
देहरादून: उत्तराखंड की चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने के लिए राजभवन ने एक बड़ा निर्णय लिया है। प्रख्यात हृदय रोग विशेषज्ञ और एम्स (AIIMS) ऋषिकेश में कार्डियोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. भानु दुग्गल को हेमवती नंदन बहुगुणा (HNB) उत्तराखण्ड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय का नया कुलपति नियुक्त किया गया है। राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं।
डॉ. दुग्गल की नियुक्ति आगामी पांच वर्षों या 70 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) के लिए की गई है। उनकी यह नियुक्ति उत्तराखंड में चिकित्सा शिक्षा के स्तर को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढालने की दिशा में एक रणनीतिक कदम मानी जा रही है।
नियुक्ति की प्रक्रिया और विधिक आधार
राजभवन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह चयन पूरी तरह से योग्यता और अनुभव पर आधारित है। HNB उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय अधिनियम-2014 (संशोधन अधिनियम 2020) की धारा-10 की उपधारा (4) के तहत गठित ‘अन्वेषण समिति’ (Investigation Committee) ने कई दिग्गजों के नामों का पैनल तैयार किया था। इसी पैनल में से धारा 10 की उपधारा (5) के खण्ड (ख) के प्रावधानों के अंतर्गत डॉ. भानु दुग्गल के नाम पर अंतिम मुहर लगाई गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि डॉ. दुग्गल का शैक्षणिक और क्लीनिकल अनुभव विश्वविद्यालय के प्रशासनिक ढांचे को मजबूती प्रदान करेगा।
शानदार करियर और अकादमिक रिकॉर्ड
13 नवंबर 1968 को जन्मीं डॉ. भानु दुग्गल का शैक्षणिक सफर असाधारण रहा है। उन्होंने 1989 में एमबीबीएस (MBBS) की डिग्री हासिल की, जिसके बाद 1993 में जनरल मेडिसिन में एमडी (MD) की। हृदय रोग विज्ञान के प्रति उनकी रुचि उन्हें डीएम (DM Cardiology) तक ले गई, जो उन्होंने 1996 में पूर्ण की। साल 2000 में उन्होंने ‘पोस्ट डॉक्टोरल फेलोशिप इन कार्डियोलॉजी’ के साथ अपनी विशेषज्ञता को और गहरा किया।
उनके पास बतौर प्रोफेसर 10 वर्ष से अधिक का लंबा अनुभव है। सितंबर 2017 से वे एम्स ऋषिकेश में कार्डियोलॉजी विभाग की कमान संभाल रही हैं। इससे पहले वे मुंबई के प्रतिष्ठित ग्रांट मेडिकल कॉलेज में भी प्रोफेसर और हेड के रूप में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं।
रिसर्च और इनोवेशन की मिसाल
हालांकि डॉ. दुग्गल के पास पहले कुलपति के रूप में प्रशासनिक अनुभव नहीं है, लेकिन उनके अकादमिक योगदान ने उन्हें इस पद का सबसे योग्य दावेदार बनाया। उनके द्वारा लिखे गए 9 बुक चैप्टर्स आज देश-दुनिया के मेडिकल छात्र पढ़ रहे हैं। इसके अतिरिक्त, उनके 100 से अधिक रिसर्च पेपर अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं, जो चिकित्सा जगत में उनके शोध कौशल को प्रमाणित करते हैं।
उनकी विशेषज्ञता का लाभ केवल रिसर्च तक सीमित नहीं रहा है। उनके मार्गदर्शन में:
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4 छात्रों ने सफलतापूर्वक अपनी पीएचडी (PhD) पूरी की है।
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130 से अधिक छात्रों ने डीएम कार्डियोलॉजी (DM) की विशेषज्ञता हासिल की।
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100 से अधिक छात्रों ने उनके अंडर एमडी मेडिसिन (MD) की पढ़ाई की है।
सम्मान और पुरस्कारों से सुसज्जित सफर
चिकित्सा के क्षेत्र में डॉ. दुग्गल के समर्पण और नवाचारों को देखते हुए उन्हें अब तक 8 प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। एक कुशल प्रशासक और डॉक्टर के रूप में उनकी पहचान एम्स ऋषिकेश में कार्डियोलॉजी विभाग को शून्य से शिखर तक ले जाने के लिए जानी जाती है।
उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा के सामने चुनौतियां और उम्मीदें
डॉ. भानु दुग्गल के कुलपति बनने के बाद विश्वविद्यालय से उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। उत्तराखंड के मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी को दूर करना, रिसर्च कल्चर को बढ़ावा देना और राज्य के सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों तक टेलीमेडिसिन और बेहतर चिकित्सा शिक्षा के प्रसार को सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल होगा।
HNB चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में उनका 5 साल का कार्यकाल उत्तराखंड के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाएगा। राज्य के चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि एक अनुभवी कार्डियोलॉजिस्ट का इस पद पर आना राज्य में ‘कार्डियक केयर एजुकेशन’ और सुपर-स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों के विस्तार में सहायक सिद्ध होगा।
डॉ. भानु दुग्गल की नियुक्ति यह संदेश देती है कि उत्तराखंड सरकार और राजभवन अब प्रशासनिक पदों पर केवल प्रशासकों को नहीं, बल्कि विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) को प्राथमिकता दे रहे हैं। डॉ. दुग्गल का अनुभव और उनकी दूरदर्शिता निश्चित रूप से HNB उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय को देश के शीर्ष मेडिकल विश्वविद्यालयों की श्रेणी में खड़ा करने में सफल होगी।



