नई दिल्ली: चिलचिलाती धूप, भीषण गर्मी और पसीने से तरबतर कर देने वाली उमस से परेशान उत्तर और मध्य भारत के करोड़ों नागरिकों के लिए आखिरकार राहत की बड़ी खबर आ गई है। लंबे इंतजार के बाद मानसून ने देश के एक बड़े हिस्से को अपनी आगोश में ले लिया है। उत्तर प्रदेश के रास्ते आगे बढ़ते हुए मानसून अब दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान की दहलीज पर पूरी मजबूती के साथ दस्तक दे चुका है।
राहत की बात यह है कि मानसून के मुख्य बादलों के पूरी तरह छाने से पहले ही देश की राजधानी और उसके आस-पास के इलाकों में प्री-मानसून की गतिविधियों ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है। बुधवार सुबह से ही दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम समेत पूरे एनसीआर में आसमान में काले बादलों का डेरा है और ठंडी हवाओं के साथ झमाझम बारिश का सिलसिला शुरू हो चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का कहना है कि यह तो बस शुरुआत है, आने वाले 4 से 5 दिनों तक उत्तर भारत के राज्यों में मौसम ऐसा ही खुशनुमा और बरसाती बना रहेगा।
दिल्ली-NCR में मानसून की बारिश: अगले 6 दिनों का पूरा शेड्यूल
मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के अनुसार, दिल्ली एनसीआर में मानसून की बारिश का यह दौर केवल एक या दो दिन का नहीं है, बल्कि यह पूरा हफ्ता बारिश के नाम रहने वाला है। 1 जुलाई से लेकर 6 जुलाई तक राजधानी और आस-पास के इलाकों में रुक-रुक कर हल्की से मध्यम और कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की प्रबल संभावना जताई गई है।
मौसम वैज्ञानिकों ने बुधवार के लिए विशेष रूप से ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि तेज गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका के साथ-साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज धूलभरी और ठंडी हवाएं चलेंगी। दिनभर आसमान में घने बादलों की आवाजाही लगी रहेगी, जिससे तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जाएगी और लोगों को उमस भरी गर्मी से पूरी तरह निजात मिल जाएगी।
यात्रियों और वाहन चालकों के लिए चेतावनी:
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि बारिश के दौरान विजिबिलिटी कम हो सकती है और जलभराव के कारण ट्रैफिक जाम की स्थिति बन सकती है। इसलिए घर से निकलते समय मौसम का हाल जरूर जान लें।
उत्तर प्रदेश और बिहार-झारखंड में बादलों का डेरा, भारी बारिश की चेतावनी
उत्तर प्रदेश में मानसून पहले ही प्रवेश कर चुका है और अब यह पूरे राज्य को कवर कर रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 2 से 3 जुलाई और फिर 4 से 6 जुलाई के दौरान भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में 1 से 3 जुलाई और उसके बाद 3 से 5 जुलाई के बीच मूसलाधार बारिश होने के आसार हैं। इस दौरान आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं को लेकर भी प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है।
पड़ोसी राज्यों बिहार और झारखंड की बात करें, तो यहां भी मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। बिहार और झारखंड में 5 जुलाई तक के लिए ‘रेन अलर्ट’ जारी किया गया है। नेपाल से सटे तराई वाले इलाकों में भारी बारिश के कारण नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
पंजाब, हरियाणा और राजस्थान का मौसम: धूल भरी आंधी के साथ होगी बौछारें
मैदानी इलाकों की बात करें तो पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में भी मानसून की मानसूनी हवाएं पहुंच चुकी हैं। 1 जुलाई से यहां मानसूनी बारिश का दौर शुरू हो चुका है, जो अगले 5 दिनों तक जारी रहेगा।
