
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य के हर वर्ग को साधने के लिए सरकारी खजाना खोल दिया है। गुरुवार को विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का अंतरिम बजट पेश करते हुए ममता सरकार ने लोकलुभावन घोषणाओं की झड़ी लगा दी। बजट का मुख्य केंद्र युवा, महिलाएं और सरकारी कर्मचारी रहे।
वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य द्वारा पेश किए गए 4.06 लाख करोड़ रुपये के इस बजट में सबसे बड़ी घोषणा ‘बंगला युवा साथी’ योजना रही, जिसे सीधे तौर पर राज्य के बेरोजगार युवाओं को अपने पाले में करने की कवायद माना जा रहा है।
‘बंगला युवा साथी’: बेरोजगारों के लिए ₹1500 की सीधी मदद
बजट का सबसे चर्चित बिंदु ‘बंगला युवा साथी’ योजना है। इस योजना के माध्यम से ममता सरकार ने राज्य के शिक्षित बेरोजगारों के हाथ में सीधा नकद लाभ पहुँचाने का निर्णय लिया है।
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किसे मिलेगा लाभ: 21 से 40 वर्ष की आयु के बेरोजगार युवा इस योजना के पात्र होंगे।
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भत्ते की राशि: पात्र युवाओं को 1,500 रुपये प्रति माह दिए जाएंगे।
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अवधि: यह सहायता तब तक दी जाएगी जब तक युवा को नौकरी नहीं मिल जाती, या अधिकतम पाँच साल की अवधि तक।
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शर्त: वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि तृणमूल कांग्रेस सत्ता में वापसी करती है, तो यह योजना 15 अगस्त 2026 से पूरे राज्य में लागू कर दी जाएगी।
‘ममता का वोट बैंक’: महिलाओं के लिए लक्ष्मीर भंडार में भारी वृद्धि
पश्चिम बंगाल की राजनीति में महिलाएं ममता बनर्जी की सबसे बड़ी ताकत रही हैं। इस ताकत को और मजबूत करने के लिए सरकार ने अपनी फ्लैगशिप योजना ‘लक्ष्मीर भंडार’ के तहत दी जाने वाली मासिक सहायता में 500 रुपये की बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है।
इस योजना के लिए सरकार ने 15,000 करोड़ रुपये का विशाल बजट आवंटित किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने की यह कोशिश तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में ‘प्रो-इंकम्बेंसी’ लहर पैदा कर सकती है।
फ्रंटलाइन वर्कर्स और सरकारी कर्मचारियों की चांदी
बजट में केवल युवाओं और महिलाओं को ही नहीं, बल्कि राज्य के प्रशासनिक ढांचे को चलाने वाले कर्मचारियों और अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं (Frontline Workers) का भी विशेष ध्यान रखा गया है:
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DA में 4% की बढ़ोतरी: राज्य के सरकारी कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करते हुए महंगाई भत्ते (DA) में 4 प्रतिशत की वृद्धि की घोषणा की गई है।
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आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ता: आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों के भत्तों में 1,000 रुपये की मासिक वृद्धि की गई है। साथ ही, सेवा के दौरान मृत्यु होने पर परिजनों को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है, जिसके लिए 280 करोड़ रुपये अलग से रखे गए हैं।
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ग्रीन पुलिस और नागरिक स्वयंसेवक: कानून व्यवस्था में सहयोग करने वाले नागरिक स्वयंसेवकों और ‘ग्रीन पुलिस’ कर्मियों के मासिक वेतन में भी 1,000 रुपये की वृद्धि की गई है। इसके लिए 150 करोड़ रुपये का आवंटन हुआ है।
विपक्ष के हमले और चुनावी बिसात
जहाँ सत्ता पक्ष इसे ‘जनता का बजट’ बता रहा है, वहीं विपक्ष ने इसे ‘चुनावी जुमला’ करार दिया है। भाजपा और वामदलों का आरोप है कि राज्य की आर्थिक स्थिति जर्जर है और चुनाव जीतने के लिए सरकार कर्ज लेकर खैरात बांटने की तैयारी कर रही है। हालांकि, ममता बनर्जी ने इन आरोपों को दरकिनार करते हुए कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुँचाना है।
पश्चिम बंगाल का यह बजट स्पष्ट रूप से ‘मिशन 2026’ की तैयारी है। बेरोजगारी के मुद्दे पर घिरी सरकार ने ₹1500 का दांव खेलकर विपक्ष के सबसे बड़े हथियार को कुंद करने की कोशिश की है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ‘दीदी’ का यह वित्तीय प्रबंधन उन्हें तीसरी बार सत्ता की कुर्सी तक पहुँचा पाता है या नहीं।



