रामनगर (नैनीताल): उत्तराखंड के शांत पर्वतीय अंचल रामनगर से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है, जिसने समाज की नैतिकता और पवित्र रिश्तों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ एक पिता, जिसे बेटी का रक्षक होना चाहिए था, वही उसका भक्षक बन गया। अपनी ही 13 वर्षीय मासूम बेटी के साथ लंबे समय से दुष्कर्म करने के आरोपी पिता को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इस पूरे घृणित मामले का खुलासा किसी और ने नहीं, बल्कि पीड़िता की सौतेली माँ ने किया है, जिसकी हिम्मत की अब हर ओर चर्चा हो रही है।
नशे की गिरफ्त में रिश्तों का ‘शिकारी’
यह मामला रामनगर कोतवाली क्षेत्र का है। जानकारी के अनुसार, आरोपी व्यक्ति दो शादियां कर चुका है। पीड़िता उसकी पहली पत्नी की संतान है, जिसकी मृत्यु के बाद आरोपी ने दूसरी शादी की थी। पीड़िता अपनी सौतेली माँ के साथ ही रहती थी। आरोप है कि पिता नशे का अत्यधिक आदी है और अक्सर नशे की हालत में घर पहुँचकर अपनी ही नाबालिग बेटी को अपनी हवस का शिकार बनाता था।
काफी समय तक यह जुल्म घर की चारदीवारी के भीतर दबा रहा, लेकिन जब पानी सिर से ऊपर चला गया, तो सौतेली माँ ने समाज की लोक-लाज को दरकिनार करते हुए पुलिस का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया। महिला की तहरीर ने इस रामनगर कलयुगी पिता गिरफ्तार मामले की नींव रखी।
सौतेली माँ ने पेश की साहस की मिसाल
आमतौर पर समाज में सौतेली माँ की छवि को लेकर कई नकारात्मक धारणाएं होती हैं, लेकिन इस मामले में सौतेली माँ ने रक्षक की भूमिका निभाई। उसने अपनी तहरीर में स्पष्ट किया कि उसका पति न केवल अपनी बेटी के साथ शारीरिक शोषण करता था, बल्कि घर में विरोध करने पर मारपीट और गाली-गलौज पर भी उतारू हो जाता था। महिला ने पुलिस को बताया कि बालिका की स्थिति और उसके साथ हो रहे अन्याय को वह अब और नहीं देख सकती थी, इसलिए उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की हिम्मत जुटाई।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई: सलाखों के पीछे पहुँचा आरोपी
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए नैनीताल पुलिस प्रशासन तत्काल हरकत में आया। रामनगर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक सुशील कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने बिना देरी किए आरोपी को उसके ठिकाने से दबोच लिया।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ निम्नलिखित कड़े कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है:
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BNS (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 64 (2) F: विश्वास के पद पर रहते हुए या रिश्तेदार द्वारा दुष्कर्म।
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धारा 115 (2): स्वेच्छा से चोट पहुँचाना।
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पॉक्सो एक्ट (POCSO) की धारा 5(N) व 6: बार-बार और जघन्य श्रेणी का यौन अपराध।
पुलिस ने आरोपी को देर शाम स्थानीय न्यायालय में पेश किया, जहाँ से माननीय न्यायाधीश ने उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया।
पीड़िता की काउंसलिंग और मेडिकल जांच
पुलिस प्रशासन अब पीड़िता को उचित न्याय दिलाने और उसे इस मानसिक आघात से बाहर निकालने के लिए हर संभव कदम उठा रहा है। प्रभारी निरीक्षक सुशील कुमार के अनुसार, पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण (Medical Examination) कराया गया है और कोर्ट में उसके बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही, बाल कल्याण समिति (CWC) को भी सूचित किया गया है ताकि किशोरी को सुरक्षित वातावरण और मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान की जा सके।
देवभूमि में बढ़ती विकृत मानसिकता पर उठते सवाल
रामनगर की इस घटना ने उत्तराखंड के सामाजिक ताने-बाने को झकझोर कर रख दिया है। रामनगर कलयुगी पिता गिरफ्तार होने की खबर जैसे ही स्थानीय स्तर पर फैली, लोगों में भारी आक्रोश देखा गया। बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि नशा और विकृत मानसिकता किस तरह से पारिवारिक रिश्तों को नष्ट कर रही है, यह उसका जीता-जागता उदाहरण है।
अक्सर ऐसे मामलों में परिवार बदनामी के डर से चुप रह जाता है, जिससे अपराधी के हौसले बुलंद होते हैं। लेकिन यहाँ सौतेली माँ द्वारा उठाया गया कदम उन सभी के लिए एक प्रेरणा है जो अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने से डरते हैं।
फिलहाल, आरोपी सलाखों के पीछे है और रामनगर पुलिस मामले की गहनता से तफ्तीश कर रही है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि चार्जशीट में पुख्ता सबूतों को शामिल किया जाएगा ताकि आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके। समाज अब इस मासूम बच्ची के लिए न्याय की गुहार लगा रहा है, जिसकी मासूमियत को उसके अपने ही पिता ने तार-तार कर दिया।
यह घटना हमें सचेत करती है कि बच्चों की सुरक्षा केवल घर के बाहर ही नहीं, बल्कि घर के भीतर भी सुनिश्चित करना समय की मांग है।


