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77वां गणतंत्र दिवस: ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्षों का उत्सव और स्वदेशी शौर्य का शंखनाद; कर्तव्य पथ पर भारत दिखायेगा अपनी वैश्विक धमक

नई दिल्ली | भारत आज अपनी लोकतांत्रिक यात्रा के एक और गौरवशाली अध्याय, 77वें गणतंत्र दिवस का जश्न मना रहा है। दिल्ली का ऐतिहासिक ‘कर्तव्य पथ’ आज न केवल भारत की सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक विविधता का गवाह बन रहा है, बल्कि ‘विकसित भारत’ के संकल्प की एक भव्य झांकी भी प्रस्तुत कर रहा है। इस वर्ष का समारोह ऐतिहासिक है, क्योंकि यह राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150वें वर्ष को समर्पित है।

मुख्य अतिथि और कूटनीतिक संदेश

इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह में भारत की बढ़ती वैश्विक साख और ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ की झलक देखने को मिल रही है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की अध्यक्षता में आयोजित इस परेड में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए हैं। यह पहली बार है जब यूरोपीय संघ (EU) के शीर्ष नेतृत्व की ऐसी संयुक्त उपस्थिति भारत के राष्ट्रीय दिवस पर देखी जा रही है।

परंपरा के अनुसार, राष्ट्रपति मुर्मू और दोनों मुख्य अतिथि पारंपरिक बग्गी में सवार होकर कर्तव्य पथ पर पहुंचे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका स्वागत किया। इससे पूर्व, पीएम मोदी ने ‘राष्ट्रीय युद्ध स्मारक’ (National War Memorial) पर शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित कर देश की ओर से श्रद्धांजलि दी।


‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष: थीम और सांस्कृतिक गौरव

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 77वें गणतंत्र दिवस 2026 की मुख्य थीम ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’ रखी गई है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित इस कालजयी गीत ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की लौ जलाई थी। परेड के दौरान झांकियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए इस गीत की ऐतिहासिक यात्रा और इसके सांस्कृतिक प्रभाव को जीवंत किया गया है।

‘विविधता में एकता’ थीम पर आधारित प्रस्तुतियों में देश के विभिन्न कोनों से आए 100 से अधिक कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया, जो यह संदेश देता है कि अलग-अलग भाषाओं और परंपराओं के बावजूद भारत का दिल एक है।


स्वदेशी सैन्य शक्ति और 21 तोपों की सलामी

समारोह की शुरुआत राष्ट्रगान और 21 तोपों की सलामी के साथ हुई। खास बात यह है कि इस बार सलामी में 105 मिमी लाइट फील्ड गन का उपयोग किया गया, जो पूरी तरह से ‘मेड इन इंडिया’ हैं। यह स्वदेशीकरण की दिशा में भारत के बढ़ते कदमों का प्रमाण है। यह सलामी 1721 समारोहिक बैटरी द्वारा दी गई, जो भारतीय सेना की गौरवशाली 172 फील्ड रेजिमेंट का हिस्सा है।

परेड का नेतृत्व और वीरता का सम्मान

परेड की कमान लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार (दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग) के हाथों में है। परेड में देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार विजेताओं की मौजूदगी ने माहौल को देशभक्ति से भर दिया।

  • परम वीर चक्र विजेता: सूबेदार मेजर (मानद कप्तान) योगेंद्र सिंह यादव और सूबेदार मेजर संजय कुमार।

  • अशोक चक्र विजेता: मेजर जनरल सीए पिथवालिया और कर्नल डी श्रीराम कुमार।


पहली बार: भारतीय सेना का ‘चरणबद्ध युद्ध गियर’

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और आधुनिकीकरण को प्रदर्शित करते हुए, इस साल की परेड में पहली बार भारतीय सेना का चरणबद्ध युद्ध गियर (Phased Combat Gear) प्रदर्शित किया गया। इसमें सैनिकों की सुरक्षा और मारक क्षमता को बढ़ाने वाली अत्याधुनिक किट शामिल है।

मुख्य सैन्य आकर्षण:

  1. स्वदेशी टोही वाहन: भारत में डिजाइन किया गया पहला ‘उच्च गतिशीलता टोही वाहन’ (High Mobility Reconnaissance Vehicle) इस बार आकर्षण का केंद्र रहा।

  2. 61 कैवलरी: दुनिया की एकमात्र सक्रिय घुड़सवार रेजिमेंट ने अपनी पारंपरिक और युद्ध किट के साथ मार्च किया।

  3. हवाई शक्ति का प्रदर्शन: आसमान में ‘ध्रुव’ और ‘रुद्र’ हेलिकॉप्टरों के गर्जन ने भारतीय सेना के ‘एयर सपोर्ट’ और आक्रामक क्षमता का लोहा मनवाया।


यूरोपीय संघ का विशेष दल

अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को दर्शाते हुए, परेड में यूरोपीय संघ (EU) का एक विशेष दल भी शामिल हुआ। चार ध्वज वाहकों ने तीन विशेष वाहनों में सवार होकर मार्च किया, जिसमें निम्नलिखित ध्वज शामिल थे:

  • यूरोपीय संघ का ध्वज

  • EU सैन्य कर्मचारियों का ध्वज

  • EU नौसैनिक बल ‘अतालांटा’ और ‘एस्पिड्स’ के ध्वज

यह प्रदर्शन हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और वैश्विक शांति के लिए भारत और यूरोप की साझा प्रतिबद्धता को उजागर करता है।


विकसित भारत की ओर बढ़ते कदम

77वां गणतंत्र दिवस केवल एक समारोह नहीं, बल्कि एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में भारत के आत्मविश्वास का उत्सव है। ‘वंदे मातरम्’ की विरासत से लेकर भविष्य के ‘कॉम्बैट गियर’ तक, आज कर्तव्य पथ पर जो कुछ भी दिखा, वह एक शक्तिशाली और आत्मनिर्भर भारत की तस्वीर है। परेड के करीब 90 मिनट के रोमांच ने हर भारतीय को गर्व से भर दिया है।

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