
सिरसा (हरियाणा): हरियाणा के सिरसा जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ जिला जेल में तैनात वार्डन सुखदेव सिंह ने अधिकारियों की कथित मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर जहरीला पदार्थ (सल्फास) खाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। मौत से पहले वार्डन ने दो अलग-अलग सुसाइड नोट छोड़े हैं, जिनमें जेल के डीएसपी (DSP) और एक अन्य अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
इस घटना के बाद जेल प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। वहीं, मृतक के परिजनों ने आरोपियों की गिरफ्तारी न होने तक शव लेने से इनकार कर दिया है।
सुसाइड से पहले बेटे को किया आखिरी फोन: “अपना और मां का ख्याल रखना”
आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठाने से ठीक पहले सुखदेव सिंह ने अपने बेटे को फोन किया। रुंधे हुए गले से उन्होंने कहा, “बेटे, मैं इन दरिंदों से हार गया हूं। अधिकारियों की प्रताड़ना अब बर्दाश्त से बाहर है, मैं जहर खा रहा हूं। मेरे बैग में सुसाइड नोट रखे हैं, उन्हें देख लेना। अपना और अपनी मां का ख्याल रखना।” पिता की ये बातें सुनकर परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई, लेकिन जब तक वे कुछ कर पाते, सुखदेव सिंह दम तोड़ चुके थे।
सुसाइड नोट में बयां किया 15 दिनों का ‘नर्क’
सुखदेव सिंह ने जेल महानिदेशक (DG) और सिरसा एसपी के नाम लिखे पत्रों में अपनी पीड़ा विस्तार से लिखी है।
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बीमारी के बावजूद नाइट ड्यूटी का दबाव: सुखदेव ने लिखा कि वे पिछले 6 साल से दिल की बीमारी (Heart Disease) से पीड़ित थे। उन्होंने 14 दिसंबर को डीएसपी सिक्योरिटी से अनुरोध किया था कि उन्हें रात की ड्यूटी न दी जाए। आरोप है कि इस पर अधिकारी भड़क गए और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।
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सार्वजनिक रूप से माफी मंगवाई: नोट के अनुसार, 31 दिसंबर को उन्हें अपमानित किया गया। नए साल पर उन्होंने जेल सुपरिंटेंडेंट के सामने पूरी गार्ड के समक्ष माफी भी मांगी, जिसे सुपरिंटेंडेंट ने स्वीकार कर लिया था।
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दिनभर खड़ा रखा, फिर भी ड्यूटी पर नहीं लिया: पीड़ित ने आरोप लगाया कि सुपरिंटेंडेंट के माफ करने के बावजूद डीएसपी और एलओ (LO) ने उन्हें सारा दिन ड्यूटी पर खड़ा रखा और शाम को ड्यूटी ज्वाइन कराने से इनकार कर दिया। इसी अपमान और तनाव के चलते उन्होंने यह कदम उठाया।
परिजनों का आरोप: “पुलिस बचा रही है बड़े अधिकारियों को”
मृतक वार्डन के परिजनों ने सिरसा पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं। परिजनों का कहना है कि स्पष्ट सुसाइड नोट और नामजद आरोपों के बावजूद पुलिस अब तक संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने से कतरा रही है।
“जब तक डीएसपी और एलओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाता, हम शव का पोस्टमार्टम नहीं कराएंगे और न ही अंतिम संस्कार करेंगे।” – परिजनों का बयान
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और जांच
वर्तमान में हुडा पुलिस चौकी इस मामले की तफ्तीश कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सुसाइड नोट को कब्जे में ले लिया गया है और उसकी हैंडराइटिंग की जांच कराई जाएगी। जेल प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से भी इस संबंध में पूछताछ की जा रही है।
मुख्य बिंदु: जो व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं
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क्या बीमार कर्मचारियों के प्रति विभाग का रवैया इतना संवेदनहीन है?
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जेल सुपरिंटेंडेंट की माफी के बाद भी निचले अधिकारियों ने प्रताड़ना क्यों जारी रखी?
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अनुशासन के नाम पर क्या सार्वजनिक अपमान करना कानूनन सही है?
यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है और स्थानीय कर्मचारी संगठनों ने भी सुखदेव सिंह के हक में आवाज उठाना शुरू कर दिया है।



