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वेनेजुएला संकट: ‘तानाशाह’ मादुरो की गिरफ्तारी पर बंटी दुनिया; फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने US ऑपरेशन के ‘तरीके’ पर उठाए सवाल

पेरिस/वॉशिंगटन | वर्ल्ड डेस्क: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो (Nicolás Maduro) की अमेरिकी सेना द्वारा नाटकीय गिरफ्तारी ने वैश्विक कूटनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। जहाँ एक ओर पश्चिमी जगत मादुरो के पतन को लोकतंत्र की जीत मान रहा है, वहीं दूसरी ओर एक संप्रभु राष्ट्र के भीतर घुसकर किए गए इस सैन्य ऑपरेशन ने अंतरराष्ट्रीय कानून (International Law) की शुचिता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

इस कड़ी में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) का बयान सबसे अहम माना जा रहा है, जिन्होंने परिणाम का स्वागत तो किया लेकिन प्रक्रिया की कड़ी निंदा की।

मैक्रों का रुख: “नतीजा सुखद, पर तरीका अस्वीकार्य”

सोमवार को पेरिस में कैबिनेट बैठक के दौरान राष्ट्रपति मैक्रों ने इस मुद्दे पर फ्रांस का आधिकारिक रुख स्पष्ट किया। फ्रांस सरकार की प्रवक्ता मौड ब्रेगन के अनुसार, मैक्रों ने कहा कि निकोलस मादुरो एक ‘तानाशाह’ थे और उनका सत्ता से हटना वेनेजुएला के नागरिकों के लिए “अच्छी खबर” है।

हालांकि, उन्होंने कड़े शब्दों में जोड़ा कि अमेरिका द्वारा इस ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए अपनाई गई सैन्य विधि (Method) का फ्रांस न तो समर्थन करता है और न ही उसे वैध मानता है। मैक्रों ने स्पष्ट किया कि बिना अंतरराष्ट्रीय सहमति या कानूनी जनादेश के किसी राष्ट्र प्रमुख को हिरासत में लेना खतरनाक मिसाल कायम कर सकता है।


ऑपरेशन ‘एब्सोल्यूट रिजॉल्व’: आधी रात का वो मिशन

अमेरिकी विशेष बलों ने 3 जनवरी को तड़के (Pre-dawn operation) वेनेजुएला में एक गुप्त ऑपरेशन चलाया।

  • गिरफ्तारी: मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोर्स को उनके निवास से हिरासत में लिया गया।

  • न्यूयॉर्क ट्रांसफर: ट्रंप प्रशासन के अनुसार, दोनों को सीधे न्यूयॉर्क ले जाया गया है, जहां उन पर नार्को-टेररिज्म, ड्रग तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे संगीन मामलों में मुकदमा चलाया जाएगा।

  • मानवीय क्षति: इस सैन्य कार्रवाई और सितंबर से जारी तनाव में अब तक 115 से अधिक लोगों की मौत की खबरें हैं, जिसे लेकर मानवाधिकार संगठन चिंतित हैं।


ट्रंप का ‘तेल’ कार्ड और ‘कंट्रोल’ की थ्योरी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे घटनाक्रम को अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति की बड़ी जीत बताया है। उन्होंने एक विवादास्पद बयान देते हुए कहा कि अमेरिका तब तक वेनेजुएला को ‘चलाएगा’ (Run), जब तक कि वहां एक “सुरक्षित और उचित” सत्ता परिवर्तन नहीं हो जाता।

ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वेनेजुएला के विशाल तेल भंडारों पर अमेरिकी हितों को फिर से बहाल करना उनकी प्राथमिकता है। विदेश मंत्री रुबियो मार्को ने भी इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिका वेनेजुएला को क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक हितों के लिए आवश्यक मानता है।


दुनिया की प्रतिक्रिया: कौन किसके साथ?

देश/संगठन रुख मुख्य टिप्पणी
अमेरिका समर्थक “यह नार्को-टेररिस्ट्स के खिलाफ एक कानून प्रवर्तन कार्रवाई है।”
फ्रांस मिश्रित “तानाशाह का जाना अच्छा है, पर संप्रभुता का उल्लंघन गलत है।”
चीन/रूस विरोधी “यह ‘एकतरफा दादागिरी’ और अंतरराष्ट्रीय कानून की धज्जियां उड़ाना है।”
संयुक्त राष्ट्र (UN) चिंतित “यह एक खतरनाक मिसाल है, जो वैश्विक व्यवस्था को अस्थिर कर सकती है।”

कानूनी विशेषज्ञों की राय: संप्रभुता बनाम अपराध

अंतरराष्ट्रीय कानून के जानकारों का मानना है कि यूएन चार्टर के अनुच्छेद 2(4) के तहत किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ सैन्य बल का प्रयोग वर्जित है। यदि अमेरिका इसे केवल ‘ड्रग तस्करी’ का मामला बताकर बचाव करता है, तो भविष्य में अन्य शक्तिशाली देश भी इसी तरह के तर्क देकर दूसरे देशों के नेतृत्व को निशाना बना सकते हैं।

भविष्य की राह

मादुरो अब न्यूयॉर्क की सलाखों के पीछे हैं, लेकिन वेनेजुएला का भविष्य अभी भी अधर में है। क्या अमेरिका वहां वाकई लोकतंत्र की स्थापना करेगा या यह केवल तेल संसाधनों पर कब्जे का एक ‘रेजीम चेंज’ (Regime Change) मिशन है? मैक्रों के सवाल इसी अनिश्चितता को उजागर करते हैं।

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