
नई दिल्ली/तेहरान/तेल अवीव: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) इस समय तीसरे विश्वयुद्ध की दहलीज पर खड़ा नजर आ रहा है। इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान के खिलाफ अब तक के सबसे भीषण सैन्य अभियान ‘शील्ड ऑफ जुदाह’ (Shield of Judah) का आगाज कर दिया है। तेहरान की धरती एक के बाद एक 30 बैलिस्टिक मिसाइल धमाकों से दहल उठी है। इस हमले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को आनन-फानन में किसी अज्ञात सुरक्षित बंकर में शिफ्ट कर दिया गया है।
परमाणु ठिकानों और कमांड सेंटरों पर प्रहार
इजरायली वायुसेना और अमेरिकी मिसाइल यूनिट ने इस बार सीधे ईरान की रीढ़ पर वार किया है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया गया है। अमेरिका और इजरायल का साझा लक्ष्य ईरान की परमाणु क्षमता को पूरी तरह ध्वस्त करना है। इस हमले में ईरान के कई शीर्ष सैन्य कमांडरों के मारे जाने की भी खबर है, जिससे ईरानी खेमे में भारी अफरा-तफरी का माहौल है।
डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा संदेश: “हथियार डालें या मौत का सामना करें”
ईरान पर हमले के तुरंत बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान सामने आया है, जिसने वैश्विक राजनीति में खलबली मचा दी है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह ऑपरेशन ईरान में सत्ता परिवर्तन की दिशा में एक बड़ा कदम है। ट्रंप ने कहा:
“खामेनेई के पास अब केवल दो ही रास्ते बचे हैं—या तो वे बिना शर्त हथियार डाल दें या फिर अपनी मौत का सामना करने के लिए तैयार रहें। हमें दुनिया के लिए बने इस खतरे को हमेशा के लिए खत्म करना है। ऑपरेशन शुरू हो गया है और यह तब तक जारी रहेगा जब तक लक्ष्य हासिल नहीं हो जाता।”
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और इजरायल अब ईरान में शासन व्यवस्था बदलने (Regime Change) के अपने घोषित एजेंडे पर आगे बढ़ रहे हैं।
भारत ने जारी किया हाई-अलर्ट: नागरिकों को सख्त निर्देश
मध्य पूर्व में बिगड़ते हालातों के बीच भारत सरकार ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। इजरायल में रह रहे हजारों भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक एडवाइजरी जारी की है।
भारत सरकार ने कहा है: “क्षेत्र में मौजूदा सुरक्षा स्थिति को देखते हुए, इज़रायल में रहने वाले सभी भारतीय नागरिकों को अत्यधिक सावधानी बरतने और हर समय सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। भारतीय नागरिकों को इज़राइली अधिकारियों और गृह मोर्चा कमान (Home Front Command) द्वारा जारी सुरक्षा दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करना चाहिए।”
भारतीय दूतावास लगातार वहां के नागरिकों के संपर्क में है और आपातकालीन नंबर जारी किए गए हैं। सरकार ने भारतीयों को अनावश्यक यात्रा से बचने और सुरक्षित बंकरों के पास रहने की सलाह दी है।

ईरान का पलटवार: “दुनिया देखेगी सबसे घातक अटैक”
खुद पर हुए इस भीषण हमले के बाद ईरान ने भी पीछे न हटने के संकेत दिए हैं। ईरानी रक्षा मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि वे चुप नहीं बैठेंगे और इजरायल पर अब तक का सबसे घातक पलटवार करेंगे। ईरान की ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड्स’ (IRGC) को हाई अलर्ट पर रखा गया है और वे अपनी लंबी दूरी की मिसाइलों को दागने की तैयारी कर रहे हैं। यदि ईरान पलटवार करता है, तो पूरा क्षेत्र एक ऐसी आग की लपेट में आ जाएगा जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर भयावह असर पड़ेगा।
विश्लेषण: ‘शील्ड ऑफ जुदाह’ का वैश्विक प्रभाव
रणनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, ‘शील्ड ऑफ जुदाह’ केवल एक जवाबी हमला नहीं है, बल्कि यह एक सुनियोजित सैन्य रणनीति है।
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शक्ति का प्रदर्शन: अमेरिका और इजरायल ने दिखा दिया है कि वे ईरान के सबसे सुरक्षित इलाकों को भेदने में सक्षम हैं।
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तेल की आपूर्ति पर खतरा: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव बढ़ने से दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं।
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रूस-चीन की भूमिका: अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ईरान के सहयोगी देश रूस और चीन इस हमले पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
युद्ध या कूटनीति?
ईरान पर इजरायल के इस हमले ने कूटनीति के सारे रास्ते लगभग बंद कर दिए हैं। ट्रंप का रुख साफ है कि वे इस बार आधे-अधूरे समाधान के मूड में नहीं हैं। आने वाले 48 घंटे पूरी दुनिया के लिए बहुत महत्वपूर्ण होने वाले हैं। क्या ईरान अपनी हार स्वीकार करेगा या फिर मध्य पूर्व एक ऐसे महायुद्ध की ओर बढ़ेगा जिससे पूरी मानवता प्रभावित होगी?



