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The Hill India > Blog > उत्तराखंड > उत्तराखंड: पॉलिटिकल ‘चुप्पी’ पर हरीश रावत का बड़ा बयान, बोले— ‘अवकाश मेरा अधिकार, सियासत न बनाई जाए’
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उत्तराखंड: पॉलिटिकल ‘चुप्पी’ पर हरीश रावत का बड़ा बयान, बोले— ‘अवकाश मेरा अधिकार, सियासत न बनाई जाए’

Rajesh Dabral
Last updated: April 3, 2026 9:55 am
Rajesh Dabral
Published: April 3, 2026
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देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों उस समय हलचल तेज हो गई जब राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत  ने अचानक 15 दिनों के ‘राजनीतिक अवकाश’ का ऐलान कर दिया। उनके इस फैसले ने न केवल विपक्ष बल्कि पार्टी के भीतर भी कई तरह की चर्चाओं और अटकलों को जन्म दे दिया है। हालांकि अब खुद हरीश रावत ने इस मुद्दे पर अपनी ‘चुप्पी’ तोड़ते हुए विस्तृत बयान दिया है और साफ किया है कि उनके अवकाश को किसी भी तरह के राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।

Contents
पार्टी के भीतर बढ़ी हलचलनेतृत्व के प्रति निष्ठा दोहराई2027 चुनाव और युवाओं को संदेश‘अवकाश में भी सक्रिय’ रहने का दावासियासी मायने और आगे की राह

हरीश रावत ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए स्पष्ट किया कि यह अवकाश उन्होंने किसी नाराजगी या राजनीतिक असहमति के कारण नहीं लिया है, बल्कि यह उनका व्यक्तिगत और स्वाभाविक अधिकार है। उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले करीब 59 वर्षों से वे निरंतर सार्वजनिक और राजनीतिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। ऐसे में जीवन के इस चरण पर थोड़े समय का विराम लेना कोई असामान्य बात नहीं है।

उन्होंने लिखा कि “इतने लंबे समय तक लगातार जिम्मेदारियों के निर्वहन के बाद एक छोटा सा अर्जित अवकाश लेना मेरा स्वाभाविक अधिकार है।” उनके इस बयान से यह साफ संकेत मिलता है कि वे अपने इस निर्णय को पूरी तरह व्यक्तिगत मानते हैं और इसे लेकर किसी भी तरह की राजनीतिक व्याख्या को सही नहीं मानते।

पार्टी के भीतर बढ़ी हलचल

हरीश रावत के अवकाश पर जाने के बाद पार्टी के अंदर भी हलचल तेज हो गई थी। कई नेताओं ने इसे अलग-अलग नजरिए से देखा और कुछ ने इसे संगठन के भीतर असंतोष से जोड़ने की कोशिश भी की। हालांकि रावत ने अपने बयान में इन सभी अटकलों को खारिज करते हुए अपील की है कि उनके इस कदम को लेकर ‘पक्ष-विपक्ष’ की स्थिति न बनाई जाए।

उन्होंने विशेष रूप से Govind Singh Kunjwal का जिक्र करते हुए कहा कि उनके साथ उनका मानसिक और भावनात्मक रिश्ता रहा है। ऐसे में यदि उनके किसी बयान या प्रतिक्रिया से कोई असहजता पैदा हुई हो, तो वह उसके लिए खेद प्रकट करते हैं। इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक पार्टी के भीतर समन्वय बनाए रखने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।

नेतृत्व के प्रति निष्ठा दोहराई

अपने बयान में हरीश रावत ने पार्टी नेतृत्व के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि अपने लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने हमेशा पार्टी के सर्वोच्च नेतृत्व के निर्णयों को स्वीकार किया है और आगे भी करते रहेंगे। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कई बार उन्होंने अपनी बात रखने की कोशिश जरूर की, लेकिन अंतिम निर्णय हमेशा नेतृत्व का ही माना।

यह बयान ऐसे समय आया है जब आगामी चुनावों को लेकर पार्टी के भीतर नेतृत्व और रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हैं। ऐसे में रावत का यह संदेश संगठन में एकजुटता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

2027 चुनाव और युवाओं को संदेश

हरीश रावत ने अपने बयान में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जो युवा नेता भविष्य में अपनी भूमिका देख रहे हैं, उन्हें वे पूरा समर्थन देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने महर्षि दधीचि का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वे अपने अनुभव और योगदान से युवाओं के भविष्य को संवारने में पीछे नहीं हटेंगे।

उनका यह बयान इस बात का संकेत देता है कि वे सक्रिय राजनीति से पूरी तरह अलग नहीं हो रहे हैं, बल्कि एक मार्गदर्शक की भूमिका में भी नजर आ सकते हैं। यह संदेश खास तौर पर पार्टी के युवा नेताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

‘अवकाश में भी सक्रिय’ रहने का दावा

हरीश रावत ने यह भी स्पष्ट किया कि वे भले ही औपचारिक राजनीतिक कार्यक्रमों से दूरी बनाए हुए हैं, लेकिन पूरी तरह निष्क्रिय नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इस दौरान भी वे लगातार लोगों के संपर्क में हैं और विभिन्न सामाजिक समूहों, क्षेत्रों और जन अपेक्षाओं को समझने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अपने जीवन के इस पड़ाव पर उन्हें लोगों के सुझाव और परामर्श की जरूरत है। यही कारण है कि वे इस समय को आत्ममंथन और जनसंपर्क के लिए उपयोग कर रहे हैं। यह बयान उनके राजनीतिक अनुभव और जमीनी जुड़ाव को दर्शाता है।

सियासी मायने और आगे की राह

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हरीश रावत का यह अवकाश भले ही व्यक्तिगत बताया जा रहा हो, लेकिन इसके राजनीतिक मायने भी हो सकते हैं। उत्तराखंड की राजनीति में उनका कद अभी भी बड़ा है और उनके हर कदम को गंभीरता से देखा जाता है।

फिलहाल, उनके इस बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि वे किसी भी तरह की राजनीतिक दूरी या असंतोष के संकेत नहीं दे रहे हैं। बल्कि उन्होंने अपने अनुभव, निष्ठा और संगठन के प्रति समर्पण को फिर से रेखांकित किया है।

अंत में, हरीश रावत ने उन सभी लोगों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने उनके इस निर्णय को लेकर रुचि दिखाई और प्रतिक्रिया दी। उनका यह संतुलित और भावनात्मक बयान न केवल विवादों को शांत करने की कोशिश है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि वे अभी भी सक्रिय राजनीति के एक अहम स्तंभ बने रहना चाहते हैं।

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