
उत्तराखंड कांग्रेस में लंबे समय से लंबित प्रदेश कार्यकारिणी गठन को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के दिल्ली दौरे को संगठन विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान के साथ होने वाली बैठकों के बाद जल्द ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) की नई कार्यकारिणी की घोषणा हो सकती है। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि इस बार संगठन को पूरी टीम मिलेगी और चुनावी तैयारियों को गति मिलेगी।
दरअसल, गणेश गोदियाल को उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष बने लगभग छह महीने हो चुके हैं, लेकिन अब तक उनकी टीम का गठन नहीं हो पाया है। प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद से ही संगठनात्मक ढांचे को लेकर लगातार चर्चाएं होती रही हैं, मगर कार्यकारिणी का विस्तार अधर में लटका रहा। ऐसे में अब उनका दिल्ली दौरा राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कांग्रेस के भीतर यह माना जा रहा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी अब और देरी नहीं करना चाहती। उत्तराखंड जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में मजबूत संगठन के बिना चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारना मुश्किल माना जाता है। यही वजह है कि पार्टी आलाकमान भी अब प्रदेश इकाई को सक्रिय और व्यवस्थित करने के मूड में दिखाई दे रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा भी अपने पूरे कार्यकाल में कार्यकारिणी का गठन नहीं कर पाए थे। करन माहरा अप्रैल 2022 से नवंबर 2025 तक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहे। उनके कार्यकाल में 2024 का लोकसभा चुनाव भी संपन्न हुआ, लेकिन संगठनात्मक ढांचा पूरी तरह तैयार नहीं हो सका। अब गणेश गोदियाल के सामने भी वही चुनौती बनी हुई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संगठन में लंबे समय से खाली पदों और कार्यकारिणी के अभाव का असर पार्टी की जमीनी सक्रियता पर पड़ा है। कई जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ता जिम्मेदारियों के इंतजार में हैं, जबकि विपक्षी दल लगातार संगठन को मजबूत करने में जुटे हुए हैं। ऐसे में कांग्रेस के लिए अब संगठन विस्तार केवल औपचारिकता नहीं बल्कि राजनीतिक जरूरत बन चुका है।
प्रदेश कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि संगठन निर्माण की प्रक्रिया लगातार जारी है। जिला अध्यक्षों, ब्लॉक अध्यक्षों और विभिन्न प्रभारियों की नियुक्तियां पहले ही की जा चुकी हैं। अब अगला कदम प्रदेश कार्यकारिणी का विस्तार है। पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि इस बार युवा और सक्रिय कार्यकर्ताओं को संगठन में बड़ी जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं।
कांग्रेस नेता और धनौल्टी से जिला पंचायत सदस्य रहे अमरेंद्र बिष्ट ने भी कार्यकारिणी गठन को लेकर उम्मीद जताई है। उनका कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष लगातार ऐसी टीम बनाने का प्रयास कर रहे हैं, जो संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ जनता के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठा सके। उन्होंने कहा कि कार्यकारिणी गठन में देरी जरूर हुई है, लेकिन अब प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।
अमरेंद्र बिष्ट के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि संगठन में ऐसे लोगों को जगह मिले जो पूरी निष्ठा और ऊर्जा के साथ पार्टी के लिए काम कर सकें। उनका मानना है कि गणेश गोदियाल का दिल्ली दौरा इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। पार्टी के कई नेता यह भी मान रहे हैं कि दिल्ली से लौटने के बाद प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी की सूची जारी की जा सकती है।
उत्तराखंड कांग्रेस के लिए यह समय बेहद अहम माना जा रहा है। भाजपा जहां लगातार संगठन और सरकार दोनों स्तर पर सक्रिय है, वहीं कांग्रेस अभी भी अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने में लगी हुई है। ऐसे में यदि जल्द कार्यकारिणी का गठन होता है तो पार्टी को आगामी चुनावी रणनीति बनाने में मदद मिल सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उत्तराखंड जैसे राज्य में चुनाव जीतने के लिए केवल बड़े नेताओं के चेहरे काफी नहीं होते, बल्कि बूथ स्तर तक मजबूत संगठन की आवश्यकता होती है। कार्यकारिणी गठन के बाद कांग्रेस को गांव और शहर स्तर पर राजनीतिक गतिविधियों को तेज करने का अवसर मिलेगा। इससे कार्यकर्ताओं में भी उत्साह बढ़ेगा और पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रही असमंजस की स्थिति खत्म हो सकेगी।
अब सबकी नजरें गणेश गोदियाल के दिल्ली दौरे और कांग्रेस हाईकमान के फैसले पर टिकी हैं। यदि जल्द कार्यकारिणी की घोषणा होती है, तो इसे कांग्रेस संगठन के लिए नई शुरुआत माना जाएगा। वहीं अगर इसमें और देरी होती है, तो विपक्ष को कांग्रेस पर सवाल उठाने का एक और मौका मिल सकता है। फिलहाल कांग्रेस कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि इस बार संगठन को पूरी टीम मिलेगी और पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी पूरी मजबूती के साथ शुरू करेगी।



