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बिहार चुनाव में एनडीए को दो-तिहाई बहुमत मिलना पंडित नेहरू को सच्ची श्रद्धांजलि होगी: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

The Hill India News
Last updated: October 29, 2025 12:40 pm
The Hill India News
Published: October 29, 2025
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पटना: बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे अपने निर्णायक दौर की ओर बढ़ रहा है, राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और जनसभाओं का दौर भी तेज़ हो गया है। इसी क्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को पटना जिले के बाढ़ में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि आगामी 14 नवंबर को जब मतगणना होगी, उसी दिन देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती भी है। उन्होंने कहा, “अगर उस दिन बिहार की जनता राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को दो-तिहाई बहुमत देती है, तो यह पंडित नेहरू की सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”

Contents
“बिहार को गुंडाराज नहीं, सुशासन चाहिए”“बांग्लादेशी घुसपैठियों” का मुद्दा भी उठा“संवैधानिक संस्थाओं पर हमला लोकतंत्र के खिलाफ”“राजद का वादा अव्यावहारिक”“नेहरू से लेकर मोदी तक, भारत की लोकतांत्रिक परंपरा मजबूत”एनडीए की अपील: ‘विकास बनाम अव्यवस्था’ का चुनाव

राजनाथ सिंह के इस बयान ने चुनावी माहौल में नया राजनीतिक संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि “नेहरू जी लोकतंत्र के प्रबल समर्थक थे और बिहार की जनता यदि विकास, सुशासन और स्थिरता के पक्ष में वोट देती है, तो यह लोकतंत्र की जीत होगी।”


“बिहार को गुंडाराज नहीं, सुशासन चाहिए”

रक्षा मंत्री ने अपने भाषण में विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बिहार को एक बार फिर “गुंडाराज” या “जंगलराज” की ज़रूरत नहीं है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने कार्यकाल में कानून व्यवस्था में सुधार लाकर राज्य को भयमुक्त बनाया है।

राजनाथ सिंह ने कहा,

“एक समय था जब लोग शाम को घरों से बाहर निकलने से डरते थे। आज बिहार में निवेश हो रहा है, सड़कों का जाल बिछा है और युवाओं के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं। यह बदलाव एनडीए की नीतियों और नीतीश कुमार की प्रशासनिक क्षमता का परिणाम है।”

उन्होंने आगे कहा कि “जंगलराज” से “जनकल्याण” की ओर बढ़ते बिहार को किसी भी कीमत पर पीछे नहीं जाने दिया जाएगा।


“बांग्लादेशी घुसपैठियों” का मुद्दा भी उठा

अपने संबोधन के दौरान रक्षा मंत्री ने विपक्ष पर “घुसपैठियों के वोट बैंक की राजनीति” करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कुछ दल केवल “बांग्लादेशी घुसपैठियों” के वोट सुरक्षित करने के लिए सीमाओं की सुरक्षा पर सवाल उठा रहे हैं।

राजनाथ सिंह ने कहा,

“जो दल घुसपैठियों की पैरवी करते हैं, वे न तो बिहार के हित में हैं और न ही देश के। हमारी सरकार सीमाओं की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और हम किसी भी कीमत पर देश की अखंडता से समझौता नहीं करेंगे।”

उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा, विकास और सामाजिक न्याय के तीनों मोर्चों पर अभूतपूर्व काम किया है, और बिहार को भी उसी दिशा में आगे बढ़ाना एनडीए की प्राथमिकता है।


“संवैधानिक संस्थाओं पर हमला लोकतंत्र के खिलाफ”

राजनाथ सिंह ने अपने भाषण में विपक्ष पर निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने को लेकर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि अगर देश की संस्थाओं को लगातार बदनाम किया जाएगा, तो लोकतंत्र कमजोर होगा।

