
पुंछ (जम्मू-कश्मीर) | न्यूज़ डेस्क सीमा पार से संचालित आतंकी नेटवर्क की कमर तोड़ने के लिए जम्मू-कश्मीर प्रशासन और सुरक्षा बलों ने अपना अभियान तेज कर दिया है। इसी कड़ी में, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान में छिपे बैठे प्रतिबंधित आतंकी संगठन के हैंडलर और लॉन्च कमांडर रफीक नाई उर्फ सुल्तान की अचल संपत्ति को कुर्क (Attach) कर लिया है। यह कार्रवाई केंद्र शासित प्रदेश में सक्रिय आतंकियों के वित्तीय और लॉजिस्टिक इकोसिस्टम को पूरी तरह ध्वस्त करने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।
UAPA के तहत ‘पुलवामा मॉडल’ जैसी सख्ती
पुंछ जिला पुलिस द्वारा की गई यह कुर्की गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत अंजाम दी गई है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई थाना गुरसाई (पुंछ) में दर्ज एफआईआर नंबर 194/2024 के सिलसिले में की गई है। पुलिस ने आरोपी की 4 मरला और 2 सरसाई कृषि भूमि को कानूनी रूप से सील कर दिया है। यह भूमि पुंछ जिले की मेंढर तहसील के अंतर्गत आने वाले गांव ‘नर, नक्का मझारी’ में स्थित है।
विशेषज्ञों का मानना है कि संपत्तियों की कुर्की न केवल आतंकियों के मनोबल को तोड़ती है, बल्कि उन स्थानीय तत्वों के लिए भी एक कड़ा संदेश है जो किसी भी तरह से आतंकी नेटवर्क का हिस्सा बनने की सोच रहे हैं।
कौन है रफीक नाई उर्फ सुल्तान?
रफीक नाई, पुत्र मोहम्मद अफसर, मूल रूप से पुंछ का रहने वाला है लेकिन वर्तमान में वह सीमा पार पाकिस्तान में शरण लिए हुए है। वह वहां से प्रतिबंधित आतंकी संगठन तहरीक-उल-मुजाहिदीन (TuM) और जम्मू कश्मीर गजनवी फोर्स (JKGF) के लिए एक प्रमुख हैंडलर और लॉन्च कमांडर के रूप में कार्य कर रहा है।
रफीक नाई पर दर्ज गंभीर आरोप:
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हथियारों और नशे की तस्करी: वह पाकिस्तान से ड्रोन और अन्य माध्यमों के जरिए भारत में नशीले पदार्थों और हथियारों की खेप भेजने का मुख्य सूत्रधार है।
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आतंकियों की घुसपैठ: एलओसी (LoC) के पार से प्रशिक्षित आतंकवादियों को भारतीय सीमा में दाखिल कराने के लिए वह ‘लॉन्च कमांडर’ की भूमिका निभाता है।
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आतंकवाद का पुनरुद्धार: वह पीर पंजाल क्षेत्र (विशेषकर पुंछ-राजौरी) में सोए हुए आतंकी मॉड्यूल को फिर से सक्रिय करने की साजिशों में लिप्त रहा है।
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घोषित आतंकी: उसकी देश विरोधी गतिविधियों के कारण उसे पहले ही अदालत द्वारा ‘घोषित अपराधी’ (Proclaimed Offender) करार दिया जा चुका है।
राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त स्ट्राइक
कुर्की की यह जटिल प्रक्रिया मेंढर पुलिस और राजस्व विभाग की एक संयुक्त टीम द्वारा संपन्न की गई। इस ऑपरेशन को अंजाम देने से पहले सभी कानूनी औपचारिकताओं, गहन जांच और दस्तावेजीकरण को पूरा किया गया था। सक्षम प्राधिकारी से अंतिम अनुमति मिलने के बाद, गांव नर में पुलिस ने ढोल बजाकर और कानूनी नोटिस चस्पा कर संपत्ति की जब्ती की घोषणा की।
कुर्क की गई इस कृषि भूमि की अनुमानित बाजार कीमत लगभग 10 लाख रुपये आंकी गई है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई आर्थिक मूल्य से ज्यादा ‘रणनीतिक संदेश’ देने के लिए है।
आतंक के वित्तीय तंत्र (Terror Funding) पर प्रहार
जम्मू-कश्मीर पुलिस की यह रणनीति केंद्र सरकार की उस व्यापक योजना का हिस्सा है जिसके तहत आतंकियों के वित्तीय, लॉजिस्टिक और सहयोगी बुनियादी ढांचे को जड़ से उखाड़ना है।
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संसाधनों से वंचित करना: संपत्ति कुर्की का मुख्य उद्देश्य आतंकियों को उनके स्थानीय संसाधनों से पूरी तरह काट देना है।
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हैंडलर्स पर दबाव: पाकिस्तान में बैठकर भारत के खिलाफ साजिश रचने वाले हैंडलर्स को अब यह समझ आ रहा है कि उनकी भारत स्थित संपत्तियां अब सुरक्षित नहीं हैं।
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स्थानीय सहयोग खत्म करना: इस तरह की कार्रवाई से उन लोगों में डर पैदा होता है जो जाने-अनजाने में आतंकियों को जमीन या शरण मुहैया कराते हैं।
पुंछ-राजौरी क्षेत्र में सुरक्षा के नए आयाम
पिछले कुछ समय में पुंछ और राजौरी जिलों में आतंकी गतिविधियों में मामूली हलचल देखी गई थी, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने अपनी ‘सर्च और स्ट्राइक’ नीति को बदल दिया है। अब केवल मुठभेड़ में आतंकियों को मार गिराना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि उनके नेटवर्क के हर उस ‘पुर्जे’ को खत्म करना है जो उन्हें ताकत देता है।
पुंछ पुलिस ने एक आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया, “हम आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेंगे। यह कार्रवाई केवल एक शुरुआत है। आने वाले समय में उन सभी तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी जो देश की शांति और सुरक्षा में खलल डालने का प्रयास करेंगे।”
आम जनता के लिए संदेश
पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत अधिकारियों को दें। सुरक्षा बलों ने विश्वास दिलाया है कि आम नागरिकों की सुरक्षा और शांति सुनिश्चित करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। रफीक नाई जैसे तत्वों पर कानून का यह शिकंजा आने वाले समय में और भी कसता जाएगा।
‘नया जम्मू-कश्मीर’ और कड़े कानून
अनुच्छेद 370 के हटने के बाद से जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का स्वरूप बदल गया है। अब पुलिस और एनआईए (NIA) जैसी एजेंसियां आतंकवादियों के मददगारों (OGWs) और सीमा पार बैठे हैंडलर्स की संपत्तियों पर सीधे चोट कर रही हैं। रफीक नाई की संपत्ति की कुर्की यह साबित करती है कि भारत सरकार अब केवल सीमा पर ही नहीं, बल्कि आतंकियों के ‘बैंक खातों और जमीनों’ पर भी सर्जिकल स्ट्राइक करने में सक्षम है।



