By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद सशस्त्र बलों ने सीखे कई रणनीतिक सबक: सीडीएस जनरल अनिल चौहान
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > देश > ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद सशस्त्र बलों ने सीखे कई रणनीतिक सबक: सीडीएस जनरल अनिल चौहान
देश

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद सशस्त्र बलों ने सीखे कई रणनीतिक सबक: सीडीएस जनरल अनिल चौहान

The Hill India News
Last updated: November 5, 2025 1:44 am
The Hill India News
Published: November 5, 2025
Share
SHARE

नई दिल्ली, 5 नवंबर। प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (CDS) जनरल अनिल चौहान ने मंगलवार को कहा कि भारत के सशस्त्र बलों ने हालिया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से कई अहम सैन्य और रणनीतिक सबक सीखे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन अनुभवों को अब आगामी थिएटराइजेशन (Theaterisation) मॉडल में शामिल किया जाएगा, ताकि भारतीय सशस्त्र बल भविष्य की किसी भी चुनौती का और अधिक प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।

Contents
“ऑपरेशन सिंदूर ने हमें नई सैन्य वास्तविकताओं से रूबरू कराया”थिएटराइजेशन: समन्वित युद्ध क्षमता की दिशा में बड़ा कदम‘ऑपरेशन सिंदूर’: सामरिक प्रतिबद्धता का उदाहरणस्वदेशी तकनीक और आत्मनिर्भरता पर फोकसनयी सैन्य सोच: सीमा पार स्थिरता और त्वरित प्रतिक्रियारक्षा सहयोग और नीति-निर्माण में नए आयामआधुनिक और सजग भारत की झलक

जनरल चौहान नई दिल्ली में रक्षा क्षेत्र के प्रमुख थिंक टैंक ‘भारत शक्ति’ द्वारा आयोजित ‘इंडिया डिफेंस कॉन्क्लेव 2025’ में बोल रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने भारत की बदलती सैन्य रणनीति, थिएटर कमांड व्यवस्था, सीमा सुरक्षा और तकनीकी आधुनिकीकरण पर विस्तार से चर्चा की।


“ऑपरेशन सिंदूर ने हमें नई सैन्य वास्तविकताओं से रूबरू कराया”

सीडीएस चौहान ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर केवल एक अभियान नहीं था, बल्कि यह भारत की सामरिक तत्परता और सहयोगात्मक रक्षा सोच की परीक्षा भी थी।

“हमने इस ऑपरेशन से कई सबक सीखे हैं। यह स्पष्ट हो गया है कि भविष्य के किसी भी सैन्य अभियान में तीनों सेनाओं—थलसेना, नौसेना और वायुसेना—के बीच निर्बाध समन्वय कितना आवश्यक है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने बताया कि आधुनिक युद्ध केवल गोलाबारी का नहीं, बल्कि इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (ISR) क्षमताओं के समुचित उपयोग का भी होता है। जनरल चौहान ने कहा कि मई 2025 में हुए इस निर्णायक सैन्य अभियान के बाद भारत को अपनी खुफिया और युद्धक क्षमताओं को पाकिस्तान के हर कोने तक पहुँचाने की आवश्यकता है।

“अब यह नई सामान्य स्थिति (new normal) बननी चाहिए,” उन्होंने दृढ़ता से कहा।


थिएटराइजेशन: समन्वित युद्ध क्षमता की दिशा में बड़ा कदम

सीडीएस ने थिएटर कमांड की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि रणनीतिक दक्षता बढ़ाने की दिशा में क्रांतिकारी पहल है।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित किया है कि किसी भी ऑपरेशन में सूचना साझा करने की गति, संसाधनों की एकीकृत तैनाती और संयुक्त योजना बनाना निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

