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उत्तराखंडफीचर्ड

उत्तराखंड: भालुओं से फसल नुकसान पर मुआवजे की मांग को लेकर रीजनल पार्टी का वन विभाग मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन

The Hill India News
Last updated: May 15, 2026 11:37 am
The Hill India News
Published: May 15, 2026
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देहरादून में किसानों की फसलों को भालुओं द्वारा लगातार पहुंचाए जा रहे नुकसान के खिलाफ राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी (RRP) ने शुक्रवार को वन विभाग मुख्यालय, राजपुर रोड पर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने अनोखे अंदाज में प्रदर्शन करते हुए भालू की वेशभूषा पहनकर सरकार और वन विभाग के खिलाफ नाराजगी जताई। प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं ने वाइल्डलाइफ वार्डन विवेक पांडे के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन भेजा और किसानों को जल्द मुआवजा देने की मांग उठाई।

प्रदर्शन के दौरान पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि पहाड़ी क्षेत्रों में किसान लंबे समय से जंगली भालुओं के आतंक से परेशान हैं। रातोंरात खेतों में घुसकर भालू फसलों को बर्बाद कर देते हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके बावजूद सरकार और वन विभाग की ओर से अब तक फसल नुकसान का कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया है।

पार्टी नेताओं ने कहा कि सबसे चिंताजनक बात यह है कि शासन स्तर पर भालुओं द्वारा फसलों को पहुंचाए गए नुकसान के बदले किसानों को मुआवजा देने का कोई स्पष्ट प्रावधान ही नहीं है। उन्होंने बताया कि अन्य वन्यजीवों जैसे बंदर, सियार या अन्य जानवरों से होने वाले नुकसान पर मुआवजे की व्यवस्था है, लेकिन भालू द्वारा फसल बर्बादी के मामलों में किसानों को कोई राहत नहीं मिलती। इसे किसानों के साथ सीधा अन्याय बताया गया।

राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवप्रसाद सेमवाल ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि पहाड़ का किसान पहले ही कठिन परिस्थितियों में खेती कर रहा है। खेती में लागत बढ़ रही है और उत्पादन घट रहा है, ऐसे में जंगली जानवरों के कारण फसलें बर्बाद होना किसानों की कमर तोड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जब सरकार मानव और पशु क्षति पर मुआवजा दे सकती है, तो किसानों की फसलों के नुकसान पर क्यों नहीं। उन्होंने सरकार से तुरंत नीति बनाकर किसानों को राहत देने की मांग की।

प्रदेश अध्यक्ष सुलोचना ईष्टवाल ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यह बेहद शर्मनाक स्थिति है कि शासन स्तर पर आज तक कोई आदेश तक जारी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि किसान दिन-रात मेहनत करके फसल तैयार करते हैं, लेकिन एक ही रात में भालू पूरी मेहनत बर्बाद कर देते हैं। इसके बावजूद सरकार चुप बैठी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो पार्टी पूरे उत्तराखंड में बड़ा आंदोलन शुरू करेगी।

जिला अध्यक्ष नवीन पंत ने कहा कि वन विभाग खुद स्वीकार कर चुका है कि चार महीने पहले प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि राज्य के सैकड़ों किसान परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं और सरकार की देरी उनकी परेशानियों को और बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी किसानों के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करती रहेगी।

धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसान और पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सर्वे कराया जाए और जिन किसानों की फसलें भालुओं द्वारा नष्ट की गई हैं, उन्हें शीघ्र मुआवजा दिया जाए। साथ ही जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक योजना तैयार करने की भी मांग की गई।

पार्टी नेताओं ने सुझाव दिया कि सरकार संवेदनशील क्षेत्रों में सोलर फेंसिंग, सुरक्षा दीवारें और वन्यजीव नियंत्रण के प्रभावी उपाय लागू करे ताकि किसानों को भविष्य में नुकसान न उठाना पड़े। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो पहाड़ी क्षेत्रों में खेती करना और कठिन हो जाएगा, जिससे पलायन की समस्या और गंभीर हो सकती है।

इस प्रदर्शन में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी मौजूद रहे। इनमें वन एवं पर्यावरण प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष योगेश ईष्टवाल, सैनिक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष भगवती प्रसाद नौटियाल, जिला अध्यक्ष सैनिक प्रकोष्ठ भगवती प्रसाद गोस्वामी, प्रचार सचिव विनोद कोठियाल, महिला प्रकोष्ठ महानगर अध्यक्ष शशि रावत, जिला संगठन मंत्री बसंती गोस्वामी, आंदोलनकारी प्रकोष्ठ की जिला अध्यक्ष सुशील पटवाल, मंडल अध्यक्ष रजनी कुकरेती, रायपुर विधानसभा प्रभारी मीना थपलियाल समेत कई कार्यकर्ता शामिल रहे।

प्रदर्शन के अंत में रीजनल पार्टी ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि किसानों की समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को राज्यव्यापी रूप दिया जाएगा। पार्टी ने साफ कहा कि किसानों के हितों की अनदेखी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जब तक उचित मुआवजा व्यवस्था लागू नहीं होती, उनका संघर्ष जारी रहेगा।

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