नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों (NCR) में कुदरत के बदलते रंगों ने वैज्ञानिकों और आम जनता दोनों को हैरत में डाल दिया है। जहां अप्रैल के महीने में चिलचिलाती धूप और लू (Heatwave) का प्रकोप शुरू हो जाता था, वहीं इस साल आसमान से बरसती बूंदों और ओलावृष्टि ने मौसम का गणित बिगाड़ दिया है। मंगलवार की रात नोएडा, ग्रेटर नोएडा और दिल्ली के कई हिस्सों में हुई झमाझम बारिश ने न केवल पारे को गिरा दिया, बल्कि लोगों को अलमारी में रखे गर्म कपड़े दोबारा निकालने पर मजबूर कर दिया है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बुधवार, 9 अप्रैल के लिए भी भारी बारिश, बिजली कड़कने और ओलावृष्टि का ‘यलो अलर्ट’ जारी किया है। अप्रैल की यह ‘फिरकी’ उत्तर भारत के 10 से अधिक राज्यों को अपनी चपेट में ले चुकी है।
हिमालयी हलचल और ‘U-शेप’ जेट स्ट्रीम का घातक कॉम्बिनेशन
इस बेमौसम बरसात के पीछे की वैज्ञानिक वजह को समझें तो पता चलता है कि हिमालयी क्षेत्र में लगातार सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) मुख्य विलेन बने हुए हैं। लेकिन इस बार मामला सिर्फ विक्षोभ तक सीमित नहीं है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस साल जेट स्ट्रीम (ऊंचाई पर चलने वाली हवाएं) का आकार बदलकर ‘U’ अक्षर जैसा हो गया है। यह भौगोलिक बदलाव उत्तर की ठंडी हवाओं को मैदानी इलाकों में काफी गहराई तक खींच रहा है। इसके साथ ही भूमध्य सागर से उठने वाली नम हवाओं को अरब सागर से मिल रही नमी ने और ज्यादा शक्तिशाली बना दिया है। यही कारण है कि राजस्थान के ऊपर एक ‘चक्रवाती प्रवाह’ (Cyclonic Circulation) बन गया है, जो दिल्ली-NCR समेत पूरे उत्तर भारत में झमाझम बारिश का सबब बना हुआ है।
तापमान में भारी गिरावट: 36°C की जगह 30°C पर अटका पारा
बारिश और तेज ठंडी हवाओं के चलते दिल्ली और आसपास के शहरों के तापमान में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों की मानें तो दिल्ली-NCR, पंजाब और हरियाणा में अधिकतम तापमान सामान्य से 5°C से 8°C तक नीचे गिर गया है।
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दिल्ली का तापमान: सामान्यतः अप्रैल में जो पारा 36-38 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता था, वह फिलहाल 30 डिग्री के नीचे सिमट गया है।
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बारिश के आंकड़े: मंगलवार दोपहर तक सफदरजंग और लोधी रोड में 1.8 मिमी, जबकि पालम और आयानगर में औसतन 1.5 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। रात की बारिश ने इन आंकड़ों को और ऊपर पहुंचा दिया है।
इस मौसमी बदलाव के कारण सुबह और शाम के वक्त फरवरी जैसी हल्की ठंड का अहसास हो रहा है, जो अप्रैल के लिहाज से बेहद दुर्लभ माना जाता है।
किसानों की बढ़ी चिंता: फसलों पर ‘आसमानी आफत’
जहां शहरों में यह मौसम गर्मी से राहत लेकर आया है, वहीं ग्रामीण इलाकों और किसानों के लिए यह किसी त्रासदी से कम नहीं है। उत्तर भारत में यह समय रबी की मुख्य फसलों—गेहूं और चने—की कटाई का होता है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में हुई भारी ओलावृष्टि ने गेहूं की खड़ी फसल को बिछा दिया है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ओलों की मार इसी तरह जारी रही, तो आने वाले महीनों में अनाज और सब्जियों की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। कटाई के मुहाने पर खड़ी फसल का बर्बाद होना ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका है।
10 अप्रैल तक राहत नहीं, फिर लौटेगी गर्मी
IMD के पूर्वानुमानों के अनुसार, दिल्ली NCR में बारिश और आंधी-तूफान का यह दौर 10 अप्रैल तक जारी रह सकता है। इस साल अप्रैल में सामान्य से अधिक बारिश (LPA का 112%) होने की संभावना जताई गई है।
आगे क्या होगा?
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11 अप्रैल से बदलाव: पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव धीरे-धीरे कम होगा और आसमान साफ होने लगेगा।
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तापमान में उछाल: 12 अप्रैल के बाद धूप तेज होगी, जिससे अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री की तेजी आएगी।
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भीषण गर्मी की वापसी: अप्रैल के दूसरे पखवाड़े में पारा दोबारा 35 से 37 डिग्री सेल्सियस के पार जा सकता है।
जलवायु परिवर्तन का संकेत
अप्रैल के महीने में नवंबर जैसा अहसास होना कहीं न कहीं जलवायु परिवर्तन (Climate Change) की वैश्विक पदचाप की ओर इशारा करता है। हालांकि, तात्कालिक तौर पर यह ‘पश्चिमी विक्षोभ’ का असर है, लेकिन लंबे समय में मौसम के इस अनिश्चित व्यवहार ने पर्यावरणविदों की चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल, दिल्लीवासियों को सलाह दी गई है कि वे आंधी और बिजली गिरने के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें।



