
नई दिल्ली: नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ 1 अप्रैल 2026 से देशभर में कई अहम नियमों में बदलाव लागू हो रहे हैं, जिनका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ने वाला है। खासकर प्रॉपर्टी खरीदने वालों और पर्यटन के लिए पहाड़ी राज्यों का रुख करने वाले लोगों को अब पहले से ज्यादा खर्च करना होगा। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ जैसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अलग-अलग स्तर पर नए नियम लागू किए जा रहे हैं।
सबसे पहले बात करें उत्तर प्रदेश की, तो यहां नोएडा, गाजियाबाद और लखनऊ जैसे बड़े शहरों में सर्कल रेट बढ़ा दिए गए हैं। सर्कल रेट बढ़ने का सीधा मतलब है कि अब जमीन या मकान की रजिस्ट्री पहले से महंगी होगी। इसके अलावा, नगर निगमों ने सेल्फ-असेसमेंट नहीं करने वाले लोगों पर सख्त जुर्माने का प्रावधान लागू कर दिया है। वहीं, परिवहन विभाग ने व्यावसायिक वाहनों के लिए नेशनल परमिट प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है, जिससे अब परमिट रिन्यूअल पहले से आसान हो जाएगा।
उत्तराखंड में भी 1 अप्रैल से बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। देहरादून, हरिद्वार और हल्द्वानी जैसे शहरों में सर्कल रेट में 9% से 22% तक की बढ़ोतरी की गई है, जिससे प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री महंगी हो जाएगी। इतना ही नहीं, राज्य में बाहरी वाहनों के लिए ग्रीन सेस और इको टैक्स की दरों में भी इजाफा किया गया है। खासकर देहरादून और मसूरी जैसे पर्यटन स्थलों पर आने वाले पर्यटकों को अब ज्यादा शुल्क देना होगा। हालांकि, राहत की बात यह है कि राज्य सरकार ने प्रॉपर्टी रजिस्ट्री की प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है, जिससे लोगों को तहसील के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। साथ ही, होमस्टे और होटल खोलने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया गया है, जिससे कारोबार शुरू करना आसान होगा।
हिमाचल प्रदेश में भी पर्यटन महंगा होने जा रहा है। नई टोल पॉलिसी 2026-27 के तहत राज्य में बाहरी वाहनों पर एंट्री टैक्स में भारी बढ़ोतरी की गई है। अब निजी कारों के लिए एंट्री फीस 70 रुपये से बढ़ाकर 170 रुपये प्रतिदिन कर दी गई है। कमर्शियल बसों और भारी वाहनों के शुल्क में भी बढ़ोतरी की गई है। शिमला और मनाली जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में ग्रीन सेस बढ़ने से यात्रियों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा। वहीं, शिमला और धर्मशाला नगर निगमों में कमर्शियल संपत्तियों के टैक्स असेसमेंट के लिए नई यूनिट एरिया प्रणाली लागू की जा रही है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी प्रॉपर्टी टैक्स को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। नगर निगम और NDMC क्षेत्रों में यूनिट एरिया मेथड लागू किया जा रहा है। इससे खासतौर पर खुद के रहने वाले मकानों (Self-occupied properties) पर टैक्स का बोझ 30 से 50 प्रतिशत तक कम हो सकता है। इसके अलावा, भवन निर्माण योजना की मंजूरी की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल कर दिया गया है, जिससे लोगों को अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
हरियाणा में सरकार ने डिजिटल प्रॉपर्टी आईडी को अनिवार्य कर दिया है। साथ ही, 31 मार्च 2025 तक के बकाया प्रॉपर्टी टैक्स पर 100 प्रतिशत ब्याज माफी की घोषणा की गई है। हालांकि, अब किसी भी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री से पहले ऑनलाइन ‘नो ड्यूज सर्टिफिकेट’ लेना जरूरी होगा, अन्यथा रजिस्ट्री नहीं हो पाएगी।
पंजाब में यूनिफाइड बिल्डिंग रूल्स 2025 लागू किए गए हैं, जिससे निर्माण से जुड़े नियम सख्त हो गए हैं, लेकिन कुछ मामलों में परमिट सस्ते हुए हैं। साथ ही, संपत्ति ट्रांसफर पर लगने वाले सेस में भी बदलाव किया गया है और होमस्टे रजिस्ट्रेशन के लिए नई सिंगल विंडो व्यवस्था शुरू की गई है।
वहीं, चंडीगढ़ में प्रॉपर्टी खरीदना अब काफी महंगा हो जाएगा। प्रशासन ने कलेक्टर रेट में 10 से 33 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है। खासकर रेजिडेंशियल सेक्टर में 33 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हाउसिंग बोर्ड और सोसायटी फ्लैट्स की कीमतों में भी इजाफा हुआ है। इसके अलावा, पानी के बिल पर 5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क और सीवरेज सेस के कारण कुल बिल में बढ़ोतरी होगी।
कुल मिलाकर, 1 अप्रैल 2026 से लागू हो रहे ये बदलाव आम लोगों की जिंदगी के कई पहलुओं को प्रभावित करेंगे। जहां एक ओर प्रॉपर्टी खरीदना महंगा हो जाएगा, वहीं पहाड़ी राज्यों में घूमना भी पहले से ज्यादा खर्चीला साबित होगा। हालांकि, डिजिटल प्रक्रियाओं के बढ़ने से कई सेवाएं आसान और पारदर्शी भी बनेंगी।



