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विकास की रफ्तार: धामी सरकार ने 7 हजार किमी सड़कें कीं ‘गड्डा मुक्त’, पिरूल और रोपवे परियोजनाओं से बदली उत्तराखंड की तस्वीर

The Hill India News
Last updated: March 10, 2026 1:47 pm
The Hill India News
Published: March 10, 2026
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देहरादून: उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार के दूसरे कार्यकाल के चार वर्ष पूरे होने की ओर अग्रसर हैं। इस अवधि में राज्य ने बुनियादी ढांचे के विकास, धार्मिक पर्यटन की सुगमता और पर्यावरण संरक्षण के मोर्चे पर नए प्रतिमान स्थापित किए हैं। मंगलवार को विधानसभा के बजट सत्र के दौरान धामी सरकार के मंत्रियों ने सदन के पटल पर जो आंकड़े रखे, वे राज्य की बदलती तस्वीर की तस्दीक करते हैं। प्रदेश में जहाँ 7000 किलोमीटर से अधिक सड़कें गड्डा मुक्त की जा चुकी हैं, वहीं वनाग्नि रोकने के लिए ‘पिरूल’ खरीद की अभिनव योजना ने ग्रामीणों की आर्थिकी को भी मजबूती दी है।

Contents
1. बुनियादी ढांचे में सुधार: 7000 किमी सड़कें अब गड्डा मुक्त2. पंचायती राज: 819 पंचायत भवनों का नवनिर्माण3. रोपवे कनेक्टिविटी: पर्यटन और तीर्थाटन को नए पंख4. वनाग्नि रोकथाम: पिरूल बना आर्थिकी का जरिया‘विकसित उत्तराखंड’ की ओर बढ़ते कदमप्रमुख उपलब्धियां एक नज़र में:

1. बुनियादी ढांचे में सुधार: 7000 किमी सड़कें अब गड्डा मुक्त

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ‘सख्त निर्देश और प्रभावी निगरानी’ का असर अब प्रदेश की सड़कों पर दिखने लगा है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, नवंबर 2025 के प्रथम सप्ताह तक राज्य की 7000 किलोमीटर से अधिक लंबी सड़कों को गड्डा मुक्त कर दिया गया है।

  • दो चरणों में अभियान: विभाग ने रणनीति के तहत वर्ष 2025-26 में मानसून से पहले 3134 किमी सड़कों की मरम्मत की। वहीं, मानसून के बाद 10 नवंबर 2025 तक 4149.17 किमी लंबी सड़कों को सुधारा गया।

  • हरिद्वार में रिकॉर्ड कार्य: मैदानी जिलों में भी कार्य की गति तेज रही है, जहाँ अकेले हरिद्वार जनपद में 313 किमी से अधिक सड़कों का कायाकल्प किया गया।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सुगम सड़कें न केवल चारधाम यात्रा को सुलभ बनाती हैं, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों के लिए भी लाइफलाइन का काम करती हैं।


2. पंचायती राज: 819 पंचायत भवनों का नवनिर्माण

लोकतंत्र की सबसे छोटी इकाई ‘ग्राम पंचायत’ को सशक्त करने की दिशा में धामी सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। प्रदेश के कुल 5867 पंचायत भवनों में से 1134 भवन लंबे समय से जर्जर स्थिति में थे।

पंचायती राज मंत्री सतपाल महाराज ने सदन को बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर चलाए गए विशेष अभियान के तहत बीते चार वर्षों में 819 पंचायत भवनों का निर्माण एवं पुनर्निर्माण पूरा कर लिया गया है। शेष भवनों पर भी कार्य युद्धस्तर पर जारी है, ताकि ग्रामीणों को सरकारी सेवाओं का लाभ उनके गाँव में ही बेहतर वातावरण में मिल सके।


3. रोपवे कनेक्टिविटी: पर्यटन और तीर्थाटन को नए पंख

पहाड़ी राज्य होने के नाते उत्तराखंड में ‘लास्ट माइल कनेक्टिविटी’ के लिए रोपवे (Cable Car) परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। पर्यटन मंत्री ने विधानसभा में अपडेट साझा करते हुए बताया कि:

  • सफल संचालन: कद्दूखाल से सुरकंडा देवी मंदिर के लिए पीपीपी मोड में रोपवे का संचालन शुरू हो चुका है।

  • निर्माणाधीन परियोजनाएं: चम्पावत में ठुलीगाड़ से पूर्णागिरी और उत्तरकाशी में जानकी चट्टी से यमुनोत्री मंदिर तक रोपवे का काम तेजी से चल रहा है।

  • भविष्य की योजनाएं: विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम (गौरीकुंड से केदारनाथ) और सिखों के पवित्र तीर्थ हेमकुंड साहिब (गोविंदघाट से हेमकुंड) के लिए भी निर्माण प्रक्रिया गतिमान है।


4. वनाग्नि रोकथाम: पिरूल बना आर्थिकी का जरिया

उत्तराखंड के जंगलों के लिए अभिशाप माने जाने वाले ‘पिरूल’ (चीड़ की सूखी पत्तियां) को अब धामी सरकार ने सुरक्षा कवच में बदल दिया है। वनाग्नि को रोकने के लिए सरकार ने ग्रामीणों से भारी मात्रा में पिरूल खरीद शुरू की है।

  • 5.42 करोड़ की खरीद: सरकार ने एक वर्ष के भीतर ग्रामीणों से ₹5.42 करोड़ का पिरूल खरीदा है। वर्ष 2025 में 5532 टन पिरूल एकत्रित किया गया, जिसे अब बढ़ाकर 8555 टन करने का लक्ष्य रखा गया है।

  • फायर वाचर्स को सुरक्षा: इतिहास में पहली बार, 5600 फायर वाचर्स को 10 लाख रुपये का सामूहिक बीमा कवर दिया गया है। यह कदम उनके मनोबल को बढ़ाने और विषम परिस्थितियों में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

  • जनजागरूकता और प्रोत्साहन: ग्राम प्रधानों की अध्यक्षता में ‘फॉरेस्ट फायर मैनेजमेंट कमेटी’ का गठन किया गया है। बेहतर कार्य करने वाली ग्राम पंचायतों को ₹30,000 की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। वन मंत्री सुबोध उनियाल के अनुसार, अब तक 1239 जागरूकता कैंप आयोजित किए जा चुके हैं।


‘विकसित उत्तराखंड’ की ओर बढ़ते कदम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ‘प्रो-एक्टिव गवर्नेंस’ के मॉडल पर काम कर रही है। चाहे वह सड़कों से गड्ढे हटाना हो या जंगलों को आग से बचाना, हर मोर्चे पर तकनीक और जनभागीदारी का समन्वय दिख रहा है। 819 पंचायत भवनों का सुदृढ़ीकरण और रोपवे परियोजनाओं का विस्तार यह स्पष्ट करता है कि सरकार का विजन 2030 तक उत्तराखंड को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करना है।


प्रमुख उपलब्धियां एक नज़र में:

क्षेत्र उपलब्धि/आंकड़ा
सड़कें 7000+ किमी गड्डा मुक्त
पंचायत भवन 819 का पुनर्निर्माण पूर्ण
पिरूल खरीद ₹5.42 करोड़ का भुगतान
सुरक्षा फायर वाचर्स हेतु 10 लाख का बीमा
कनेक्टिविटी 5 प्रमुख रोपवे प्रोजेक्ट्स पर काम जारी

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