देहरादून: उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने शासन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने अपने कैबिनेट मंत्रियों को विभिन्न जिलों के ‘जिला प्रभारी’ के रूप में नई जिम्मेदारियां सौंप दी हैं। राजभवन से औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद, कुल 11 मंत्रियों को जिला नियोजन एवं अनुश्रवण समिति (District Planning and Monitoring Committee) तथा विकास कार्यों के पर्यवेक्षण की कमान दी गई है।
यह फेरबदल न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि आगामी चारधाम यात्रा और 2027 के अर्धकुंभ जैसे बड़े आयोजनों को देखते हुए रणनीतिक रूप से भी बेहद अहम माना जा रहा है। राज्यपाल की अनुमति के बाद अब ये मंत्री आवंटित जिलों में विकास योजनाओं की गति और गुणवत्ता की सीधी निगरानी करेंगे।
सतपाल महाराज को हरिद्वार की ‘विराट’ जिम्मेदारी: 2027 अर्धकुंभ पर नजर
कैबिनेट के सबसे वरिष्ठ मंत्रियों में से एक सतपाल महाराज को धर्मनगरी हरिद्वार का जिला प्रभारी बनाया गया है। यह नियुक्ति कई मायनों में खास है। हरिद्वार में साल 2027 में अर्धकुंभ का भव्य आयोजन होना है, जिसमें करोड़ों श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है।
महाराज के पास पहले से ही लोक निर्माण (PWD), पर्यटन, संस्कृति और सिंचाई जैसे भारी-भरकम मंत्रालय हैं। हरिद्वार का प्रभारी बनने के बाद, उन पर अर्धकुंभ से जुड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को समय पर पूरा करने और पर्यटन सुविधाओं को विश्वस्तरीय बनाने का दोहरा दबाव होगा। भारत-नेपाल नदी परियोजनाओं का अनुभव भी हरिद्वार की सिंचाई और जल प्रबंधन व्यवस्था में उनके काम आएगा।
सुबोध उनियाल और गणेश जोशी: राजधानी और चारधाम के द्वार पर पहरा
देहरादून, जो राज्य की सत्ता का केंद्र है, उसकी जिम्मेदारी कद्दावर मंत्री सुबोध उनियाल को दी गई है। कैबिनेट विस्तार के बाद ‘हैवीवेट’ बनकर उभरे उनियाल अब देहरादून जिले के विकास कार्यों और नियोजन समिति का नेतृत्व करेंगे। उनके पास वन और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभाग भी हैं, जो राजधानी की बढ़ती आबादी और स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रबंधन में सहायक होंगे।
वहीं, गणेश जोशी को टिहरी गढ़वाल और रुद्रप्रयाग जैसे दो महत्वपूर्ण जिलों का प्रभार मिला है। अगले महीने से शुरू हो रही चारधाम यात्रा के मद्देनजर रुद्रप्रयाग की जिम्मेदारी अत्यंत संवेदनशील है, क्योंकि केदारनाथ धाम इसी जिले में स्थित है। कृषि और सैनिक कल्याण मंत्री होने के नाते जोशी का फोकस इन पहाड़ी क्षेत्रों में स्वरोजगार और यात्रा प्रबंधन पर रहेगा।

डॉ. धन सिंह रावत और रेखा आर्या: कुमाऊं और सीमांत क्षेत्रों पर फोकस
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत को अल्मोड़ा जिले का प्रभारी बनाया गया है। हालांकि हालिया कैबिनेट फेरबदल में उनसे स्वास्थ्य विभाग वापस ले लिया गया था, लेकिन सहकारिता और उच्च शिक्षा जैसे विभागों के साथ अल्मोड़ा में शैक्षिक हब विकसित करना उनकी प्राथमिकता होगी।
दूसरी ओर, रेखा आर्या के प्रभार में बड़ा बदलाव किया गया है। उन्हें नैनीताल से हटाकर अब सीमांत जिले पिथौरागढ़ की कमान सौंपी गई है। महिला सशक्तिकरण और खेल मंत्री होने के नाते, नेपाल और चीन सीमा से सटे इस जिले में महिला समूहों को सशक्त करना और खेल प्रतिभाओं को निखारना उनकी मुख्य चुनौती होगी। नैनीताल की कमान अब खजान दास को दी गई है, जो 15 साल बाद कैबिनेट में लौटे हैं। समाज कल्याण मंत्री के रूप में वे नैनीताल के पर्यटन और सामाजिक ढांचे को संतुलित करने का प्रयास करेंगे।
नए मंत्रियों की ‘अग्निपरीक्षा’: भरत चौधरी, प्रदीप बत्रा और राम सिंह कैड़ा
हाल ही में कैबिनेट में शामिल हुए नए चेहरों को भी धामी सरकार ने चुनौतीपूर्ण जिलों की जिम्मेदारी दी है:
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भरत चौधरी (चमोली और चंपावत): रुद्रप्रयाग के विधायक भरत चौधरी को चमोली (बदरीनाथ धाम का जिला) और मुख्यमंत्री के अपने निर्वाचन क्षेत्र चंपावत का प्रभार दिया गया है। ग्राम्य विकास मंत्री के रूप में उन पर इन जिलों में पलायन रोकने की बड़ी जिम्मेदारी है।
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प्रदीप बत्रा (ऊधम सिंह नगर): रुड़की विधायक बत्रा को तराई के सबसे बड़े औद्योगिक और कृषि प्रधान जिले ऊधम सिंह नगर का जिम्मा मिला है। परिवहन और आईटी मंत्री के रूप में वे यहाँ के लॉजिस्टिक्स और स्मार्ट गवर्नेंस को गति देंगे।
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राम सिंह कैड़ा (बागेश्वर): पहली बार मंत्री बने कैड़ा को बागेश्वर की कमान मिली है। शहरी विकास और पर्यावरण मंत्री होने के नाते वे बागेश्वर के नगरीय निकायों के सौंदर्यीकरण और जलागम प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
मदन कौशिक को पौड़ी और सौरभ बहुगुणा को उत्तरकाशी
हरिद्वार विधायक मदन कौशिक को वीवीआईपी जिले पौड़ी गढ़वाल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पौड़ी राज्य की राजनीति का केंद्र रहा है और यहाँ से कई मुख्यमंत्री निकले हैं। आपदा प्रबंधन और पंचायती राज मंत्री के रूप में कौशिक को यहाँ की भौगोलिक चुनौतियों और ग्रामीण विकास के बीच तालमेल बिठाना होगा। वहीं, सौरभ बहुगुणा अब उत्तरकाशी के प्रभारी होंगे, जहाँ यमुनोत्री और गंगोत्री धाम स्थित हैं।
सुशासन की दिशा में एक ठोस कदम
Uttarakhand District In-charge Ministers 2026 की यह नई सूची स्पष्ट करती है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने ‘विकल्प रहित संकल्प’ के तहत जिलों में जवाबदेही तय करना चाहते हैं। प्रभारियों की नियुक्ति से न केवल जिलों की समस्याओं का समाधान देहरादून के गलियारों में जल्दी होगा, बल्कि जिला योजनाओं के बजट का सही इस्तेमाल भी सुनिश्चित हो सकेगा।
अब देखना यह होगा कि ये ‘प्रभारी मंत्री’ अपने-अपने जिलों की विकास दर को कितनी गति दे पाते हैं, विशेषकर तब जब राज्य 2027 के चुनावी मोड की ओर धीरे-धीरे बढ़ रहा है।



