
देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड की शांत वादियों में हाल के दिनों में बढ़ती आपराधिक घटनाओं ने सियासी गलियारों में उबाल ला दिया है। राजधानी देहरादून में कानून व्यवस्था की चरमराती स्थिति को लेकर कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को कांग्रेस के कद्दावर नेता और चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत ने प्रदेश मुख्यालय में मीडिया से मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उनकी सरकार पर तीखे प्रहार किए। रावत ने दो टूक शब्दों में कहा कि प्रदेश में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब राजधानी की सड़कों पर मॉर्निंग वॉक करना भी सुरक्षित नहीं रह गया है।
ब्रिगेडियर मुकेश कुमार की मौत ने खड़े किए गंभीर सवाल
विवाद की मुख्य जड़ 30 मार्च की वह हृदयविदारक घटना है, जिसने पूरे देहरादून को हिलाकर रख दिया। राजपुर क्षेत्र के जोहड़ी गांव में मॉर्निंग वॉक पर निकले सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर मुकेश कुमार दो गुटों के बीच हुई फायरिंग की चपेट में आ गए और उनकी जान चली गई।
इस घटना का जिक्र करते हुए हरक सिंह रावत बेहद भावुक और आक्रामक नजर आए। उन्होंने कहा, “उत्तराखंड के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है कि एक अनुशासित फौजी, जो देश की सीमाओं की रक्षा कर सेवानिवृत्त हुआ, वह अपनी ही राजधानी की सड़कों पर सुरक्षित नहीं था। दो कारों में सवार बदमाश सरेआम गोलियां चलाते हैं और पुलिस उन्हें राज्य की सीमा पर पकड़ने में नाकाम रहती है।”
“ऑपरेशन प्रहार” पर उठाए सवाल: प्रहार या महज प्रचार?
ब्रिगेडियर की हत्या के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कड़े निर्देशों पर देहरादून पुलिस ने ‘ऑपरेशन प्रहार’ की शुरुआत की है। इस अभियान का उद्देश्य अपराधियों के भीतर कानून का खौफ पैदा करना है। हालांकि, हरक सिंह रावत ने इस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार के सारे ‘प्रहार’ अब तक विफल साबित हुए हैं।
रावत ने कहा कि केवल जिले का कप्तान (SSP) बदल देने से या लोकलुभावन नाम वाले अभियान चलाने से कानून व्यवस्था नहीं सुधरती। उन्होंने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा:
“मुख्यमंत्री अपनी रैलियों और चुनावी सभाओं में व्यस्त हैं। उन्हें उत्तराखंड की जनता की सुरक्षा से ज्यादा अपनी राजनीति की चिंता है। जब राजधानी में दिनदहाड़े हत्याएं हो रही हों, तब सत्ता का मौन रहना अपराधियों को संरक्षण देने जैसा है।”
माफिया राज और सत्ता के संरक्षण का आरोप
हरक सिंह रावत ने केवल कानून व्यवस्था ही नहीं, बल्कि राज्य में पनप रहे विभिन्न माफियाओं पर भी सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखंड में आज शराब माफिया, भू-माफिया और खनन माफिया पूरी तरह सक्रिय हैं। रावत के अनुसार, इन माफियाओं को सत्ता में बैठे प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण पुलिस और प्रशासन बौना साबित हो रहा है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि पिछले 5-6 महीनों का रिकॉर्ड उठाकर देख लिया जाए, तो देहरादून की स्थिति किसी बड़े मेट्रो शहर के ‘क्राइम हब’ जैसी लगने लगी है। लूट, हत्या और फायरिंग की घटनाएं अब आम हो चुकी हैं, जिसका सीधा खामियाजा प्रदेश की आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
चुस्त-दुरुस्त व्यवस्था का अभाव और पुलिस की विफलता
रावत ने चिंता जताते हुए कहा कि अपराधी वारदात को अंजाम देकर राज्य की सीमाओं से बाहर निकल जा रहे हैं और हमारी नाकेबंदी केवल कागजों तक सीमित है। उन्होंने इसे खुफिया तंत्र और पुलिसिंग की बड़ी विफलता करार दिया। हरक सिंह रावत का मानना है कि जब तक पुलिस को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त नहीं किया जाएगा और सीमाओं पर सख्त चौकसी नहीं बरती जाएगी, तब तक देवभूमि की शांति वापस नहीं आएगी।
सियासी मायने: चुनाव से पहले बढ़ता दबाव
हरक सिंह रावत का अचानक कांग्रेस मुख्यालय पहुंचना और कानून व्यवस्था पर इतना कड़ा रुख अख्तियार करना राज्य की भावी राजनीति के संकेत दे रहा है। चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष होने के नाते रावत इस मुद्दे को जन-आंदोलन बनाने की तैयारी में हैं। कांग्रेस इस मुद्दे के जरिए धामी सरकार की ‘सुरक्षित उत्तराखंड’ वाली छवि पर डेंट मारना चाहती है।
उत्तराखंड कानून व्यवस्था पर हरक सिंह रावत के इन बयानों ने शासन-प्रशासन के भीतर हलचल पैदा कर दी है। जनता अब यह देख रही है कि क्या ‘ऑपरेशन प्रहार’ वाकई अपराधियों पर लगाम लगा पाएगा या फिर विपक्ष के ये आरोप सरकार की घेराबंदी में सफल होंगे।
फिलहाल, सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर मुकेश कुमार के परिवार के साथ-साथ पूरी राजधानी न्याय की उम्मीद लगाए बैठी है। हरक सिंह रावत ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कानून व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक सरकार को चैन से बैठने नहीं देगी।



