अनुभवी कंधों पर नई जिम्मेदारी

सरकार द्वारा जारी सूची में उन नामों को प्राथमिकता दी गई है, जिनका संगठन में लंबा ट्रैक रिकॉर्ड रहा है। इस फेहरिस्त में सबसे प्रमुख नाम विनोद सुयाल का है। टिहरी जिले से ताल्लुक रखने वाले भाजपा के वरिष्ठ और बेहद सक्रिय नेता विनोद सुयाल को उत्तराखंड राज्य युवा कल्याण सलाहकार परिषद (Uttarakhand State Youth Welfare Advisory Council) का उपाध्यक्ष नामित किया गया है। युवा कल्याण क्षेत्र में उनकी नियुक्ति को युवाओं के बीच सरकार की पैठ बढ़ाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

वहीं, नैनीताल के कद्दावर नेता ध्रुव रौतेला को मीडिया सलाहकार समिति का उपाध्यक्ष बनाया गया है। मीडिया प्रबंधन और संगठनात्मक कौशल में माहिर रौतेला की नियुक्ति से सरकार और मीडिया के बीच बेहतर समन्वय की उम्मीद जताई जा रही है।

सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन का गणित

धामी सरकार ने इन नियुक्तियों में गढ़वाल और कुमाऊं के साथ-साथ विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधित्व का भी पूरा ख्याल रखा है:

  • पिछड़ा वर्ग कल्याण: टिहरी गढ़वाल के खेम सिंह चौहान को ‘उत्तराखंड राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण परिषद’ का उपाध्यक्ष बनाया गया है। पिछड़े वर्ग के मुद्दों पर उनकी पकड़ और संगठन के प्रति निष्ठा को देखते हुए उन्हें यह अहम पद दिया गया है।

  • राज्य आंदोलनकारी सम्मान: राज्य निर्माण में अपनी आहुति देने वाले आंदोलनकारियों के हितों की रक्षा के लिए देहरादून की चारु कोठारी को ‘उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी सम्मान परिषद’ का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

  • खेल और युवा शक्ति: खेल जगत को नई दिशा देने के उद्देश्य से देहरादून के कुलदीप बुटोला को ‘उत्तराखंड राज्य स्तरीय खेल परिषद’ में अध्यक्ष पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।

महिला सशक्तिकरण और हर्बल विकास पर फोकस

उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य के लिए जड़ी-बूटी और औषधीय पौधे अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। इसी महत्व को समझते हुए सरकार ने सोना सजवाण को ‘हर्बल सलाहकार समिति’ (Herbal Advisory Committee) का उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति से प्रदेश में आयुर्वेदिक संसाधनों के दोहन और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में तेजी आने की संभावना है।

महिला सुरक्षा और अधिकारों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए हरिप्रिया जोशी को ‘उत्तराखंड राज्य महिला आयोग’ में उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी गई है। राज्य में महिलाओं से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर आयोग की भूमिका को सशक्त बनाने की जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर होगी।


प्रमुख पदों की तालिका: एक नजर में

नाम पद / जिम्मेदारी संबंधित परिषद / समिति
विनोद सुयाल उपाध्यक्ष राज्य युवा कल्याण सलाहकार परिषद
ध्रुव रौतेला उपाध्यक्ष मीडिया सलाहकार समिति
खेम सिंह चौहान उपाध्यक्ष राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण परिषद
कुलदीप बुटोला अध्यक्ष राज्य स्तरीय खेल परिषद
चारु कोठारी उपाध्यक्ष राज्य निर्माण आंदोलनकारी सम्मान परिषद
हरिप्रिया जोशी उपाध्यक्ष राज्य महिला आयोग
सोना सजवाण उपाध्यक्ष हर्बल सलाहकार समिति

राजनीतिक विश्लेषण: क्यों महत्वपूर्ण हैं ये नियुक्तियां?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तराखंड सरकार नए दायित्व सूची 2026 केवल पदों का बंटवारा नहीं है, बल्कि यह भाजपा की ‘कार्यकर्ता आधारित राजनीति’ का हिस्सा है। अक्सर सत्ता में आने के बाद कार्यकर्ताओं में उपेक्षा का भाव पैदा होने लगता है, जिसे दूर करने के लिए ‘दायित्व’ एक कारगर हथियार साबित होते हैं।

  1. संगठन में ऊर्जा: लंबे समय से प्रतीक्षारत कार्यकर्ताओं को पद मिलने से निचले स्तर तक उत्साह का संचार होता है।

  2. कैबिनेट का विस्तार: हालिया कैबिनेट विस्तार में जो समीकरण छूट गए थे, उन्हें इन बोर्ड और निगमों के जरिए साधने की कोशिश की गई है।

  3. आगामी चुनाव की तैयारी: विभिन्न जातियों और क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को चुनकर सरकार ने सामाजिक इंजीनियरिंग का सफल प्रयोग किया है।

अभी और भी है इंतजार!

सचिवालय के गलियारों में चर्चा है कि यह तो बस शुरुआत है। अभी कई अन्य बोर्ड, निगम और विकास प्राधिकरणों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पद खाली हैं। माना जा रहा है कि आने वाले कुछ हफ्तों में एक और सूची जारी हो सकती है, जिसमें कुमाऊं मंडल और सीमांत क्षेत्रों के कुछ और चेहरों को स्थान मिल सकता है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन नियुक्तियों के माध्यम से यह साफ कर दिया है कि उनकी सरकार ‘परफॉर्म’ करने वाले कार्यकर्ताओं को कभी नहीं भूलती। अब देखना यह होगा कि ये नए ‘नवनियुक्त सारथी’ अपनी-अपनी संस्थाओं के माध्यम से जनहित के कार्यों को कितनी गति दे पाते हैं।

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