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उत्तराखंड: समाज कल्याण मंत्री खजान दास का कड़ा रुख, बोले- ‘अंतिम छोर के व्यक्ति तक लाभ पहुँचाने में लापरवाही बर्दाश्त नहीं’

देहरादून: उत्तराखंड सरकार के नवनियुक्त समाज कल्याण मंत्री खजान दास ने पदभार ग्रहण करने के बाद अपने तेवर कड़े कर लिए हैं। विधानसभा स्थित सभागार में विभागीय अधिकारियों के साथ आयोजित अपनी पहली औपचारिक समीक्षा बैठक में उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि समाज के वंचित और कमजोर वर्गों के लिए संचालित योजनाओं में किसी भी स्तर पर हीला-हवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मंत्री ने अधिकारियों को दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि पात्र व्यक्तियों को योजनाओं का लाभ मिलने में देरी हुई या भ्रष्टाचार की शिकायत मिली, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

संवेदनशीलता और पारदर्शिता पर विशेष जोर

बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंत्री खजान दास ने कहा कि समाज कल्याण विभाग केवल एक सरकारी विभाग नहीं, बल्कि राज्य के सबसे संवेदनशील और जनसरोकार से जुड़े स्तंभों में से एक है। उन्होंने कहा, “हमारा प्राथमिक लक्ष्य समाज के उस अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना है जो अब भी मुख्यधारा से कटा हुआ है। वृद्धावस्था पेंशन, दिव्यांगजन सहायता और छात्रवृत्ति जैसी योजनाएं लाखों परिवारों का सहारा हैं, इसलिए इनका क्रियान्वयन पूरी निष्ठा और पारदर्शिता के साथ होना चाहिए।”

उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे फाइलों के निस्तारण में तेजी लाएं और एक ऐसा सुदृढ़ तंत्र विकसित करें जहाँ लाभार्थियों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। मंत्री ने जोर देकर कहा कि तकनीक का अधिकतम उपयोग कर बिचौलियों की भूमिका को समाप्त किया जाए।

डिजिटल गवर्नेंस: योजनाओं की होगी ‘रियल टाइम’ मॉनिटरिंग

बैठक के दौरान मंत्री ने विभागीय कार्यों में आधुनिक तकनीक और डिजिटलीकरण को अपनाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी लाभार्थियों का डेटाबेस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर व्यवस्थित किया जाए ताकि योजनाओं की प्रगति की रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव हो सके।

मंत्री खजान दास ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान की तर्ज पर समाज कल्याण विभाग को भी पूरी तरह पेपरलेस और पारदर्शी बनाने की दिशा में काम करना होगा। जब डेटा ऑनलाइन होगा, तो जवाबदेही तय करना आसान होगा और भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।”

विकसित भारत 2047 और मुख्यमंत्री धामी का विजन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को दोहराते हुए खजान दास ने कहा कि इस भव्य लक्ष्य को प्राप्त करने में समाज कल्याण विभाग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य को विकास के नए सोपानों पर ले जाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि मुख्यमंत्री धामी का स्पष्ट निर्देश है कि सरकार का उद्देश्य केवल कागजों पर योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका धरातल पर प्रभावी असर दिखाना है। मंत्री ने अवगत कराया कि जल्द ही मुख्यमंत्री स्वयं सभी संबंधित विभागों की एक उच्चस्तरीय संयुक्त बैठक लेंगे, जिसमें अंतर-विभागीय समन्वय और नई रणनीतियों पर मंथन किया जाएगा।

पेंशन और छात्रवृत्ति योजनाओं की गहन समीक्षा

समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री ने सिलसिलेवार तरीके से निम्नलिखित बिंदुओं पर जानकारी ली:

  1. वृद्धावस्था एवं दिव्यांग पेंशन: पेंशन वितरण में होने वाली देरी के कारणों की समीक्षा की गई और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

  2. अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण: इन वर्गों के लिए संचालित विशेष योजनाओं के बजट आवंटन और उपयोग की स्थिति जांची गई।

  3. छात्रवृत्ति वितरण: छात्र-छात्राओं को मिलने वाली छात्रवृत्ति में किसी भी प्रकार के तकनीकी व्यवधान को तत्काल दूर करने को कहा गया।

मंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि वे नियमित रूप से फील्ड में जाकर योजनाओं का फीडबैक लें। उन्होंने कहा कि केवल दफ्तरों में बैठकर रिपोर्ट तैयार करने का समय अब बीत चुका है, अब परिणाम दिखाने का वक्त है।

जनहित सर्वोपरि

बैठक के अंत में खजान दास ने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे सरकारी कर्मचारी मात्र बनकर नहीं, बल्कि सेवा भाव के साथ कार्य करें। उन्होंने दोहराया कि सरकार की मंशा ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ हासिल करने की है, और इसमें अधिकारियों की जवाबदेही सबसे ऊपर है।

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