“हमारा उद्देश्य है कि थिएटर कमांड संरचना में तीनों सेनाएं एक साझा लक्ष्य के तहत, साझा संसाधनों के साथ, एकीकृत रूप से कार्य करें,” जनरल चौहान ने कहा।
उन्होंने बताया कि इस दिशा में कई पायलट प्रोजेक्ट और क्षेत्रीय अध्ययन चल रहे हैं, ताकि जमीनी हकीकत को ध्यान में रखकर कमांड की सीमाएं और जिम्मेदारियां तय की जा सकें।


‘ऑपरेशन सिंदूर’: सामरिक प्रतिबद्धता का उदाहरण

हालांकि इस ऑपरेशन के तकनीकी विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ सीमापार आतंकवादी गतिविधियों पर निर्णायक जवाबी कार्रवाई थी। इस अभियान में तीनों सेनाओं का संयुक्त संचालन हुआ, जिसमें प्रिसीजन-स्ट्राइक तकनीक, ड्रोन्स और सैटेलाइट सर्विलांस सिस्टम का उपयोग किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान भारत की नई “सर्जिकल रेस्पॉन्स” रणनीति का विस्तार था, जिसने आतंकवाद के ढांचे पर गहरा असर डाला।

रक्षा मामलों के विश्लेषक मेजर जनरल (से.नि.) एस.के. सिन्हा ने कहा —

“ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की रणनीतिक क्षमता को न केवल प्रदर्शित किया, बल्कि यह भी दिखाया कि नई तकनीक और रियल-टाइम इंटेलिजेंस से किस तरह भविष्य के युद्ध लड़े जाएंगे।”


स्वदेशी तकनीक और आत्मनिर्भरता पर फोकस

कॉन्क्लेव के दौरान जनरल चौहान ने यह भी कहा कि भारत को अपने रक्षा उपकरणों और तकनीक में पूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल करनी होगी। उन्होंने कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत सशस्त्र बलों ने कई स्वदेशी परियोजनाओं को प्राथमिकता दी है — जिनमें लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस, आकाश मिसाइल सिस्टम, ड्रोन स्वार्म प्रोजेक्ट और एडवांस्ड कम्युनिकेशन नेटवर्क शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि अब लक्ष्य यह है कि भारतीय सेनाएं न केवल विदेशी तकनीक पर निर्भरता घटाएं, बल्कि अपने स्वयं के अनुसंधान एवं विकास केंद्रों से युद्ध-तैयारी को गति दें।

“हमारी रणनीतिक सोच यह है कि भारत अपनी सीमाओं की रक्षा अपने ही संसाधनों से करने में सक्षम हो,” उन्होंने कहा।


नयी सैन्य सोच: सीमा पार स्थिरता और त्वरित प्रतिक्रिया

सीडीएस चौहान ने कहा कि वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों में ‘त्वरित प्रतिक्रिया और निरंतर निगरानी’ (Swift Response and Continuous Vigilance) सबसे महत्वपूर्ण कारक बन चुके हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की सीमाएं अब केवल भौगोलिक सुरक्षा का प्रश्न नहीं रहीं, बल्कि साइबर, स्पेस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे नए डोमेन भी आधुनिक युद्ध का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं।

“हमारे पास पाकिस्तान के हर हिस्से में आईएसआर और स्ट्राइक क्षमता होनी चाहिए। यह केवल ताकत का प्रदर्शन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की गारंटी है,” उन्होंने कहा।


रक्षा सहयोग और नीति-निर्माण में नए आयाम

कॉन्क्लेव में मौजूद कई वरिष्ठ अधिकारियों और रक्षा विशेषज्ञों ने भारत के सहयोगी देशों के साथ रक्षा साझेदारी को भी चर्चा में रखा।
रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, भारत वर्तमान में अमेरिका, फ्रांस, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ संयुक्त रक्षा अभ्यास, लॉजिस्टिक सपोर्ट और तकनीकी साझेदारी को और मजबूत कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का उद्देश्य केवल अपनी सीमाओं की रक्षा नहीं, बल्कि पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और शांति बनाए रखना है।


