गांधीनगर/बनासकांठा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को अपने गृह राज्य गुजरात के दौरे के दौरान विकास और राष्ट्र रक्षा का एक नया अध्याय लिखा। बनासकांठा के वाव-थराड में आयोजित एक विशाल जनसभा में प्रधानमंत्री ने 20,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी और लोकार्पण किया। यह परियोजनाएं मुख्य रूप से ऊर्जा, सड़क बुनियादी ढांचे, रेलवे और किफायती आवास क्षेत्रों पर केंद्रित हैं।
अपने संबोधन की शुरुआत में प्रधानमंत्री भावुक नजर आए। उन्होंने क्षेत्र की जनता को ‘अपना परिवार‘ संबोधित करते हुए कहा कि नवरात्रि के पावन पर्व के तत्काल बाद मां अम्बा जी के चरणों में आने का सौभाग्य मिलना उनके लिए किसी आध्यात्मिक ऊर्जा से कम नहीं है। उन्होंने भगवान महावीर जयंती के अवसर पर जैन समुदाय और देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए इस क्षेत्र को ‘पवित्र जनकल्याण की धरती’ बताया।
डीसा एयरबेस: सुरक्षा के प्रति पिछली सरकारों की ‘नफरत’ पर प्रहार
प्रधानमंत्री के इस दौरे का सबसे चर्चित हिस्सा डीसा एयरबेस पर उनके विमान की लैंडिंग रहा। पहली बार डीसा एयरबेस पर उतरने के अनुभव को साझा करते हुए पीएम मोदी ने पिछली कांग्रेस सरकारों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “डीसा एयरबेस अंतरराष्ट्रीय सीमा से महज 130 किलोमीटर दूर है। रणनीतिक दृष्टि से यह भारत की पश्चिमी सीमा का सुरक्षा कवच है। जब मैं मुख्यमंत्री था, तब मैंने इसके लिए जमीन अधिग्रहित की थी, लेकिन तत्कालीन दिल्ली सरकार की गुजरात के प्रति नफरत इतनी थी कि राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़ी यह फाइल सालों तक धूल फांकती रही।”
पीएम ने आगे कहा कि 2014 में सत्ता संभालने के बाद उन्होंने उन फाइलों को बाहर निकाला। आज उसी का परिणाम है कि वायुसेना का एक मजबूत और आधुनिक बेस डीसा में तैयार हो चुका है, जो दुश्मन की हर नापाक हरकत का जवाब देने के लिए तैयार है।
20,000 करोड़ का ‘विकास मॉडल’ और सौर ऊर्जा की क्रांति
पीएम मोदी गुजरात दौरा 2026 के इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर सौर ऊर्जा की उपलब्धियों को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। प्रधानमंत्री ने गर्व के साथ कहा कि गुजरात आज सौर ऊर्जा के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करने की ओर अग्रसर है। उन्होंने 2010 में पाटन के चारणका में शुरू किए गए पहले सोलर पार्क को याद करते हुए कहा कि उस समय राष्ट्रीय स्तर पर इस ओर ध्यान नहीं दिया जाता था, लेकिन आज खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क के माध्यम से गुजरात दुनिया का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा केंद्र बनने जा रहा है।
20,000 करोड़ की इन परियोजनाओं से न केवल बनासकांठा बल्कि पूरे उत्तर गुजरात की आर्थिक तस्वीर बदलने की उम्मीद है। पीएम ने स्पष्ट किया कि ये परियोजनाएं केवल पत्थर नहीं हैं, बल्कि ये लाखों लोगों के जीवन में गति और जीवंतता लाने वाले माध्यम हैं।
सघर्ष से समृद्धि तक: उत्तर गुजरात का कायाकल्प
अतीत की यादों को ताजा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय था जब उत्तर गुजरात का नाम आते ही सूखा, अकाल और पलायन की तस्वीर उभरती थी। कांग्रेस सरकार के दौर में इस क्षेत्र की निरंतर उपेक्षा की गई। माताओं-बहनों को पानी के लिए मीलों पैदल चलना पड़ता था। पीएम ने कहा, “हमने इस संघर्षपूर्ण जीवन को बदलने का संकल्प लिया। आज गांव-गांव तक सड़कें हैं, हाई-स्पीड हाईवे हैं और वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनें गुजरात की पटरियों पर दौड़ रही हैं।” उन्होंने जनता को विश्वास दिलाया कि जब तक ‘पंचायत से पार्लियामेंट’ तक उनका भरोसा बना रहेगा, विकास की यह सुपरफास्ट एक्सप्रेस थमेगी नहीं।
वैश्विक अस्थिरता और भारत की ‘अभेद्य’ विदेश नीति
पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी तनाव और युद्ध की स्थितियों पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने भारत की बढ़ती कूटनीतिक ताकत का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज दुनिया ऊर्जा संकट और महंगाई से जूझ रही है, लेकिन भारत ने अपनी प्रभावी विदेश नीति के बल पर खुद को स्थिर बनाए रखा है।
इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, “ऐसे समय में जब देश को एकजुट होने की जरूरत है, कुछ राजनीतिक दल, विशेषकर कांग्रेस, विभाजनकारी राजनीति कर रही है। वे जनता के बीच भय और अफवाहें फैलाकर देश की सामूहिक शक्ति को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं।” पीएम ने आह्वान किया कि भारत की स्थिरता और प्रगति को बनाए रखने के लिए जनता की एकता ही सबसे बड़ा हथियार है।
विकसित भारत के लिए विकसित गुजरात
प्रधानमंत्री का यह दौरा चुनावी समीकरणों से इतर विकास के उस ‘गुजरात मॉडल’ को पुनर्स्थापित करने वाला रहा, जिसे वे राष्ट्रीय स्तर पर ले जाना चाहते हैं। 20,000 करोड़ की योजनाएं और सीमावर्ती सुरक्षा बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण यह स्पष्ट करता है कि केंद्र सरकार का ध्यान केवल आर्थिक विकास पर ही नहीं, बल्कि ‘सुरक्षित और आत्मनिर्भर भारत’ के विजन पर भी केंद्रित है।



