
वाशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा दावा किया है जिसने वैश्विक कूटनीति में खलबली मचा दी है। एक्सियोस (Axios) की एक विशेष रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्रुप ऑफ सेवन (G7) देशों के नेताओं के साथ एक उच्च-स्तरीय कॉल के दौरान विश्वास जताया है कि ईरान अब घुटने टेकने के कगार पर है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान के नए सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ निर्णायक जंग का आह्वान किया है।
“ईरान आत्मसमर्पण करने वाला है”: जी7 कॉल का अंदरूनी विवरण
एक्सियोस की रिपोर्ट में तीन विभिन्न जी7 देशों के अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि बुधवार को हुई एक गोपनीय कॉल पर राष्ट्रपति ट्रंप ने तेहरान की स्थिति पर चर्चा की। ट्रंप ने सहयोगियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि अमेरिकी दबाव और सैन्य कार्रवाई के कारण ईरान का आतंकवादी शासन अब टिकने की स्थिति में नहीं है और वह जल्द ही “आत्मसमर्पण” (Surrender) कर सकता है।
रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि ट्रंप निजी बातचीत में भी युद्ध के परिणामों को लेकर उतने ही आश्वस्त और आक्रामक हैं, जितने वे अपने सार्वजनिक भाषणों में नजर आते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका ईरान के इस्लामी शासन के खिलाफ अपने ‘मैक्सिमम प्रेशर’ अभियान को और तेज करेगा।
ट्रुथ सोशल पर ट्रंप का गर्जन: “नौसेना और वायु सेना खत्म”
जी7 कॉल के बाद ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक लंबी पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स जैसे मीडिया संस्थानों पर निशाना साधते हुए अमेरिकी सेना की जीत का दावा किया।
ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा:
“हम ईरान के आतंकवादी शासन को सैन्य, आर्थिक और हर तरह से नष्ट कर रहे हैं। यदि आप फेक न्यूज मीडिया पढ़ेंगे, तो आपको लगेगा कि हम नहीं जीत रहे, लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत है। ईरान की नौसेना खत्म हो चुकी है, उनकी वायु सेना अब अस्तित्वहीन है, और उनके ड्रोन व मिसाइल ठिकाने मलबे में तब्दील हो चुके हैं।”
ट्रंप ने आगे कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में, वे उन “विक्षिप्त बदमाशों” को मिटा रहे हैं जो पिछले 47 वर्षों से निर्दोष लोगों की हत्या कर रहे हैं। उन्होंने अपनी सैन्य मारक क्षमता और असीमित गोला-बारूद का हवाला देते हुए ईरान को कड़ी चेतावनी दी।
ईरान का पलटवार: ‘ट्रू प्रॉमिस 4’ का आगाज़
ट्रंप के इन दावों के बीच ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने भी अपने तेवर कड़े कर लिए हैं। ईरान ने घोषणा की है कि उसने ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ (Operation True Promise 4) के 44वें चरण की शुरुआत कर दी है।
तेहरान के अनुसार:
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इस ऑपरेशन के तहत इजरायल के कब्जे वाले क्षेत्रों में महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है।
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पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर भी ड्रोन और मिसाइल हमले किए गए हैं।
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नए सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई ने नागरिकों से अपील की है कि वे अमेरिका और इजरायल के “अहंकार” के खिलाफ लड़ाई जारी रखें।
मुजतबा खामेनेई की चुनौती और कूटनीतिक जटिलता
ईरान के नेतृत्व में हालिया बदलाव और मुजतबा खामेनेई का उभार इस संघर्ष को और अधिक हिंसक बना रहा है। जहां ट्रंप का मानना है कि ईरान आर्थिक और सैन्य रूप से टूट चुका है, वहीं खामेनेई की ओर से की गई जवाबी कार्रवाई की अपील यह दर्शाती है कि तेहरान अभी पीछे हटने के मूड में नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की रणनीति ईरान को पूरी तरह से अलग-थलग करने की है, ताकि वहां के शासन को बातचीत की मेज पर लाया जा सके या उसे ढहने पर मजबूर किया जा सके। हालांकि, जी7 देशों के बीच इस बात को लेकर चिंता है कि यदि ईरान ने अपनी बची-कुची ताकत के साथ बड़ा हमला किया, तो यह क्षेत्रीय युद्ध पूरे विश्व के लिए संकट पैदा कर सकता है।
निर्णायक मोड़ पर युद्ध
वर्तमान में स्थिति यह है कि एक तरफ अमेरिका की असीमित मारक क्षमता और ‘अजेय’ होने का दावा है, तो दूसरी तरफ ईरान की कट्टरपंथी नेतृत्व वाली जवाबी कार्रवाई की धमकी। ट्रंप का यह कहना कि “वह इस युद्ध को जीत रहे हैं”, उनके समर्थकों के बीच उत्साह पैदा कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत ‘ट्रू प्रॉमिस 4’ जैसे हमलों के बाद और भी गंभीर होती दिख रही है।