आधुनिक और सजग भारत की झलक

सीडीएस जनरल चौहान के वक्तव्य ने यह स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि भारतीय रक्षा तंत्र की दिशा में हो रहे व्यापक परिवर्तन का प्रतीक है।
थिएटराइजेशन मॉडल के माध्यम से भारत तीनों सेनाओं की संयुक्त शक्ति को एकीकृत रूप में विकसित करने जा रहा है, जिससे भविष्य की किसी भी चुनौती के सामने देश और अधिक सुरक्षित, तत्पर और आत्मनिर्भर बन सके।

You Might Also Like

गांधीनगर : मिथिला की नारी शक्ति का प्राचीन काल से ही देश में महत्वपूर्ण योगदान- अमित शाह
भारत-पाकिस्तान सीजफायर पर बनी सहमति, कर्नल सोफिया ने पाक के झूठे दावों की खोली पोल
आंध्र प्रदेश में मार्कापुरम के पास बस और ट्रक की भिड़ंत के बाद लगी भीषण आग, 12 यात्री जिंदा जले; 20 गंभीर रूप से घायल
कंगना को थप्पड़ मारने वाली कुलविंदर कौर का हुआ ट्रांसफर, CISF ने मामला किया क्लियर
मिसाइल टेस्ट से पहले 10 हजार लोगों को किया गया शिफ्ट, DRDO ने परीक्षण की सभी आवश्यक तैयारी की पूरी
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
उत्तराखंडफीचर्डराजनीति

उत्तराखंड में चुनावी जंग तेज! कांग्रेस की ‘न्याय यात्रा’ के जवाब में BJP निकालेगी ‘लोकतंत्र बचाओ यात्रा’, धामी ने किया बड़ा ऐलान

The Hill India News
The Hill India News
October 22, 2026
SBI में बड़ा डेटा लीक! डार्क वेब पर पहुंचे 3,897 ग्राहकों के निजी रिकॉर्ड, नाम-पता से लेकर लोन के दस्तावेज तक उजागर
देहरादून में पद्मश्री योगी ऐरन के ‘जंगल-मंगल’ पर हमला! 50 लोगों की भीड़ पर तोड़फोड़ और धमकी देने का आरोप, जमीन के दस्तावेज खंगाल रही पुलिस
उत्तराखंड को मिला नया राज्यपाल! डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने ली पद एवं गोपनीयता की शपथ, बोले—संवैधानिक मूल्यों की रक्षा और विकास योजनाओं को गति देना प्राथमिकता
टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में बड़ा खुलासा! जयपुर से दिल्ली और फिर नेपाल भागने की थी प्लानिंग, कोटा पुलिस ने 15 मिनट में ट्रेन खंगालकर 3 आरोपियों को दबोचा
गैरसैंण के विकास पर बीजेपी में घमासान! पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी बोले—‘कुंभकर्ण 6 महीने में जागता था, विधायक 5 साल से सोए हैं’; अनिल नौटियाल ने आरोपों पर दिया जवाब
जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने को लेकर देश की सियासत गरम, CJP के दो नेता तिहाड़ जेल पहुंचे; राहुल गांधी से केजरीवाल तक ने उठाए सवाल
मध्य प्रदेश के किसान से उत्तराखंड के राजभवन तक! कौन हैं डॉ. ढाल सिंह बिसेन, जानिए विधायक से सांसद और राज्यपाल बनने तक का पूरा सफर
उत्तराखंड में ई-चालान काटना आसान, वसूली बनी बड़ी चुनौती! अब बकाया जुर्माना नहीं भरने वालों की RC, फिटनेस और वाहन ट्रांसफर सेवाओं पर लग सकती है रोक
हरिद्वार में धामी कैबिनेट की ऐतिहासिक बैठक से पहले मां गंगा की शरण में पहुंचे CM धामी और मंत्री, प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए की प्रार्थना
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?