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The Hill India > Blog > उत्तराखंड > आत्मनिर्भरता की दहलीज पर उत्तराखंड: कृषि, उद्योग और पर्यटन बने विकास के ‘त्रिशक्ति’ सारथी; बजट में करोड़ों का प्रावधान
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आत्मनिर्भरता की दहलीज पर उत्तराखंड: कृषि, उद्योग और पर्यटन बने विकास के ‘त्रिशक्ति’ सारथी; बजट में करोड़ों का प्रावधान

The Hill India News
Last updated: March 9, 2026 2:52 pm
The Hill India News
Published: March 9, 2026
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देहरादून: हिमालयी राज्य उत्तराखंड अब केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि एक सशक्त और आत्मनिर्भर आर्थिकी के मॉडल के रूप में उभरने को तैयार है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने ‘आत्मनिर्भर उत्तराखंड’ की जिस यात्रा का खाका खींचा है, उसके केंद्र में तीन मुख्य स्तंभ हैं—कृषि, उद्योग और पर्यटन।

Contents
आत्मनिर्भरता के तीन उद्देश्य: निवेश, उत्पादकता और रोजगार01. कृषि एवं उद्यान: ‘महक क्रांति’ और ‘मिशन एप्पल’ से बदलेगी ग्रामीण आर्थिकी02. उद्योग: MSME और स्टार्टअप्स को पंख लगाने की तैयारी03. पर्यटन: वैश्विक गंतव्य के रूप में उभरती देवभूमिविशेषज्ञ विश्लेषण: क्या यह बजट पलायन पर लगाम लगाएगा?आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदमबजट 2026 की प्रमुख घोषणाएं: एक नजर में

मुख्यमंत्री धामी ने इन तीनों क्षेत्रों को राज्य की आत्मनिर्भरता की यात्रा के ‘ड्राइवर्स’ (Drivers) की संज्ञा दी है। सरकार का स्पष्ट विजन है कि यदि इन तीनों क्षेत्रों को समन्वित रूप से विकसित किया जाए, तो राज्य में उत्पादकता बढ़ेगी, वैश्विक निवेश आकर्षित होगा और स्थानीय युवाओं को सम्मानजनक आजीविका के अवसर प्राप्त होंगे।

आत्मनिर्भरता के तीन उद्देश्य: निवेश, उत्पादकता और रोजगार

राज्य सरकार ने बजट 2026-27 को इस प्रकार डिजाइन किया है कि यह एक साथ तीन बड़े लक्ष्यों को भेद सके:

  1. उत्पादकता में वृद्धि: पारंपरिक खेती के साथ-साथ हॉर्टिकल्चर और नगदी फसलों पर जोर।

  2. निवेश आकर्षण: उद्योगों के लिए सरल नीति और स्टार्टअप्स के लिए अनुकूल वातावरण।

  3. सम्मानजनक आजीविका: पर्यटन और स्वरोजगार के जरिए रिवर्स पलायन को बढ़ावा देना।


01. कृषि एवं उद्यान: ‘महक क्रांति’ और ‘मिशन एप्पल’ से बदलेगी ग्रामीण आर्थिकी

उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने बागवानी और सुगंधित पौधों (Aromatic Plants) को आय का मुख्य जरिया माना है। बजट में इसके लिए विशेष ‘डोज’ दी गई है:

  • मिशन एप्पल और कीवी प्रोत्साहन: राज्य को सेब उत्पादन में अग्रणी बनाने के लिए ₹42 करोड़ का प्रावधान किया गया है। वहीं कीवी और ड्रैगन फ्रूट जैसी विदेशी और उच्च मूल्य वाली फसलों के लिए ₹30.70 करोड़ आवंटित किए गए हैं।

  • सुरक्षा और बीमा: किसानों की फसलों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए घेराबड़ (Fencing) हेतु ₹20 करोड़ और प्रतिकूल मौसम से सुरक्षा के लिए ‘उद्यान बीमा योजना’ में ₹40 करोड़ रखे गए हैं।

  • चाय और सुगंधित खेती: उत्तराखंड की चाय को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए ₹25.93 करोड़ और ‘महक क्रांति’ (सुगंधित पौधों के विकास) के लिए ₹10 करोड़ का निवेश किया जाएगा।


02. उद्योग: MSME और स्टार्टअप्स को पंख लगाने की तैयारी

मैदानी क्षेत्रों के साथ-साथ पहाड़ी जिलों में छोटे उद्योगों का जाल बिछाने के लिए सरकार ने औद्योगिक नीतियों को वित्तीय मजबूती प्रदान की है:

