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उत्तराखंडफीचर्ड

उत्तराखंड: अब पंचायत स्तर पर बनेगा विकास का ब्लूप्रिंट, मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

The Hill India News
Last updated: February 2, 2026 12:51 pm
The Hill India News
Published: February 2, 2026
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देहरादून: उत्तराखंड के विकास की रफ्तार को भविष्योन्मुखी बनाने और ‘विकसित उत्तराखंड’ के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा रणनीतिक बदलाव किया है। सोमवार को सचिवालय स्थित वीर चंद्र सिंह गढ़वाली सभागार में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने स्पष्ट किया कि राज्य का विकास केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे जन-जन तक पहुँचाने के लिए उत्तराखंड विजन 2047 की तर्ज पर अब जिला और पंचायत स्तर पर विजन डॉक्यूमेंट तैयार किए जाएंगे।

Contents
पंचायत से जनपद तक: विकेंद्रीकृत विकास की नई रणनीतिजिला योजना: मार्च तक बैठकें पूरी करने का ‘डेडलाइन’कृषि और उद्यान विभाग में शक्तियों का विकेंद्रीकरणआजीविका और जन-समस्याओं पर फोकसमहिला विद्यालयों के लिए ‘मिशन मोड’ में कामबैठक में मौजूद रहे दिग्गज अधिकारी

पंचायत से जनपद तक: विकेंद्रीकृत विकास की नई रणनीति

मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय विजन डॉक्यूमेंट की तर्ज पर स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जिला, ब्लॉक (खण्ड) और ग्राम पंचायत स्तर पर रोडमैप तैयार किया जाए। उन्होंने कहा, “विकास की योजनाएं ऊपर से नीचे थोपने के बजाय नीचे से ऊपर (Bottom-up Approach) की ओर बढ़नी चाहिए।”

इसके लिए मुख्य सचिव ने अधिकारियों को शीघ्र ही कार्यशालाएं (Workshops) आयोजित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि पंचायत स्तर के प्रतिनिधि और अधिकारी विजन डॉक्यूमेंट की बारीकियों को समझ सकें और अपने क्षेत्र की विशिष्ट समस्याओं व संभावनाओं को इसमें शामिल कर सकें।

जिला योजना: मार्च तक बैठकें पूरी करने का ‘डेडलाइन’

बैठक में विकास कार्यों की सुस्त प्रक्रिया पर नाराजगी जताते हुए मुख्य सचिव ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि जिला योजना के अंतर्गत होने वाले कार्यों के लिए जिला योजना समितियों (DPC) की बैठकें मार्च 2026 तक अनिवार्य रूप से संपन्न करा ली जाएं।

मुख्य सचिव के प्रमुख निर्देश:

  • पूर्व तैयारी: योजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए अभी से ‘होमवर्क’ शुरू किया जाए।

  • एस्टीमेट प्रक्रिया: जिला योजना में शामिल संभावित कार्यों के तकनीकी पहलुओं और एस्टीमेट को पहले ही अंतिम रूप दे दिया जाए ताकि बजट जारी होते ही काम शुरू हो सके।

  • नियमों में सुधार: आमजन की समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए यदि जिला योजना की गाइडलाइंस या नियमों में संशोधन की आवश्यकता है, तो शासन को तत्काल प्रस्ताव भेजें।


कृषि और उद्यान विभाग में शक्तियों का विकेंद्रीकरण

पहाड़ी जनपदों में खेती और बागवानी को बढ़ावा देने के लिए मुख्य सचिव ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि उद्यान, कृषि और पशुपालन विभाग को जनपद स्तर पर खरीद (Procurement) के लिए शक्तियों का विकेंद्रीकरण करना चाहिए।

उन्होंने सुझाव दिया कि बार-बार की खरीद प्रक्रिया से बचने के लिए मूल्य निर्धारण की अवधि को एक वर्ष से बढ़ाकर 2 से 3 वर्ष करने के उपायों का परीक्षण किया जाए। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि विभागीय कार्यों में पारदर्शिता और गति भी आएगी।


आजीविका और जन-समस्याओं पर फोकस

राज्य सरकार का मुख्य फोकस पलायन रोकने और स्थानीय रोजगार सृजन पर है। मुख्य सचिव ने आजीविका से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा के लिए एक त्रिस्तरीय ढांचा निर्धारित किया है:

  1. जनपद स्तर: जिलाधिकारी हर महीने आजीविका योजनाओं की प्रगति देखेंगे।

  2. राज्य स्तर: मुख्य सचिव स्वयं हर तीन महीने (त्रैमासिक) में इन योजनाओं की समीक्षा करेंगे।

  3. जन-सुनवाई: ‘जन-जन की सरकार’ के माध्यम से प्राप्त शिकायतों के आधार पर नई योजनाएं तैयार की जाएंगी और उन्हें राज्य सेक्टर या डीएपी (DAP) में शामिल किया जाएगा।

महिला विद्यालयों के लिए ‘मिशन मोड’ में काम

स्वच्छता और महिला सशक्तीकरण के प्रति प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्य सचिव ने एक महत्वपूर्ण समय-सीमा निर्धारित की है। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रदेश के सभी राजकीय महिला विद्यालयों को 8 मार्च, 2026 (अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस) तक शौचालयों के निर्माण से पूरी तरह ‘सैचुरेट’ (आच्छादित) कर दिया जाए। केवल निर्माण ही नहीं, बल्कि उनकी नियमित सफाई व्यवस्था के लिए भी एक ठोस और टिकाऊ कार्ययोजना बनाने पर जोर दिया गया है।

बैठक में मौजूद रहे दिग्गज अधिकारी

इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगौली, डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम और चंद्रेश कुमार यादव जैसे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मौजूद रहे। साथ ही कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत और गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पाण्डेय सहित सभी 13 जिलों के जिलाधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और व्यक्तिगत माध्यम से अपनी रिपोर्ट पेश की।

मुख्य सचिव की इस मैराथन बैठक से यह स्पष्ट है कि उत्तराखंड सरकार अब ‘विजन 2047‘ को लेकर गंभीर है। पंचायत स्तर तक विजन डॉक्यूमेंट बनाने की यह पहल राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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