नई दिल्ली/लेह: भारत के उत्तरी हिस्से में स्थित केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख एक बार फिर कुदरती हलचल का केंद्र बना है। गुरुवार तड़के जब दुनिया गहरी नींद में थी, तब लद्दाख के लेह क्षेत्र में भूकंप के तेज झटकों ने लोगों को झकझोर कर रख दिया। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मॉलॉजी (NCS) के आंकड़ों के मुताबिक, इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.1 दर्ज की गई है। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस घटना में अब तक किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना प्राप्त नहीं हुई है।
तड़के 3:54 बजे महसूस हुए झटके, दहशत का माहौल
जानकारी के अनुसार, लेह में भूकंप गुरुवार सुबह ठीक 3 बजकर 54 मिनट पर आया। जैसे ही धरती डोलने लगी, कई लोगों की नींद टूट गई। ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले निवासियों ने बताया कि झटके इतने महसूस किए जा सकते थे कि घरों में रखे बर्तन और पंखे हिलने लगे। डर और अनहोनी की आशंका के चलते लेह के विभिन्न इलाकों में लोग कड़कड़ाती ठंड के बावजूद अपने घरों से बाहर निकल आए और खुले मैदानों की ओर भागे।
गहराई ने कम किया तबाही का खतरा
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो इस भूकंप का केंद्र काफी गहराई में था, जो बड़े नुकसान को टालने में सहायक रहा। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मॉलॉजी (NCS) ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि भूकंप का केंद्र जमीन से लगभग 150 किलोमीटर नीचे था। आमतौर पर, जितनी अधिक गहराई पर भूकंप का केंद्र (Hypocenter) होता है, सतह पर उसका विनाशकारी प्रभाव उतना ही कम महसूस होता है। यही कारण है कि 4.1 की तीव्रता होने के बावजूद इमारतों के गिरने या गंभीर नुकसान की खबरें सामने नहीं आईं।
उत्तर भारत में बढ़ती हलचल: कल राजस्थान भी हिला था
पिछले कुछ दिनों से भारत के अलग-अलग राज्यों में टेक्टोनिक प्लेटों की सक्रियता बढ़ी हुई देखी जा रही है। लेह की इस घटना से ठीक एक दिन पहले, यानी बुधवार को राजस्थान के खैरताल-तिजारा जिले में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। हालांकि राजस्थान में भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.0 मापी गई थी, लेकिन इसकी गहराई चिंता का विषय थी।
एनसीएस के अनुसार, राजस्थान में आए उस भूकंप का केंद्र जमीन से महज 3 किलोमीटर नीचे था। कम गहराई वाले भूकंप (Shallow Earthquakes) अक्सर अधिक तीव्रता महसूस कराते हैं, भले ही रिक्टर स्केल पर उनका अंक कम हो। लगातार दो दिनों में देश के दो अलग-अलग कोनों (लद्दाख और राजस्थान) में हुई इस हलचल ने भू-वैज्ञानिकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
भूकंपीय जोन-5 में आता है लद्दाख
भू-वैज्ञानिकों के अनुसार, लद्दाख और हिमालयी क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से ‘जोन-5’ (Seismic Zone V) के अंतर्गत आते हैं। यह क्षेत्र दुनिया के सबसे संवेदनशील सिस्मिक जोन में गिना जाता है। भारतीय प्लेट का यूरेशियन प्लेट की ओर लगातार खिसकना इस क्षेत्र में ऊर्जा का संचय करता है, जो समय-समय पर भूकंप के रूप में बाहर आती है। लेह में भूकंप आना इस बेल्ट की निरंतर सक्रियता का एक प्रमाण है।
प्रशासन की अपील: घबराएं नहीं, सतर्क रहें
लेह जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीम स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है। स्थानीय अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, लेकिन सतर्क जरूर रहें। पर्वतीय क्षेत्रों में पुराने कच्चे मकानों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि मुख्य भूकंप के बाद कभी-कभी ‘आफ्टरशॉक्स’ (Aftershocks) आने की संभावना बनी रहती है, इसलिए सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य है।
भूकंप आने पर क्या करें?
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जैसे ही झटके महसूस हों, तुरंत ‘ड्रॉप, कवर और होल्ड’ (नीचे झुकें, किसी मजबूत मेज के नीचे शरण लें) का पालन करें।
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लिफ्ट का प्रयोग बिल्कुल न करें, सीढ़ियों का इस्तेमाल करें।
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अगर आप घर के अंदर हैं, तो कांच की खिड़कियों और भारी अलमारियों से दूर रहें।
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यदि आप वाहन चला रहे हैं, तो उसे किसी सुरक्षित और खुले स्थान पर रोक दें।
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बिजली के खंभों और जर्जर इमारतों के पास खड़े न हों।
हालांकि लेह में भूकंप के इस हालिया झटके ने जान-माल का नुकसान नहीं पहुंचाया है, लेकिन यह हमें प्रकृति की अनिश्चितता के प्रति सचेत करता है। लद्दाख और राजस्थान जैसी घटनाओं का सिलसिला इस बात की ओर इशारा करता है कि भारत के सिस्मिक मैप पर निगरानी बढ़ाना और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को और पुख्ता करना समय की मांग है।