  • MSME को संबल: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की सहायता योजना के लिए ₹75 करोड़ का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया है। यह योजना स्थानीय स्तर पर छोटे कारखानों को संजीवनी देगी।

  • स्वरोजगार की बहार: ‘मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना’ के तहत ₹60 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिसका सीधा लाभ उन युवाओं को मिलेगा जो नौकरी के बजाय अपना व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं।

  • मेगा टेक्सटाइल और स्टार्टअप फंड: निवेश को बढ़ावा देने के लिए मेगा इंडस्ट्रियल और टेक्सटाइल नीति के तहत ₹25 करोड़ का अनुदान और नए उद्यमियों के लिए ₹25 करोड़ का ‘स्टार्टअप वेंचर फंड’ बनाया गया है।

  • निवेश प्रोत्साहन: ‘प्रमोशन ऑफ इन्वेस्टमेंट’ गतिविधियों के लिए ₹30 करोड़ खर्च किए जाएंगे ताकि वैश्विक निवेशक उत्तराखंड की ओर रुख करें।


03. पर्यटन: वैश्विक गंतव्य के रूप में उभरती देवभूमि

पर्यटन उत्तराखंड की आर्थिकी की रीढ़ है। सरकार अब केवल धार्मिक पर्यटन ही नहीं, बल्कि इको-टूरिज्म और एडवेंचर टूरिज्म को भी नई ऊंचाई देना चाहती है:

  • बजट का बड़ा हिस्सा: पर्यटन विभाग के लिए राजस्व मद में ₹210.59 करोड़ और बुनियादी ढांचे (पूंजीगत मद) के विकास के लिए ₹296.45 करोड़ का ऐतिहासिक आवंटन किया गया है।

  • ग्लोबल टूरिस्ट डेस्टिनेशन: राज्य के चुनिंदा पर्यटन स्थलों को वैश्विक स्तर पर विकसित करने के लिए ₹10 करोड़ की प्रारंभिक राशि रखी गई है।

  • इको-टूरिज्म और योग: पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए पर्यटन गतिविधियों (Eco-Tourism) के लिए ₹18.50 करोड़ और योग की विश्व राजधानी के रूप में पहचान को पुख्ता करने हेतु योग दिवस आयोजनों के लिए ₹2 करोड़ आवंटित हैं।


विशेषज्ञ विश्लेषण: क्या यह बजट पलायन पर लगाम लगाएगा?

आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि धामी सरकार का यह ‘त्रिकोणीय फोकस’ राज्य के असंतुलित विकास को ठीक कर सकता है। कृषि (Primary Sector), उद्योग (Secondary Sector) और पर्यटन/सेवा (Tertiary Sector) को एक साथ बजट में प्राथमिकता मिलना संतुलित आर्थिक विकास का संकेत है।

विशेष रूप से, ‘मिशन एप्पल’ और ‘महक क्रांति’ जैसे प्रयास सीमांत क्षेत्रों के किसानों को सीधे बाजार से जोड़ेंगे, जिससे पलायन की समस्या कम हो सकती है। वहीं, स्टार्टअप फंड और मेगा इंडस्ट्रियल नीतियां युवाओं को बड़े शहरों की ओर भागने के बजाय अपने ही राज्य में रोजगार के अवसर प्रदान करेंगी।


आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह विजन “विकल्प रहित संकल्प” की दिशा में एक बड़ा कदम है। बजट की यह ‘त्रिशक्ति’—कृषि, उद्योग और पर्यटन—न केवल उत्तराखंड के राजस्व में वृद्धि करेगी, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की आर्थिकी को एक मजबूत आधार प्रदान करेगी। अब सारा दारोमदार इन योजनाओं के धरातल पर क्रियान्वयन और अधिकारियों की सक्रियता पर टिका है।


बजट 2026 की प्रमुख घोषणाएं: एक नजर में

क्षेत्र प्रमुख योजना आवंटित राशि (करोड़ में)
कृषि मिशन एप्पल (Apple Mission) ₹42.00
कृषि उद्यान बीमा योजना ₹40.00
उद्योग MSME सहायता योजना ₹75.00
उद्योग मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना ₹60.00
पर्यटन बुनियादी ढांचा (पूंजीगत मद) ₹296.45
पर्यटन इको टूरिज्म गतिविधियां ₹18.50

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