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उत्तराखण्ड: देहरादून में छात्र हत्या पर उबाल, हजारों किसानों का प्रदर्शन, राकेश टिकैत बोले— ‘दिव्यांशु को इंसाफ चाहिए’

Rajesh Dabral
Last updated: April 3, 2026 10:55 am
Rajesh Dabral
Published: April 3, 2026
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देहरादून में छात्र दिव्यांशु जटराना की हत्या के बाद प्रदेश में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। 23 मार्च को प्रेमनगर क्षेत्र में हुई इस घटना ने न सिर्फ एक परिवार को गहरे दुख में डाल दिया, बल्कि कानून-व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब इस मामले में किसानों की एंट्री के बाद आंदोलन ने बड़ा रूप ले लिया है। शुक्रवार, 3 अप्रैल को देहरादून के आशारोड़ी चेकपोस्ट पर हजारों किसानों ने एकजुट होकर शोक सभा आयोजित की, जो देखते ही देखते बड़े विरोध प्रदर्शन में बदल गई।

Contents
छात्र की हत्या से भड़का आक्रोशभावुक पल: दादा की आंखों में आंसूराकेश टिकैत का सरकार और पुलिस पर हमलानशे के कारोबार पर गंभीर आरोपपुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवालपलायन और किसानों की स्थिति पर चिंताआगे बढ़ सकता है आंदोलन

इस प्रदर्शन का नेतृत्व किसान नेता राकेश टिकैत ने किया। उनके आह्वान पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के तराई क्षेत्रों से बड़ी संख्या में किसान देहरादून पहुंचे। प्रदर्शन में बागपत, शामली, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर जैसे जिलों के साथ-साथ उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार और देहरादून से भी किसान शामिल हुए।

छात्र की हत्या से भड़का आक्रोश

दिव्यांशु जटराना, जो मूल रूप से मुजफ्फरनगर का रहने वाला था, देहरादून में पढ़ाई कर रहा था। 23 मार्च को प्रेमनगर इलाके में छात्रों के दो गुटों के बीच हुई हिंसक झड़प में उसकी जान चली गई। इस घटना के बाद से छात्र संगठनों और स्थानीय लोगों में गुस्सा था, लेकिन अब किसानों के जुड़ने से यह आंदोलन और व्यापक हो गया है।

आशारोड़ी में आयोजित शोक सभा के दौरान हजारों किसानों ने दिव्यांशु को श्रद्धांजलि दी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि जब तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

भावुक पल: दादा की आंखों में आंसू

इस दौरान माहौल बेहद भावुक हो गया, जब दिव्यांशु के दादा हरबीर सिंह मीडिया के सामने फूट-फूटकर रो पड़े। उन्होंने कहा कि उनका पोता परिवार का सहारा था और उसकी मौत ने पूरे परिवार को तोड़ दिया है। उन्होंने प्रशासन से हाथ जोड़कर आरोपियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की।

राकेश टिकैत का सरकार और पुलिस पर हमला

किसान नेता राकेश टिकैत ने इस मामले को लेकर राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देहरादून को हमेशा शिक्षा नगरी और शांत शहर के रूप में जाना जाता रहा है, लेकिन हाल के दिनों में यहां अपराध बढ़ते जा रहे हैं।

टिकैत ने कहा, “किसान अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए देहरादून भेजते हैं, लेकिन अगर यहां उनकी सुरक्षा ही नहीं होगी, तो लोग अपने बच्चों को यहां भेजना बंद कर देंगे।” उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा।

नशे के कारोबार पर गंभीर आरोप

प्रदर्शन के दौरान टिकैत ने देहरादून में बढ़ते नशे के कारोबार को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि शैक्षणिक संस्थानों के आसपास आसानी से ड्रग्स उपलब्ध हो रहे हैं, जो बेहद चिंताजनक है।

उन्होंने कहा कि “देवभूमि की पहचान इस तरह से खराब नहीं होनी चाहिए। नशे का कारोबार बिना प्रशासन की लापरवाही के संभव नहीं है।” टिकैत ने सरकार से मांग की कि ड्रग्स नेटवर्क पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए और युवाओं को इससे बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

किसान नेता ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पुलिस अपने मूल कर्तव्यों से भटक रही है, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं। टिकैत ने आरोप लगाया कि बाहरी तत्व प्रदेश में सक्रिय हो गए हैं और स्थानीय लोगों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर पुलिस समय पर कार्रवाई करती, तो शायद ऐसी घटना को रोका जा सकता था।

पलायन और किसानों की स्थिति पर चिंता

राकेश टिकैत ने उत्तराखंड में पलायन के मुद्दे को भी इस घटना से जोड़ते हुए कहा कि पहाड़ के मूल निवासी लगातार पलायन कर रहे हैं, जबकि बाहरी लोग यहां बसते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है और व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।

आगे बढ़ सकता है आंदोलन

आशारोड़ी में हुआ यह प्रदर्शन आने वाले दिनों में बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। किसानों ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अगर प्रशासन ने जल्द ठोस कार्रवाई नहीं की, तो वे राज्यभर में आंदोलन तेज करेंगे।

दिव्यांशु जटराना की हत्या ने सिर्फ एक परिवार को नहीं, बल्कि पूरे समाज को झकझोर दिया है। यह मामला अब कानून-व्यवस्था, युवा सुरक्षा, नशे के बढ़ते प्रभाव और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे कई अहम मुद्दों को केंद्र में ले आया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाता है या नहीं।

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