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सुशासन का ‘चम्पावत मॉडल’: 20 सूत्रीय कार्यक्रम में लगातार छठी बार प्रदेश में अव्वल, विकास की दौड़ में बागेश्वर और ऊधमसिंह नगर को पछाड़ा

The Hill India News
Last updated: January 29, 2026 3:16 am
The Hill India News
Published: January 29, 2026
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चंपावत। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विधानसभा क्षेत्र चम्पावत ने विकास और सुशासन के मोर्चे पर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। भारत सरकार के महत्वाकांक्षी ’20 सूत्रीय कार्यक्रम’ (TTP) के क्रियान्वयन में चम्पावत जनपद ने दिसंबर माह की रैंकिंग में एक बार फिर पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। यह जनपद की प्रशासनिक दक्षता का ही परिणाम है कि जिलाधिकारी मनीष कुमार के नेतृत्व में चम्पावत ने लगातार छठी बार प्रदेश की रैंकिंग में शीर्ष पायदान पर कब्जा जमाया है।

Contents
विकास के 40 मानकों पर खरा उतरा चम्पावतरैंकिंग में कौन कहां?जुलाई से दिसंबर तक ‘अजेय’ रहा चम्पावतजिलाधिकारी मनीष कुमार का विजन: ‘अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे लाभ’क्या है 20 सूत्रीय कार्यक्रम?प्रशासनिक सतर्कता और परिणाम-आधारित कार्य संस्कृतिभविष्य की चुनौतियां और लक्ष्य

विकास के 40 मानकों पर खरा उतरा चम्पावत

अर्थ एवं संख्या निदेशालय, नियोजन विभाग (उत्तराखंड शासन) द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार, चम्पावत ने विकास के लगभग सभी पैमानों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी दीप्तकीर्ति तिवारी ने बताया कि रैंकिंग का निर्धारण कुल 40 मदों (Parameters) के आधार पर किया गया था।

इन 40 मदों में से चम्पावत ने 37 मदों में ‘A’ श्रेणी (सबसे उत्कृष्ट) प्राप्त की है, जबकि 3 मदों में ‘B’ श्रेणी हासिल हुई है। गौर करने वाली बात यह है कि जनपद का कोई भी विभाग ‘C’ या ‘D’ श्रेणी में नहीं रहा, जो प्रशासन की सक्रियता और योजनाओं की जमीनी पहुंच को दर्शाता है। कुल 123 अंकों में से चम्पावत को 119 अंक प्राप्त हुए, जो 96.75 प्रतिशत की शानदार उपलब्धि है।

रैंकिंग में कौन कहां?

दिसंबर माह की इस विकास सूचकांक रैंकिंग में उत्तराखंड के अन्य जिलों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली:

  1. चम्पावत: 96.75% अंकों के साथ प्रथम स्थान।

  2. बागेश्वर: 95.73% अंकों के साथ द्वितीय स्थान।

  3. ऊधमसिंह नगर: 91.87% अंकों के साथ तृतीय स्थान।

जुलाई से दिसंबर तक ‘अजेय’ रहा चम्पावत

चम्पावत की यह जीत कोई इत्तेफाक नहीं है, बल्कि निरंतरता का परिणाम है। जनपद ने जुलाई 2025 से लेकर दिसंबर 2025 तक लगातार हर महीने नंबर-1 की कुर्सी बरकरार रखी है। राजनीतिक गलियारों में इसे ‘चम्पावत मॉडल’ के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि यह मुख्यमंत्री का अपना क्षेत्र भी है, जहां विकास कार्यों की सीधी मॉनिटरिंग शासन स्तर से होती है।

जिलाधिकारी मनीष कुमार का विजन: ‘अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे लाभ’

इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर जिलाधिकारी मनीष कुमार ने जनपद के सभी विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन का लक्ष्य केवल कागजी रैंकिंग में सुधार करना नहीं है।

डीएम मनीष कुमार ने कहा, “हमारा उद्देश्य केवल रैंकिंग में शीर्ष स्थान प्राप्त करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि शासन की प्रत्येक जनहितैषी योजना का लाभ पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध रूप से समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।” उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस कार्य संस्कृति को आगे भी जारी रखा जाए और जो 3 मद ‘B’ श्रेणी में रह गए हैं, उन्हें भी ‘A’ श्रेणी में लाने के लिए ठोस प्रयास किए जाएं।

क्या है 20 सूत्रीय कार्यक्रम?

20 सूत्रीय कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गरीबी उन्मूलन, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, आवास और पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सुधार लाना है। इसमें मुख्य रूप से ग्रामीण आवास (प्रधानमंत्री आवास योजना), पेयजल, वृक्षारोपण, स्वयं सहायता समूहों का गठन, अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण और सड़क निर्माण जैसे कार्य शामिल होते हैं। राज्य स्तर पर हर महीने इन योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की जाती है और जिलों को उनके प्रदर्शन के आधार पर अंक दिए जाते हैं।

प्रशासनिक सतर्कता और परिणाम-आधारित कार्य संस्कृति

चम्पावत की सफलता के पीछे ‘परिणाम-आधारित कार्य संस्कृति’ (Result-Oriented Work Culture) का बड़ा हाथ है। जिलाधिकारी मनीष कुमार ने पदभार संभालने के बाद से ही विकास कार्यों की साप्ताहिक समीक्षा और फील्ड विजिट पर जोर दिया है। इससे विभागों के बीच समन्वय बेहतर हुआ और फाइलों के निस्तारण में तेजी आई।

विशेषज्ञों का मानना है कि चम्पावत ने जिस तरह से 37 मदों में ‘A’ ग्रेड हासिल किया है, वह अन्य पहाड़ी जनपदों के लिए एक नजीर है। भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद योजनाओं का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन यह साबित करता है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो विकास की राह में पहाड़ जैसी बाधाएं भी छोटी पड़ जाती हैं।

भविष्य की चुनौतियां और लक्ष्य

लगातार छह बार प्रथम रहने के बाद अब प्रशासन के सामने इस मानक को बनाए रखने की चुनौती है। नियोजन विभाग के अनुसार, आगामी महीनों में रैंकिंग के मानक और कड़े किए जा सकते हैं। जिलाधिकारी ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे आगामी महीनों में भी इसी उत्कृष्टता को बनाए रखें और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में और अधिक गति लाएं।

चम्पावत की इस उपलब्धि से न केवल जिले की जनता में खुशी की लहर है, बल्कि प्रदेश स्तर पर भी जिले की प्रशासनिक टीम की सराहना हो रही है। अब देखना यह होगा कि क्या चम्पावत अपनी इस ‘जीत की हैट्रिक से आगे की लय’ को नए साल के आगामी महीनों में भी बरकरार रख पाता है या नहीं।

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