
न्यूयॉर्क/कराकस। दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने एक कदम से पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म TRUTH Social पर एक विस्फोटक पोस्ट करते हुए ट्रंप ने खुद को ‘Acting President of Venezuela’ (वेनेजुएला का कार्यकारी राष्ट्रपति) घोषित कर दिया है।
इस पोस्ट के साथ उन्होंने विकिपीडिया का एक एडिटेड पेज भी साझा किया, जिसमें जनवरी 2026 से डोनाल्ड ट्रंप को वेनेजुएला के वर्तमान राष्ट्रपति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। ट्रंप का यह दावा महज सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे अमेरिका की हालिया सैन्य कार्रवाई और वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर नियंत्रण की एक बड़ी रणनीति छिपी है।
सैन्य तख्तापलट और निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी
जनवरी की शुरुआत में, अमेरिकी सेना ने दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में एक बड़े पैमाने पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ और सैन्य ऑपरेशन को अंजाम दिया था। इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य निकोलस मादुरो की सत्ता को उखाड़ फेंकना था। अमेरिकी बलों ने न केवल राजधानी कराकस में प्रवेश किया, बल्कि राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और देश की ‘फर्स्ट लेडी’ सिलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार कर लिया।
डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका तब तक वेनेजुएला की बागडोर अपने हाथों में रखेगा, जब तक वहां एक “सुरक्षित और उचित सत्ता हस्तांतरण” की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती। हालांकि, इस कार्रवाई को वेनेजुएला के भीतर कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। वहां के सुप्रीम कोर्ट ने मादुरो की गिरफ्तारी के बाद उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को अंतरिम राष्ट्रपति नियुक्त कर दिया है, जिसे अमेरिका मान्यता देने को तैयार नहीं है।

तेल का खेल: 50 मिलियन बैरल क्रूड ऑयल पर नजर
डोनाल्ड ट्रंप की इस आक्रामक नीति के केंद्र में वेनेजुएला का क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) है। वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडार वाले देशों में से एक है। ट्रंप ने अपनी पोस्ट में साफ चेतावनी दी है कि यदि मादुरो के वफादार अमेरिकी शर्तों को नहीं मानते, तो सैन्य कार्रवाई का दायरा और बढ़ाया जाएगा।
ट्रंप का आर्थिक मास्टरप्लान:
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तेल की बिक्री: ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका वेनेजुएला के 50 मिलियन बैरल क्रूड ऑयल को रिफाइन करने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने की योजना बना रहा है।
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टैंकरों की जब्ती: बुधवार को अमेरिकी नौसेना और विशेष बलों ने वेनेजुएला के तट के पास कई ऑयल टैंकरों को अपने कब्जे में ले लिया। अमेरिका का तर्क है कि यह संपत्ति अब उसके ‘प्रशासन’ के अधीन है।
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अमेरिकी ऊर्जा सुरक्षा: विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप वेनेजुएला के तेल का उपयोग अमेरिकी गैस की कीमतों को कम करने और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए करना चाहते हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और कानूनी उलझनें
ट्रंप के इस कदम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई बहस छेड़ दी है। क्या एक देश का राष्ट्रपति दूसरे संप्रभु राष्ट्र का ‘कार्यकारी राष्ट्रपति’ बन सकता है? संयुक्त राष्ट्र (UN) और यूरोपीय संघ की ओर से फिलहाल सतर्क प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। रूस और चीन ने अमेरिका की इस कार्रवाई को “खुली डकैती” और संप्रभुता का उल्लंघन करार दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप की यह नीति उनकी ‘America First’ विचारधारा का विस्तार है। वेनेजुएला को अपने नियंत्रण में लेकर ट्रंप न केवल दक्षिण अमेरिका में वामपंथी प्रभाव को खत्म करना चाहते हैं, बल्कि अमेरिका को ऊर्जा के क्षेत्र में ‘सुपरपावर’ के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।
वेनेजुएला में क्या हैं जमीनी हालात?
कराकस की सड़कों पर तनाव व्याप्त है। जहाँ एक ओर मादुरो के विरोधी अमेरिकी हस्तक्षेप का स्वागत कर रहे हैं, वहीं मादुरो के समर्थक इसे विदेशी आक्रमण बता रहे हैं। डेल्सी रोड्रिगेज के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील की है।
इधर, पेंटागन और व्हाइट हाउस ने संकेत दिए हैं कि वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति लंबी हो सकती है। ट्रंप ने दो-टूक शब्दों में कहा है, “हम वेनेजुएला को फिर से महान बनाएंगे और वहां के संसाधनों का उपयोग दुनिया की भलाई के लिए करेंगे।” उनके इस बयान का अर्थ स्पष्ट रूप से अमेरिकी हितों की रक्षा से जुड़ा है।
विशेषज्ञों की राय: वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
यदि अमेरिका वेनेजुएला के तेल बाजार को पूरी तरह नियंत्रित कर लेता है, तो वैश्विक क्रूड ऑयल की कीमतों में भारी गिरावट आ सकती है। इससे ओपेक (OPEC) देशों की शक्ति कम होगी और अमेरिका तेल निर्यात में शीर्ष पर पहुंच सकता है। हालांकि, लंबे समय तक चलने वाला सैन्य संघर्ष क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा पैदा कर सकता है।
निष्कर्ष: डोनाल्ड ट्रंप की ‘Acting President’ वाली पोस्ट ने कूटनीति के पुराने नियमों को धता बता दिया है। वेनेजुएला अब एक ऐसा युद्धक्षेत्र बन चुका है जहाँ दांव पर केवल सत्ता नहीं, बल्कि अरबों डॉलर का तेल भंडार है। दुनिया अब यह देख रही है कि क्या ट्रंप वास्तव में वेनेजुएला की सरकार चलाएंगे या यह महज एक अल्टीमेटम है।



