
देहरादून। उत्तराखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में धामी सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। प्रदेश के दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों को अब छोटी-छोटी जांचों के लिए जिला अस्पतालों या बड़े शहरों की ओर नहीं दौड़ना पड़ेगा। सूबे के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अगले छह महीनों के भीतर प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड (ब्लॉक) स्तर पर अल्तरासाउंड और एक्स-रे सुविधा अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए।
पहाड़ की पीड़ा पर मरहम लगाने की तैयारी
उत्तराखंड में अक्सर स्वास्थ्य सेवाओं की लचर व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर सवाल उठते रहे हैं। विशेष रूप से पर्वतीय जिलों में गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को एक अल्ट्रासाउंड या एक्स-रे के लिए मीलों का सफर तय करना पड़ता था। कई बार समय पर जांच न होने के कारण इलाज में देरी होती थी, जो मरीजों के लिए जानलेवा साबित होती थी।
इसी गंभीर समस्या का संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अब ‘ब्लॉक लेवल’ पर इन मशीनों को स्थापित करने का निर्णय लिया है। स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया है कि सरकार का मुख्य ध्येय ‘अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति’ तक गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवा पहुंचाना है।
6 महीने का ‘डेडलाइन’ और अधिकारियों को निर्देश
स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत ने सचिवालय में विभागीय समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को सख्त लहजे में छह महीने का टारगेट दिया है। उन्होंने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMOs) को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के विकासखंड स्तर पर स्थित उप-जिला चिकित्सालयों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) में इन मशीनों की आवश्यकता का प्रस्ताव तत्काल शासन को भेजें।
उन्होंने कहा, “सरकार चिकित्सा सेवाओं को अपग्रेड करने के लिए प्रतिबद्ध है। बजट की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी, लेकिन निर्धारित समय सीमा के भीतर मशीनों की खरीद और स्थापना हो जानी चाहिए।”
रेडियोलॉजिस्ट और तकनीशियनों की होगी तैनाती
केवल मशीनें लगा देना ही समाधान नहीं है, बल्कि उन्हें चलाने के लिए विशेषज्ञ मानव संसाधन की भी आवश्यकता होती है। राज्य में अक्सर यह देखा गया है कि मशीनें उपलब्ध होने के बावजूद रेडियोलॉजिस्ट और एक्स-रे तकनीशियनों की कमी के चलते वे धूल फांकती रहती हैं।
इस समस्या के समाधान के लिए मंत्री ने अधिकारियों को रिक्त पदों पर तत्काल तैनाती के निर्देश दिए हैं। विभाग अब ब्लॉक स्तर पर रेडियोलॉजिस्ट की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विशेष रणनीति पर काम कर रहा है, ताकि मशीनों का लाभ वास्तविक रूप में मरीजों को मिल सके।
वर्तमान स्थिति और भविष्य का रोडमैप
वर्तमान में उत्तराखंड के 95 ब्लॉकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति मिश्रित है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार:
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कुल ब्लॉक: 95
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वर्तमान में उपलब्ध एक्स-रे मशीनें: 84
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वर्तमान में उपलब्ध अल्ट्रासाउंड मशीनें: 47
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि अभी भी कई ब्लॉकों में एक भी अल्ट्रासाउंड मशीन उपलब्ध नहीं है। सरकार का लक्ष्य इस अंतर (Gap) को अगले 180 दिनों में पाट देना है। इसके बाद प्रदेश के सभी 95 ब्लॉकों में शत-प्रतिशत मशीनों की उपलब्धता होगी।
स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का विजन
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रदेश की विषम भौगोलिक परिस्थिति को देखते हुए यह कदम उठाना अनिवार्य था। जब स्थानीय स्तर पर ही अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे की सुविधा उपलब्ध होगी, तो जिला अस्पतालों पर मरीजों का दबाव कम होगा। इससे न केवल मरीजों का पैसा बचेगा, बल्कि समय रहते बीमारी का पता चलने से बेहतर इलाज संभव हो सकेगा।
‘बुग्याल न्यूज़’ का विश्लेषण: एक बड़ी चुनौती और उम्मीद
राज्य सरकार का यह निर्णय निश्चित रूप से सराहनीय है, लेकिन इसकी सफलता इसके क्रियान्वयन (Implementation) पर निर्भर करती है। मशीनों की खरीद के साथ-साथ उनके रखरखाव और बिजली की निर्बाध आपूर्ति भी पहाड़ों में एक बड़ी चुनौती है। यदि सरकार सफलतापूर्वक इन 95 ब्लॉकों को आधुनिक मशीनों और कुशल मैनपावर से जोड़ देती है, तो यह उत्तराखंड के स्वास्थ्य इतिहास में एक ‘गेम चेंजर’ साबित होगा।
स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि सरकार अब ‘हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर’ को लेकर गंभीर है। उत्तराखंड स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की यह पहल यदि धरातल पर समय से उतरती है, तो प्रदेश के ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों के निवासियों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं होगा।



