
तिरुवनंतपुरम। दक्षिण भारत की राजनीति में अपनी जड़ें जमाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अब तक का सबसे बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने केरल के तिरुवनंतपुरम पहुँचकर भाजपा के ‘मिशन 2026’ का औपचारिक शंखनाद किया। इस अभियान को “हम विकसित केरल चाहते हैं” (We Want a Developed Kerala) नाम दिया गया है। शाह का यह दौरा न केवल संगठनात्मक मजबूती के लिए है, बल्कि केरल की पारंपरिक द्वि-ध्रुवीय राजनीति (LDF बनाम UDF) को उखाड़ फेंकने का एक सीधा संदेश भी है।
तिरुवनंतपुरम के चुनावी रण में अमित शाह ने वह नारा बुलंद किया जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है— “जो कभी नहीं बदला, वह अब बदलेगा।”
भाजपा का संकल्प: “केवल वोट शेयर नहीं, अब मुख्यमंत्री हमारा होगा”
केरल के स्थानीय निकायों के 2,000 से अधिक निर्वाचित प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए अमित शाह ने पार्टी के दीर्घकालिक लक्ष्यों को स्पष्ट किया। शाह ने दो टूक शब्दों में कहा कि भाजपा अब केवल केरल में अपना उपस्थिति दर्ज कराने या वोट शेयर बढ़ाने के लिए चुनाव नहीं लड़ रही है। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक ऐसे केरल का निर्माण करना है, जहाँ भाजपा का मुख्यमंत्री हो और राज्य विकास की नई ऊंचाइयों को छुए।”
शाह का यह बयान उन आलोचकों के लिए कड़ा जवाब माना जा रहा है जो केरल को भाजपा के लिए ‘अभेद्य दुर्ग’ मानते रहे हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा कि केरल की जनता अब विकल्प की तलाश में है और भाजपा वह सशक्त तीसरा विकल्प देने के लिए तैयार है।
LDF और UDF पर ‘मैच फिक्सिंग’ का आरोप
केरल की राजनीति दशकों से वामपंथी लोकतांत्रिक मोर्चे (LDF) और संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (UDF) के इर्द-गिर्द घूमती रही है। अमित शाह ने इस परिपाटी पर तीखा हमला बोलते हुए इसे “राजनीतिक मैच फिक्सिंग” करार दिया।
शाह ने आरोप लगाया कि सत्ता का हस्तांतरण इन दोनों गुटों के बीच एक समझौते की तरह होता है, जहाँ चेहरा बदलता है लेकिन नीतियां और भ्रष्टाचार की कार्यशैली वही रहती है। उन्होंने तर्क दिया कि इसी ‘फिक्सिंग’ के कारण केरल के बुनियादी ढांचागत प्रोजेक्ट्स (Infrastructure Projects) सालों से लटके हुए हैं और नीतिगत निष्क्रियता के चलते युवाओं को आर्थिक अवसरों से वंचित होना पड़ रहा है।
आंकड़ों की जुबानी: क्यों बढ़ा भाजपा का आत्मविश्वास?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केरल भाजपा मिशन 2026 की नींव हालिया चुनावी आंकड़ों पर टिकी है। अमित शाह ने इन आंकड़ों का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे भाजपा धीरे-धीरे केरल के मतदाताओं के दिल में जगह बना रही है:
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वोट शेयर में उछाल: साल 2001 में केरल में भाजपा का वोट शेयर महज 3% था, जो 2016 और 2021 के चुनावों के बीच बढ़कर 12% से 15% के बीच पहुँच गया है।
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नगर निगम में ऐतिहासिक जीत: तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भाजपा प्रमुख विपक्षी दल के रूप में उभरी है। सबसे बड़ी उपलब्धि हाल ही में मिली, जहाँ 101 वार्डों में से 50 वार्ड जीतकर भाजपा ने पहली बार केरल में अपना मेयर बनाया।
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शहरी और ग्रामीण पैठ: सभी छह नगर निगमों में एनडीए (NDA) गठबंधन ने 23% से अधिक वोट शेयर हासिल किया है। शाह ने इस बात पर जोर दिया कि 79 ग्राम पंचायतों में भाजपा दूसरे स्थान पर रही, जो यह साबित करता है कि पार्टी अब केवल शहरों तक सीमित नहीं है।
सामाजिक समीकरणों को साधने की रणनीति
अमित शाह के इस दौरे का एक बड़ा केंद्र बिंदु केरल के सामाजिक समीकरणों (Social Engineering) को साधने पर था।
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सबरीमाला मुद्दा: भाजपा सबरीमाला को एक स्थायी राजनीतिक कारक मानती है। शाह का मानना है कि इस मुद्दे ने दक्षिणी केरल के हिंदू मतदाताओं के साथ पार्टी का भावनात्मक और वैचारिक संबंध मजबूत किया है।
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OBC समुदायों का साथ: केरल में एझवा (Ezhava) जैसे ओबीसी समुदाय पारंपरिक रूप से वामपंथ के समर्थक रहे हैं। लेकिन स्थानीय निकाय चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि अब इन समुदायों का झुकाव भाजपा की ओर बढ़ रहा है।
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मजबूत नेतृत्व: भाजपा ने केरल में के. सुरेंद्रन, वी. मुरलीधरन और शोभा सुरेंद्रन जैसे नेताओं को आगे बढ़ाया है जो स्वयं ओबीसी समुदाय से आते हैं। यह पार्टी की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह पिछड़े वर्गों को सत्ता में भागीदारी का अहसास कराना चाहती है।
क्या ‘विकसित केरल’ का नारा बदलेगा भविष्य?
अमित शाह ने स्पष्ट किया कि केरल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए भाजपा का मुख्य मुद्दा ‘विकास’ होगा। केंद्र सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं को घर-घर तक पहुँचाकर पार्टी यह साबित करना चाहती है कि जो काम LDF और UDF ने दशकों में नहीं किया, वह मोदी सरकार के विजन से संभव है।
अमित शाह का तिरुवनंतपुरम दौरा महज एक औपचारिक दौरा नहीं था, बल्कि यह केरल की राजनीति के ‘स्टैटस को’ (यथास्थिति) को चुनौती देने वाला कदम था। भाजपा की नजर अब उन युवा मतदाताओं पर है जो विचारधारा की लड़ाई से ऊपर उठकर विकास और रोजगार चाहते हैं।
केरल में ‘तीसरी शक्ति’ का उदय
अमित शाह के इस मिशन ने यह साफ कर दिया है कि भाजपा केरल को लेकर बहुत गंभीर है। केरल भाजपा मिशन 2026 की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पार्टी अपने बढ़ते वोट शेयर को सीटों में कैसे तब्दील करती है। लेकिन एक बात तय है—केरल की सियासत अब केवल ‘लाल’ और ‘नीली’ (LDF-UDF) नहीं रह गई है, ‘भगवा’ लहर ने यहाँ अपनी दस्तक मजबूती से दे दी है।



