
कोलकाता/बारुईपुर: पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों का बिगुल फूंकते हुए तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने एक बड़ा राजनीतिक दांव चल दिया है। शुक्रवार को दक्षिण 24 परगना के बारुईपुर में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए बनर्जी ने दावा किया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी आगामी चुनावों में 2021 के अपने ही रिकॉर्ड को तोड़ देगी।
‘2021 से भी बड़ी होगी जीत’: अभिषेक बनर्जी का संकल्प
अभिषेक बनर्जी ने आत्मविश्वास के साथ घोषणा की कि तृणमूल कांग्रेस पांच साल पहले की तुलना में कम से कम एक सीट अधिक जीतेगी। गौरतलब है कि साल 2021 के ऐतिहासिक चुनाव में टीएमसी ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 213 सीटों पर प्रचंड जीत दर्ज की थी।
अभिषेक ने समर्थकों के बीच हुंकार भरते हुए कहा, “मेरी बात लिख लीजिए, ऐसी जनविरोधी ताकतों के खिलाफ मेरी लड़ाई आज से शुरू होती है। हम 2021 में मिली सीटों से कम से कम एक सीट ज्यादा जीतकर सत्ता में लौटेंगे।”
मतदाता सूची पर बवाल: ‘जिंदा लोगों को कागजों पर मार डाला’
रैली के दौरान उस वक्त नाटकीय मोड़ आ गया जब अभिषेक बनर्जी ने मंच पर एक महिला सहित तीन लोगों को जनता के सामने पेश किया। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग द्वारा हाल ही में किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में इन तीनों को ‘मृत’ घोषित कर दिया गया है।
अभिषेक का सीधा सवाल:
“अगर ये लोग सरकारी दस्तावेजों में मृत हैं, तो आज मेरे साथ मंच पर कैसे खड़े हैं? बीजेपी के इशारे पर चुनाव आयोग गरीबों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित करने की कोशिश कर रहा है।”
बता दें कि निर्वाचन आयोग ने 16 दिसंबर को मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की थी, जिसमें पलायन और मृत्यु जैसे कारणों का हवाला देते हुए 58 लाख से अधिक नाम हटाए गए हैं। टीएमसी का आरोप है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह ‘अनियोजित’ थी और इसके तनाव के कारण राज्य में कई लोगों की जान तक चली गई।
केंद्र पर ‘बंगाल विरोधी’ होने का आरोप
डायमंड हार्बर से सांसद बनर्जी ने केंद्र की एनडीए (NDA) सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए उसे ‘बंगाल विरोधी’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली की सरकार पश्चिम बंगाल के हक का पैसा रोककर राज्य की जनता को सजा दे रही है।
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रुका हुआ फंड: बनर्जी ने कहा कि केंद्र ने 100 दिवसीय ग्रामीण रोजगार योजना (MGNREGA) और सड़क परियोजनाओं के लिए आवंटित धन को दुर्भावनापूर्ण तरीके से रोक रखा है।
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षड्यंत्र का आरोप: उन्होंने कहा कि पहले फंड रोका गया और अब मतदाता सूची में हेरफेर कर लोगों की आवाज दबाने की साजिश रची जा रही है।
2026 चुनाव की बिसात: बीजेपी बनाम टीएमसी
2026 का विधानसभा चुनाव पश्चिम बंगाल के लिए बेहद निर्णायक माना जा रहा है। एक तरफ जहाँ बीजेपी 2021 की हार का बदला लेने के लिए जमीन तैयार कर रही है, वहीं अभिषेक बनर्जी के इस बयान ने साफ कर दिया है कि टीएमसी आक्रामक मूड में है।
| मुख्य बिंदु | विवरण |
| लक्ष्य | 213+ सीटें (2026 चुनाव) |
| प्रमुख मुद्दा | मतदाता सूची से 58 लाख नाम हटाना |
| विरोध का केंद्र | केंद्र द्वारा फंड रोकना और SIR प्रक्रिया |
| राजनीतिक संदेश | ‘बंगाल विरोधी’ ताकतों के खिलाफ युद्ध का ऐलान |
सियासी गलियारों में चर्चा
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अभिषेक बनर्जी ने ‘मृत घोषित’ मतदाताओं को मंच पर लाकर एक बड़ा इमोशनल कार्ड खेला है। यह न केवल चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि ग्रामीण बंगाल में बीजेपी के खिलाफ माहौल बनाने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा भी है।