वहीं, राजस्थान के मौसम में भी बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। पूर्वी राजस्थान में 2 से 6 जुलाई के दौरान व्यापक रूप से बरसात होने का अलर्ट है। दूसरी तरफ, पश्चिमी राजस्थान के रेतीले इलाकों में मौसम थोड़ा अलग मिजाज दिखाएगा। यहां 2 से 6 जुलाई के दौरान कहीं-कहीं जगहों पर बारिश तो होगी, लेकिन साथ ही 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से धूल भरी आंधी चलने की भी आशंका जताई गई है। आंधी और बारिश का यह कॉम्बिनेशन रेगिस्तानी इलाकों में तापमान को तेजी से नीचे लाएगा।
राज्यों के अनुसार बारिश का पूरा कैलेंडर (1 से 6 जुलाई, 2026)
नीचे दी गई तालिका से समझिए कि आपके राज्य में कब और कितने दिनों तक बारिश का अलर्ट जारी किया गया है:
| राज्य/क्षेत्र | बारिश की संभावित तिथियां | मुख्य विशेषताएं |
| दिल्ली-NCR | 1 से 6 जुलाई | 40-50 किमी/घंटा की हवाएं, वज्रपात की आशंका |
| पश्चिमी उत्तर प्रदेश | 2-3 जुलाई और 4-6 जुलाई | भारी बारिश, जलभराव की संभावना |
| पूर्वी उत्तर प्रदेश | 1-3 जुलाई और 3-5 जुलाई | लगातार बौछारें, आकाशीय बिजली का अलर्ट |
| पंजाब और हरियाणा | 1 से 6 जुलाई | मध्यम से भारी बारिश, ठंडी हवाएं |
| पूर्वी राजस्थान | 2 से 6 जुलाई | झमाझम बारिश, गर्मी से बड़ी राहत |
| पश्चिमी राजस्थान | 3 से 6 जुलाई | बारिश के साथ धूल भरी आंधी का दौर |
| उत्तराखंड | 2 से 6 जुलाई | पर्वतीय क्षेत्रों में भारी से अत्यंत भारी बारिश |
| हिमाचल प्रदेश | 3 से 5 जुलाई | पर्यटकों के लिए एडवाइजरी, भूस्खलन का खतरा |
| बिहार और झारखंड | 5 जुलाई तक | मानसून की निरंतर सक्रियता |
| मध्य प्रदेश, बंगाल, ओडिशा | 6 जुलाई तक | लगातार बारिश का दौर जारी रहेगा |
पहाड़ों में आफत बन सकता है मानसून: उत्तराखंड और हिमाचल में अलर्ट
मैदानी इलाकों के लिए जहां दिल्ली एनसीआर में मानसून की बारिश राहत लेकर आई है, वहीं पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के लिए यह चिंता का सबब भी बन सकती है। उत्तराखंड में मानसून विधिवत रूप से प्रवेश कर चुका है। मौसम विभाग ने उत्तराखंड में 2 से 6 जुलाई के दौरान अत्यंत भारी बारिश का रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। पहाड़ों में अत्यधिक बारिश के कारण भूस्खलन (Landslide) और संवेदनशील रास्तों पर चट्टानें गिरने का खतरा बढ़ गया है।
हिमाचल प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे शिमला और मनाली में भी मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। हिमाचल में 3 से 5 जुलाई के दौरान भारी बारिश की संभावना है। स्थानीय प्रशासन ने सैलानियों और स्थानीय निवासियों को नदी-नालों के पास न जाने और पहाड़ी रास्तों पर रात के समय यात्रा करने से बचने की सख्त हिदायत दी है। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के इलाकों में भी आज हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है।
मध्य और पूर्वी भारत का हाल: एमपी, बंगाल और ओडिशा भी सराबोर
मानसून की यह सक्रियता केवल उत्तर भारत तक ही सीमित नहीं है। मध्य प्रदेश में भी मानसून के बादल पूरी तरह मेहरबान हैं और राज्य के अधिकांश हिस्सों में 6 जुलाई तक लगातार बारिश होने का अनुमान है। पूर्वी भारत की बात करें तो पश्चिम बंगाल और ओडिशा में भी मानसून की रफ्तार तेज बनी हुई है, जिसके चलते यहां भी 6 जुलाई तक भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।
कुल मिलाकर, उत्तर भारत में मानसून का यह आगमन देश के अन्नदाताओं यानी किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। धान की बुवाई और अन्य खरीफ फसलों के लिए यह बारिश बेहद संजीवनी साबित होगी। हालांकि, देश के बड़े महानगरों जैसे दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद के नगर निगमों के लिए यह बारिश एक कड़ा इम्तिहान होने वाली है, क्योंकि प्री-मानसून की पहली बौछारों ने ही ड्रेनेज सिस्टम की पोल खोलनी शुरू कर दी है। ऐसे में आम जनता को आने वाले कुछ दिनों तक उमस से राहत तो मिलेगी, लेकिन सड़कों पर जलभराव की समस्या से भी दो-चार होना पड़ सकता है।
