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उत्तराखंड के शहरों का बदलेगा स्वरूप: केंद्र ने शहरी सुधारों के लिए ₹264.50 करोड़ की विशेष सहायता को दी मंजूरी

देहरादून | मुख्य संवाददाता: उत्तराखंड में ‘स्मार्ट और नियोजित’ शहरीकरण की दिशा में राज्य सरकार को केंद्र से एक बड़ी सफलता हासिल हुई है। केंद्र सरकार ने उत्तराखंड में शहरी भूमि एवं नियोजन सुधारों (Urban Land and Planning Reforms) को गति देने के लिए ₹264.50 करोड़ की विशेष वित्तीय सहायता स्वीकृत की है। यह सहायता राशि ‘पूंजीगत निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता योजना’ (SASCI) 2025–26 के अंतर्गत प्रदान की गई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के विजन को आगे बढ़ाते हुए, केंद्र ने उत्तराखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों और शहरी दबाव को देखते हुए इस प्रस्ताव को तत्काल मंजूरी दी है। यह पूरी राशि एकमुश्त किस्त के रूप में राज्य को जारी कर दी गई है।


SASCI योजना: शहरी सुधारों को मिलेगा नया आयाम

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा संचालित SASCI (Special Assistance to States for Capital Investment) योजना का मुख्य उद्देश्य राज्यों को उन परियोजनाओं के लिए दीर्घकालिक ब्याज मुक्त ऋण प्रदान करना है, जो बुनियादी ढांचे में गुणात्मक सुधार लाती हैं।

सुधारों के मुख्य बिंदु:

  1. नियोजित शहरीकरण: इस राशि का उपयोग शहरों के मास्टर प्लान तैयार करने और उनके कार्यान्वयन में किया जाएगा।

  2. आधुनिक भूमि प्रबंधन: राज्य में भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण और पारदर्शी भूमि नियोजन प्रणालियों को विकसित करने पर जोर दिया जाएगा।

  3. पूंजीगत परियोजनाएं: उत्तराखंड के उभरते हुए शहरी क्षेत्रों में सीवरेज, ड्रेनेज और स्मार्ट ट्रांसपोर्ट जैसी परियोजनाओं को वित्तीय बल मिलेगा।

आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय की अनुशंसा पर, राज्य सरकार ने पीएफएमएस (PFMS) पोर्टल के माध्यम से अपना विस्तृत प्रस्ताव केंद्र को भेजा था। प्रस्ताव की तकनीकी बारीकियों और राज्य की आवश्यकता को देखते हुए सक्षम प्राधिकारी ने इस भारी-भरकम राशि पर मुहर लगा दी है।


मुख्यमंत्री धामी ने जताया केंद्र का आभार

इस महत्वपूर्ण वित्तीय स्वीकृति पर खुशी जाहिर करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह सहायता राज्य के शहरी ढांचे को आधुनिक बनाने में उत्प्रेरक का काम करेगी।

मुख्यमंत्री का संबोधन:

“प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में उत्तराखंड के विकास को निरंतर नई ऊंचाई मिल रही है। यह ₹264.50 करोड़ की राशि हमारे शहरों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने में मदद करेगी। हम शहरी क्षेत्रों में बेहतर नियोजन, सुव्यवस्थित विकास और जनसुविधाओं के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस सहायता से संतुलित और टिकाऊ (Sustainable) विकास को गति मिलेगी।”


क्या होगा उत्तराखंड के शहरों पर असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य के लिए शहरी नियोजन (Urban Planning) एक बड़ी चुनौती है। पर्यटन के बढ़ते दबाव और लैंडस्लाइड जैसी प्राकृतिक आपदाओं के बीच शहरों का वैज्ञानिक तरीके से बसना अनिवार्य है।

1. आधुनिक भूमि प्रबंधन प्रणाली

इस बजट के माध्यम से राज्य सरकार भू-अभिलेखों के सुदृढ़ीकरण और नियोजन प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर काम करेगी। इससे आम जनता को नक्शा पास कराने और भूमि संबंधी कार्यों में होने वाली देरी से निजात मिलेगी।

2. मजबूत आधारभूत ढांचा

प्रदेश के प्रमुख शहरों जैसे देहरादून, हल्द्वानी, हरिद्वार और रुद्रपुर में जनसंख्या का दबाव तेजी से बढ़ रहा है। केंद्र से मिली इस राशि का उपयोग ऐसी परियोजनाओं में होगा जो आगामी 25-30 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं।

3. रोजगार और आर्थिकी को बल

जब बुनियादी ढांचे में निवेश होता है, तो उससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित होता है, बल्कि व्यापार और पर्यटन के लिए भी बेहतर माहौल तैयार होता है। नियोजित शहर निवेशकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं, जिससे राज्य की जीडीपी (GSDP) में भी वृद्धि होती है।


डिजिटल और नियोजित विकास की ओर बढ़ते कदम

केंद्र सरकार द्वारा एकमुश्त राशि जारी किया जाना यह दर्शाता है कि उत्तराखंड सरकार की कार्यप्रणाली पर केंद्र का अटूट विश्वास है। ‘देवभूमि’ के शहरों को आधुनिक बनाने और वहाँ के निवासियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं देने के संकल्प को इस वित्तीय सहायता से नई शक्ति मिली है। अब राज्य सरकार का फोकस इन सुधारों को धरातल पर उतारने और निर्धारित समय सीमा के भीतर परियोजनाओं को पूर्ण करने पर होगा।

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