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खनन सुधारों में देश में नंबर-1 बना उत्तराखंड; केंद्र ने फिर दी ₹100 करोड़ की प्रोत्साहन राशि, कुल सहायता पहुंची ₹200 करोड़

The Hill India News
Last updated: November 19, 2025 1:02 pm
The Hill India News
Published: November 19, 2025
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देहरादून, 20 नवंबर: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में खनन क्षेत्र में लागू की गई पारदर्शी नीतियों, तकनीकी सुधारों और समयबद्ध क्रियान्वयन ने उत्तराखंड को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि दिलाई है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2025-26 की विशेष सहायता योजना (SASCI) के तहत उत्तराखंड को माइनर मिनरल रिफॉर्म्स में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए ₹100 करोड़ की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि मंजूर की है। यह दूसरा मौका है जब राज्य को खनन सुधारों के लिए इतना बड़ा वित्तीय प्रोत्साहन मिला है।

Contents
केंद्र की रिपोर्ट में उत्तराखंड का प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ — 7 में से 6 सुधार मानकों को किया पूराखनन नीतियों में सुधार से राज्य की अर्थव्यवस्था को मिली नई रफ्तारसैटेलाइट मॉनिटरिंग, एंटी-इलीगल माइनिंग ड्राइव और डिजिटल सिस्टमों से मिली सफलता✔ सैटेलाइट आधारित निगरानी प्रणाली✔ ई-निलामी प्लेटफॉर्म✔ ऑनलाइन परमिट और ट्रांसपोर्ट सिस्टम✔ टास्क फोर्स और त्वरित कार्रवाई टीमेंराज्य सरकार की सुधारपद्धति को अन्य_states भी अपनाने लगेखनन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली मजबूतीकेंद्र की सराहना और ₹100 करोड़ की प्रोत्साहन राशि का महत्वमुख्यमंत्री धामी बोले — “पारदर्शिता और जवाबदेही की नीति से खनन क्षेत्र में दिख रहे सकारात्मक परिणाम”खनन सुधारों में राष्ट्रीय अग्रणी—उत्तराखंड की पहचान और अधिक मजबूत

इससे पहले अक्टूबर 2025 में SMRI रैंकिंग में दूसरे स्थान पर आने पर भी राज्य को ₹100 करोड़ की सहायता प्रदान की गई थी। इस तरह अब तक कुल ₹200 करोड़ की केंद्रीय सहायता राज्य को प्राप्त हो चुकी है।


केंद्र की रिपोर्ट में उत्तराखंड का प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ — 7 में से 6 सुधार मानकों को किया पूरा

खनन मंत्रालय द्वारा 18 नवंबर को जारी कार्यालय ज्ञापन के अनुसार, उत्तराखंड ने माइनर मिनरल्स सुधारों से संबंधित निर्धारित 7 में से 6 प्रमुख सुधार बिंदुओं को पूर्णतः लागू किया है। यह उपलब्धि राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान दिलाने में निर्णायक साबित हुई। इन सुधारों में शामिल हैं:

  • ई-निलामी प्रणाली को 100% लागू करना
  • खनन गतिविधियों की सैटेलाइट आधारित निगरानी
  • अवैध खनन पर त्वरित निगरानी तंत्र
  • पारदर्शी परमिट प्रणाली
  • राजस्व संग्रह को डिजिटाइज्ड करना
  • खनन से जुड़ी शिकायत निवारण व्यवस्था को मजबूत करना

केंद्र ने स्पष्ट रूप से कहा है कि मूल्यांकन किए गए तीन राज्यों—नागालैंड, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड—में सबसे बेहतर प्रगति उत्तराखंड ने दिखाई है।


खनन नीतियों में सुधार से राज्य की अर्थव्यवस्था को मिली नई रफ्तार

खनन सुधारों का सीधा प्रभाव राज्य की वित्तीय सेहत पर पड़ा है। पिछले तीन वर्षों में खनन राजस्व में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज हुई है। इन नीतियों के बाद:

  • सरकारी आय में बड़ा इजाफा हुआ
  • खनन व्यवसाय से जुड़े लाखों लोगों को रोजगार व आर्थिक लाभ मिला
  • स्थानीय बाजारों में निर्माण सामग्री सस्ती और सुलभ हुई
  • ई-निलामी से भ्रष्टाचार और बिचौलिया तंत्र पर प्रभावी लगाम लगी

इन सुधारों ने उत्तराखंड को न केवल राजस्व का नया बड़ा स्रोत दिया, बल्कि इसे देश के सबसे पारदर्शी खनन मॉडलों में एक के रूप में स्थापित किया।


