अहमदनगर (महाराष्ट्र) | ग्रामीण भारत की आर्थिक तकदीर बदलने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने ‘मनरेगा’ (MGNREGA) के स्थान पर अब ‘विकसित भारत – जी राम जी’ (V-B G RAM G) एक्ट, 2025 को धरातल पर उतार दिया है। महाराष्ट्र के अहमदनगर पहुंचे केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस नई योजना को ग्रामीण विकास की ‘आत्मा’ करार देते हुए कई ऐतिहासिक बदलावों की घोषणा की है।
इस नए कानून के तहत अब न केवल काम के दिन बढ़ाए गए हैं, बल्कि मजदूरी भुगतान में देरी होने पर सरकार को अब अपनी जेब से ब्याज भी भरना होगा। यह कदम ग्रामीण मजदूरों को वित्तीय सुरक्षा और सशक्तिकरण देने की दिशा में क्रांतिकारी माना जा रहा है।
G-RAM-G कानून: अब 100 नहीं, 125 दिन के काम की कानूनी गारंटी
अहमदनगर के लोनी बुद्रुक में आयोजित एक विशेष ग्राम सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पुराने मनरेगा कानून की सीमाओं को तोड़ते हुए ‘जी राम जी’ एक्ट को लागू किया गया है।
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कार्य दिवसों में वृद्धि: अब ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 100 के बजाय 125 दिनों के सुनिश्चित रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी।
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बेरोजगारी भत्ता: यदि आवेदन करने के 15 दिनों के भीतर काम नहीं दिया जाता है, तो बेरोजगारी भत्ते के प्रावधान को पहले से कहीं अधिक सख्त और पारदर्शी बनाया गया है।
भुगतान में देरी की तो लगेगा जुर्माना: मजदूरों को मिलेगा 0.05% ब्याज
इस नई योजना का सबसे सशक्त पहलू ‘पेमेंट गारंटी’ है। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि अब मजदूरों के पसीने की कमाई को सरकारी फाइलों में नहीं दबाया जा सकेगा।
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एक हफ्ते में मजदूरी: नए कानून के तहत काम पूरा होने के एक सप्ताह (7 दिन) के भीतर मजदूरी का भुगतान करना अनिवार्य होगा।
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विलंब शुल्क (Penalty): यदि भुगतान में 15 दिन से अधिक की देरी होती है, तो मजदूर को 0.05% प्रतिदिन की दर से ब्याज के रूप में अतिरिक्त मजदूरी दी जाएगी।
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जवाबदेही तय: शिवराज सिंह चौहान ने कड़े शब्दों में कहा, “देरी करने वालों को अब इसकी कीमत चुकानी होगी। यह मजदूरों का अधिकार है और उनके हक में देरी अब अपराध मानी जाएगी।”
ग्राम सभा को मिला ‘सुपर पावर’: गांव तय करेगा अपना विकास
‘जी राम जी’ कानून का मुख्य उद्देश्य विकेंद्रीकरण है। अब दिल्ली या राज्य की राजधानियों से यह तय नहीं होगा कि गांव में क्या काम होना चाहिए।
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ग्राम सभा का फैसला: गांव की जरूरतों के अनुसार कौन सा काम कराया जाना है, इसका पूरा अधिकार ग्राम सभा के पास होगा।
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प्राथमिकता वाले कार्य: जल संरक्षण, ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर, आजीविका मूलक गतिविधियां और प्राकृतिक आपदाओं से बचाव जैसे कार्यों को ग्राम सभा अपनी प्राथमिकता के आधार पर चुन सकेगी।
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योजना की आत्मा: केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि स्थानीय जरूरतों के अनुसार काम होना ही इस योजना की मूल भावना है।
महिला सशक्तिकरण: 33% भागीदारी अनिवार्य
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए, V-B G RAM G Act में महिलाओं के लिए विशेष आरक्षण और सुविधाओं का प्रावधान किया गया है।
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योजना के तहत कुल कार्यबल में एक-तिहाई (33%) महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य की गई है।
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महिलाओं को न केवल मजदूरी, बल्कि प्रबंधन और सुपरविजन जैसे कार्यों में भी अवसर प्रदान किए जाएंगे।
देशव्यापी वेबकास्ट: 60 लाख से अधिक लोग बने गवाह
शिवराज सिंह चौहान का यह संवाद केवल अहमदनगर तक सीमित नहीं रहा। सूचना और प्रौद्योगिकी के माध्यम से इस कार्यक्रम को 1,00,000 से अधिक स्थानों पर वेबकास्ट किया गया। ग्रामीण विकास मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, स्वयं सहायता समूहों (SHG), किसानों और आम जनता सहित लगभग 60 लाख लोगों ने इस संवाद को लाइव देखा। यह सरकार की ओर से ग्रामीण भारत तक अपनी नई नीतियों को पहुंचाने का अब तक का सबसे बड़ा डिजिटल संपर्क अभियान है।
जी राम जी योजना बनाम मनरेगा: क्या बदला?
| विशेषता | पुराना (MGNREGA) | नया (G-RAM-G Act, 2025) |
| रोजगार की गारंटी | 100 दिन | 125 दिन |
| भुगतान की समय सीमा | निश्चित नहीं / अक्सर देरी | 7 दिन के भीतर अनिवार्य |
| देरी पर मुआवजा | जटिल प्रक्रिया | 0.05% दैनिक ब्याज (स्वचालित) |
| निर्णय प्रक्रिया | टॉप-डाउन मॉडल | ग्राम सभा संचालित (बॉटम-अप) |
| महिला आरक्षण | 33% (दस्तावेजों में) | 33% (सख्त कानूनी अनिवार्य) |
विकसित भारत की ओर एक मजबूत कदम
‘विकसित भारत: जी राम जी एक्ट, 2025’ के माध्यम से केंद्र सरकार ने ग्रामीण भारत में स्वरोजगार और बुनियादी ढांचे के विकास का एक नया ब्लूप्रिंट पेश किया है। मजदूरी भुगतान में ब्याज का प्रावधान और काम के दिनों में बढ़ोतरी न केवल पलायन को रोकेगी, बल्कि ग्रामीण मजदूरों के आत्मसम्मान को भी बढ़ाएगी।
जैसा कि शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “यह सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि गांव के गरीब के सशक्तीकरण का एक कानूनी हथियार है।” अब देखना यह होगा कि राज्य सरकारें इस नए कानून को धरातल पर कितनी पारदर्शिता के साथ लागू करती हैं।



