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नेपाल में ‘बदलाव’ का महाकुंभ: Gen-Z क्रांति के बाद पहली बार मतदान, क्या युवा शक्ति ढहाएगी पुरानी सियासत के किले?

The Hill India News
Last updated: March 5, 2026 2:25 am
The Hill India News
Published: March 5, 2026
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काठमांडू: हिमालय की गोद में बसे नेपाल के लिए आज का दिन महज एक तारीख नहीं, बल्कि एक नए युग की दहलीज है। सितंबर 2025 में हुए उस भीषण और रक्तरंजित ‘Gen-Z आंदोलन’ के बाद, जिसने सत्ता की चूलें हिला दी थीं, आज नेपाल की जनता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रही है। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के पतन और अंतरिम सरकार के गठन के बाद हो रहे ये चुनाव तय करेंगे कि नेपाल की राजनीति पारंपरिक वामपंथी और लोकतांत्रिक गठबंधनों के हाथ में रहेगी या ‘बालेन शाह’ जैसे नए दौर के युवा नायकों के पास।

Contents
रक्तपात से मतपत्र तक: आंदोलन की वो यादेंचुनावी गणित: 1.89 करोड़ वोटर और 275 सीटेंसुरक्षा का चक्रव्यूह: 3 लाख जवान तैनातबालेन शाह बनाम पारंपरिक दिग्गज: कौन मारेगा बाजी?अंतरराष्ट्रीय नजरें: भारत और चीन की दिलचस्पीकिसानों और पर्यटन क्षेत्र की उम्मीदेंक्या इतिहास खुद को दोहराएगा?

रक्तपात से मतपत्र तक: आंदोलन की वो यादें

पिछले साल सितंबर 2025 में नेपाल ने आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ा जन-विद्रोह देखा था। भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और तानाशाही रवैये के खिलाफ उतरी ‘Gen-Z’ पीढ़ी ने सड़कों पर मोर्चा संभाला था। उस आंदोलन में 70 से अधिक युवाओं ने अपनी जान गंवाई और हजारों घायल हुए। संसद भवन की आग और केपी शर्मा ओली का इस्तीफा उसी गुस्से का परिणाम था। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाकर लोकतंत्र को पटरी पर लाने की कोशिश की गई, जिसका अंतिम पड़ाव आज का मतदान है।

चुनावी गणित: 1.89 करोड़ वोटर और 275 सीटें

नेपाल निर्वाचन आयोग के अनुसार, इस बार लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सेदारी का उत्साह चरम पर है।

  • कुल मतदाता: 1.89 करोड़ से अधिक।

  • संसदीय सीटें: 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा (House of Representatives)।

  • चुनाव प्रणाली: 165 सीटों पर प्रत्यक्ष चुनाव (First-past-the-post) और शेष 110 सीटें आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के आधार पर।

  • उम्मीदवार: 6,500 से अधिक प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

कार्यवाहक निर्वाचन आयुक्त राम प्रसाद भंडारी ने बताया कि मतदान सुबह 7 बजे से शुरू होकर शाम 5 बजे तक चलेगा। दुर्गम पहाड़ी इलाकों से मतपेटियों को सुरक्षित लाने के लिए नेपाली सेना के विशेष हेलीकॉप्टरों की तैनाती की गई है।


सुरक्षा का चक्रव्यूह: 3 लाख जवान तैनात

आंदोलन की कड़वी यादों और किसी भी संभावित हिंसा को रोकने के लिए नेपाल सरकार ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। नेपाल आर्मी, सशस्त्र पुलिस बल और म्यादी पुलिस को मिलाकर कुल 3 लाख से ज्यादा सुरक्षाकर्मी चप्पे-चप्पे पर तैनात हैं। भारत और चीन से लगी सीमाओं को सील कर दिया गया है ताकि बाहरी हस्तक्षेप या अवांछित तत्वों का प्रवेश रोका जा सके।


बालेन शाह बनाम पारंपरिक दिग्गज: कौन मारेगा बाजी?

इस चुनाव की सबसे बड़ी खासियत ‘पीढ़ीगत संघर्ष’ (Generation Gap) है। एक तरफ केपी शर्मा ओली, शेर बहादुर देउबा और पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ जैसे मंझे हुए राजनीतिज्ञ हैं, तो दूसरी तरफ काठमांडू के मेयर बालेन शाह जैसे युवा चेहरे हैं जो ‘वैकल्पिक राजनीति’ का चेहरा बनकर उभरे हैं।

युवाओं की मुख्य मांगें:

  1. भ्रष्टाचार का समूल नाश: Gen-Z वोटर अब फाइलों में दबे घोटालों का हिसाब चाहते हैं।

  2. रोजगार के अवसर: खाड़ी देशों में पलायन करने को मजबूर नेपाली युवाओं के लिए स्वदेश में अवसर।

  3. पारदर्शिता: सरकारी कामकाज में डिजिटल गवर्नेंस और जवाबदेही।

  4. संवैधानिक सुधार: राजशाही बनाम गणतंत्र की बहस के बीच एक स्थिर और आधुनिक संविधान की मांग।


अंतरराष्ट्रीय नजरें: भारत और चीन की दिलचस्पी

नेपाल में सत्ता परिवर्तन का असर सिर्फ काठमांडू तक सीमित नहीं रहता। नई दिल्ली और बीजिंग दोनों ही इस चुनाव के नतीजों पर पैनी नजर रखे हुए हैं। केपी शर्मा ओली का झुकाव अक्सर चीन की तरफ रहा है, जबकि नेपाली कांग्रेस को भारत के करीब माना जाता है। हालांकि, इस बार ‘स्वतंत्र उम्मीदवारों’ की बढ़ती संख्या ने दोनों पड़ोसी देशों के समीकरणों को पेचीदा बना दिया है।


किसानों और पर्यटन क्षेत्र की उम्मीदें

चुनावों के बीच नेपाल की रीढ़ मानी जाने वाली कृषि और पर्यटन क्षेत्र के लोग भी बड़ी उम्मीदें लगाए बैठे हैं। बीते साल की अस्थिरता ने पर्यटन उद्योग को भारी चोट पहुँचाई थी। व्यापारियों को उम्मीद है कि एक स्थिर सरकार आने से विदेशी निवेश बढ़ेगा और नेपाल की अर्थव्यवस्था फिर से पटरी पर लौटेगी।

क्या इतिहास खुद को दोहराएगा?

नेपाल का यह आम चुनाव सिर्फ सरकार चुनने का जरिया नहीं है, बल्कि यह उस ‘सिस्टम’ के खिलाफ जनमत संग्रह है जिसे युवाओं ने 2025 में खारिज कर दिया था। यदि बालेन शाह और उनके समर्थक निर्दलीय उम्मीदवार बड़ी संख्या में जीतते हैं, तो यह दक्षिण एशिया की राजनीति में एक बड़ा संदेश होगा कि अब ‘स्टेटस को’ (यथास्थिति) को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

शाम 5 बजे जैसे ही मतपेटियां बंद होंगी, नेपाल की अगली पांच साल की तकदीर उनमें कैद हो जाएगी। वोटों की गिनती आज रात से ही शुरू होने की संभावना है, और शुरुआती रुझान कल सुबह तक स्पष्ट हो सकते हैं।

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