सैटेलाइट मॉनिटरिंग, एंटी-इलीगल माइनिंग ड्राइव और डिजिटल सिस्टमों से मिली सफलता

राज्य सरकार ने खनन क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग व्यापक स्तर पर बढ़ाया है। प्रमुख सुधारों में शामिल हैं:

✔ सैटेलाइट आधारित निगरानी प्रणाली

खनन क्षेत्रों की गतिविधियों पर वास्तविक समय में नज़र रखी जा रही है, जिससे अवैध खनन में भारी कमी आई है।

✔ ई-निलामी प्लेटफॉर्म

खनन पट्टों के आवंटन में पूर्ण पारदर्शिता आई है, और सरकार को अधिक प्रतिस्पर्धी बोलियां मिलनी शुरू हुई हैं।

✔ ऑनलाइन परमिट और ट्रांसपोर्ट सिस्टम

लोडिंग से लेकर परिवहन तक की प्रक्रिया डिजिटल हो गई है, जिससे राजस्व रिसाव लगभग समाप्त हो गया है।

✔ टास्क फोर्स और त्वरित कार्रवाई टीमें

अवैध खनन के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं, और सैकड़ों मामले पकड़े गए हैं।


राज्य सरकार की सुधारपद्धति को अन्य_states भी अपनाने लगे

केंद्र की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर सहित कई राज्य उत्तराखंड की खनन नीतियों को मॉडल के रूप में अपना रहे हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि उत्तराखंड ने खनन सुधारों में एक ऐसा प्रशासनिक ढांचा प्रस्तुत किया है, जिसे देशभर में “बेस्ट प्रैक्टिस” के रूप में देखा जा रहा है।


खनन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली मजबूती

खनन क्षेत्र की उन्नत व्यवस्था ने निचले स्तर तक भी लाभ पहुंचाया है:

  • खनन गतिविधियों से हजारों प्रत्यक्ष रोजगार
  • परिवहन, मशीनरी, सर्वेक्षण कार्यों में अप्रत्यक्ष रोजगार
  • स्थानीय व्यापारियों, ट्रांसपोर्ट यूनियनों और उद्यमियों को स्थिर आय
  • ग्रामीण सड़कों व निर्माण कार्यों के लिए सस्ती सामग्री उपलब्ध

इससे उत्तराखंड का खनन क्षेत्र केवल राजस्व का स्रोत ही नहीं, बल्कि स्थानीय आर्थिक विकास का इंजन बन गया है।


केंद्र की सराहना और ₹100 करोड़ की प्रोत्साहन राशि का महत्व

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि उत्तराखंड लगातार सुधार लागू कर रहा है और उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर उसे SASCI योजना के तहत ₹100 करोड़ की अतिरिक्त सहायता मंजूर की गई है।

इस राशि का उपयोग राज्य निम्न क्षेत्रों में कर सकेगा—

  • खनन इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार
  • तकनीकी प्रणालियों को और उन्नत बनाना
  • सैटेलाइट और ड्रोन मॉनिटरिंग अपग्रेड
  • अवसंरचना विकास
  • सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना

मुख्यमंत्री धामी बोले — “पारदर्शिता और जवाबदेही की नीति से खनन क्षेत्र में दिख रहे सकारात्मक परिणाम”

मुख्यमंत्री धामी ने कहा:

“प्रदेश में खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ई-निलामी प्रणाली, सैटेलाइट आधारित निगरानी जैसे कई कदम उठाए गए हैं। सरकार पर्यावरण का ध्यान रखते हुए अवैध खनन पर लगाम कस रही है, जिसके सकारात्मक परिणाम स्पष्ट रूप से नजर आ रहे हैं।”

उन्होंने इस उपलब्धि को राज्य के अधिकारियों, खनन विभाग और सभी हितधारकों की संयुक्त मेहनत का परिणाम बताया।


खनन सुधारों में राष्ट्रीय अग्रणी—उत्तराखंड की पहचान और अधिक मजबूत

₹200 करोड़ की कुल केंद्रीय सहायता और लगातार सर्वोच्च रैंकिंग के साथ अब यह स्पष्ट हो गया है कि उत्तराखंड ने खनन सुधारों में देश में अपनी अलग पहचान बना ली है। पारदर्शी प्रणाली, तकनीक का व्यापक उपयोग, और नीति निर्माण में दक्षता ने इसे भारत के सबसे विश्वसनीय खनन मॉडलों में शामिल कर दिया है।

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