उन्होंने कहा,

“कांग्रेस और राजद जैसी पार्टियाँ जब चुनावी हार देखती हैं, तो संस्थाओं पर आरोप लगाने लगती हैं। लोकतंत्र में हार-जीत होती रहती है, लेकिन संस्थाओं की गरिमा को बनाए रखना हर राजनीतिक दल का कर्तव्य है।”

राजनाथ सिंह ने कहा कि एनडीए का लक्ष्य सत्ता पाना नहीं, बल्कि शासन में विश्वास पैदा करना है।


“राजद का वादा अव्यावहारिक”

दरभंगा जिले में आयोजित एक अन्य रैली में राजनाथ सिंह ने राजद (राष्ट्रीय जनता दल) के उस वादे को अव्यावहारिक बताया जिसमें पार्टी ने हर परिवार से एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की बात कही है। उन्होंने कहा कि यह वादा पूरी तरह “अवास्तविक और जनभावनाओं के साथ खिलवाड़” है।

उन्होंने कहा,

“सरकारें घोषणाओं से नहीं, नीतियों और निष्ठा से चलती हैं। हमारे पास बिहार के विकास के लिए एक स्पष्ट रोडमैप है। कल एनडीए का घोषणापत्र जारी होगा और उसमें जो वादे होंगे, उन्हें पूरा करने की जिम्मेदारी हम लेंगे।”

राजनाथ सिंह ने कहा कि एनडीए ने केंद्र और राज्य — दोनों स्तरों पर विकास को प्राथमिकता दी है। “बिजली, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार” के क्षेत्र में अब तक की उपलब्धियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार ने केवल वादे नहीं, बल्कि नतीजे दिए हैं।


“नेहरू से लेकर मोदी तक, भारत की लोकतांत्रिक परंपरा मजबूत”

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक परंपरा पंडित नेहरू से शुरू होकर नरेंद्र मोदी तक और भी मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि “नेहरू ने लोकतंत्र की नींव रखी और मोदी ने उसे जन-जन तक पहुंचाया।”

उन्होंने कहा,

“भारत आज दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक ताकत है। हमारे सैनिक सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं, किसान खेतों में काम कर रहे हैं, और युवा नई तकनीक से भारत को आत्मनिर्भर बना रहे हैं। यही असली लोकतंत्र है।”

राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि बिहार के लोग हमेशा से देश की राजनीति के केंद्र में रहे हैं और इस बार भी वे लोकतंत्र को नई दिशा देंगे।


एनडीए की अपील: ‘विकास बनाम अव्यवस्था’ का चुनाव

रक्षा मंत्री के भाषण का मुख्य संदेश साफ था — यह चुनाव “विकास बनाम अव्यवस्था” के बीच है। उन्होंने जनता से अपील की कि बिहार को फिर से “जंगलराज” के रास्ते पर न जाने दें।

उन्होंने कहा,

“हम बिहार को आत्मनिर्भर, शिक्षित और समृद्ध राज्य बनाना चाहते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के ‘विकसित भारत’ के विजन में बिहार की भूमिका महत्वपूर्ण है। अगर एनडीए दो-तिहाई बहुमत से सत्ता में लौटता है, तो यह सिर्फ राजनीतिक जीत नहीं बल्कि बिहार के उज्जवल भविष्य की गारंटी होगी।”

जैसे-जैसे बिहार विधानसभा चुनाव की मतगणना की तारीख करीब आ रही है, राजनीतिक दलों के नेताओं के बयान और आक्रामक हो रहे हैं। राजनाथ सिंह का यह बयान न सिर्फ एनडीए कार्यकर्ताओं में जोश भरने वाला है, बल्कि इसे नेहरू की विरासत के प्रतीकात्मक संदर्भ में रखकर उन्होंने अपने संदेश को भावनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर मजबूत किया है।

अब देखना होगा कि 14 नवंबर — नेहरू जयंती के दिन — बिहार की जनता किसे अपनी सच्ची श्रद्धांजलि के रूप में चुनती है: विकास के वादे को या अतीत के जंगलराज को।

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