हरिद्वार: उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार में पिछले 24 घंटों के भीतर दो ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिन्होंने पुलिस प्रशासन और आम जनता को झकझोर कर रख दिया है। पहली घटना ज्वालापुर कोतवाली क्षेत्र की है, जहाँ गंगनहर से एक विवाहित महिला का संदिग्ध शव बरामद हुआ है। वहीं, दूसरी ओर एक भावुक कर देने वाले मामले में हरियाणा के एक किसान का शव 35 साल के लंबे इंतजार के बाद उसके परिजनों को मिला। पुलिस ने दोनों ही मामलों में वैधानिक कार्रवाई पूरी कर ली है।
ज्वालापुर: गंगनहर की झाड़ियों में अटका मिला विवाहिता का शव
शुक्रवार देर रात हरिद्वार के ज्वालापुर कोतवाली अंतर्गत कस्सबान मोहल्ले में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब सीवरेज पंपिंग स्टेशन के पीछे बह रही गंगनहर की झाड़ियों में एक शव अटका हुआ देखा गया। स्थानीय निवासियों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी।
सूचना मिलते ही ज्वालापुर कोतवाली पुलिस और जल पुलिस की टीम मौके पर पहुँची। रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर शव को नहर से बाहर निकाला गया। पुलिस के अनुसार, मृतक महिला की उम्र लगभग 35 वर्ष है और वह विवाहित प्रतीत हो रही है। हरिद्वार गंगनहर महिला शव मिलने की खबर फैलते ही घटनास्थल पर लोगों का जमावड़ा लग गया।
कोतवाली प्रभारी चंद्रभान सिंह ने मामले की जानकारी देते हुए बताया, “शव झाड़ियों में काफी समय से अटका हुआ था। फिलहाल शिनाख्त की कोशिशें की जा रही हैं। शव को कब्जे में लेकर जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया गया है और आसपास के थानों में गुमशुदगी की रिपोर्ट खंगाली जा रही है।”
35 साल का लंबा इंतजार और एक भावुक अंत
हरिद्वार पुलिस की सक्रियता से एक ऐसी गुत्थी सुलझी है, जिसने हरियाणा के झज्जर जिले के एक परिवार को दशकों पुराने दर्द से राहत दी है। दरअसल, करीब 35 साल पहले हरियाणा के झज्जर से उदयवीर नाम का एक किसान रहस्यमय तरीके से लापता हो गया था। परिजनों ने उसे खोजने के लिए जमीन-आसमान एक कर दिया था, लेकिन जीते-जी उदयवीर कभी अपनों से नहीं मिल सका।
तीन दिन पूर्व हरिद्वार के एक मंदिर परिसर में एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिला था। पुलिस ने शव को मोर्चरी में रखा और उसकी बारीकी से जांच की। मृतक के हाथ पर गुदे हुए नाम ने इस रहस्य को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई। हरिद्वार पुलिस की कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार मृतक के परिवार का पता लगा लिया गया।
भाई की नम आंखें: “जीते जी न सही, मौत के बाद तो मिले”
शुक्रवार को जब मृतक का बड़ा भाई हरिद्वार पहुँचा, तो अपने छोटे भाई उदयवीर के शव को देखकर उसकी आँखें भर आईं। 35 वर्षों का विछोह एक बेजान शरीर के सामने खत्म हुआ। भावुक भाई ने कहा कि अगर हरिद्वार पुलिस इतनी गंभीरता से जांच न करती और हाथ पर लिखे नाम के जरिए संपर्क न साधती, तो शायद उन्हें अपने भाई का अंतिम दर्शन भी नसीब नहीं होता।
पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं के बाद शव को परिजनों को सौंप दिया। परिजनों ने मृतक की आत्मा की शांति के लिए हरिद्वार के खड़खड़ी श्मशान घाट पर ही विधि-विधान से उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर जनता की सराहना
दोनों ही मामलों में हरिद्वार पुलिस की तत्परता देखने को मिली है। जहाँ एक ओर 35 साल पुराने लापता व्यक्ति के परिवार को खोज निकालना पुलिस की मानवीय संवेदनाओं को दर्शाता है, वहीं अज्ञात महिला के मामले में पुलिस गहनता से जांच कर रही है। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि महिला की मौत डूबने से हुई है या इसके पीछे कोई आपराधिक साजिश है।
ज्वालापुर पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो पाएगा। सोशल मीडिया और थानों के माध्यम से महिला के फोटो प्रसारित किए जा रहे हैं ताकि जल्द से जल्द उसकी शिनाख्त हो सके।
हरिद्वार जैसे तीर्थ स्थल में अक्सर देश के कोने-कोने से लोग आते हैं, लेकिन कभी-कभी यहाँ से मिलने वाली ऐसी खबरें सुरक्षा और सतर्कता पर सवाल खड़े करती हैं। हरिद्वार गंगनहर महिला शव मामला जहाँ पुलिस के लिए एक नई चुनौती है, वहीं झज्जर के किसान का मामला हमें यह सिखाता है कि न्याय और सच कभी न कभी सामने जरूर आता है, चाहे उसमें दशकों का समय ही क्यों न लग जाए।



