
देहरादून। उत्तराखंड में मानसून और प्राकृतिक आपदाओं की चुनौतियों से निपटने के लिए धामी सरकार ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। बुधवार को सचिवालय में मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में आयोजित ‘राज्य कार्यकारिणी समिति’ की महत्वपूर्ण बैठक में राज्य के विभिन्न संवेदनशील इलाकों के लिए करोड़ों रुपये के सुरक्षा कार्यों को मंजूरी दी गई। इस बैठक में राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) और राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि के अंतर्गत प्राप्त प्रस्तावों पर गहन मंथन के बाद शासन ने विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है।
पारदर्शी प्रक्रिया और सख्त निर्देश
बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने स्पष्ट किया कि आपदा राहत और बचाव से संबंधित किसी भी प्रस्ताव में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि भविष्य में समिति के समक्ष आने वाले सभी प्रस्ताव ‘जनपद स्तरीय समिति’ की ठोस सिफारिश के बाद जिलाधिकारी के माध्यम से ही प्रेषित किए जाएं।
नदियों के प्रबंधन को लेकर एक बड़ा नीतिगत फैसला लेते हुए मुख्य सचिव ने सिंचाई विभाग को निर्देशित किया कि वे नदियों की ड्रेजिंग और माइनिंग के लिए शीघ्र ही एक नई और प्रभावी एसओपी (SOP) जारी करें। उन्होंने जोर दिया कि बाढ़ सुरक्षा से संबंधित प्रस्तावों को सिंचाई विभाग की तकनीकी समिति (TAC) के परीक्षण के बाद ही राज्य कार्यकारिणी समिति के सामने पेश किया जाए, ताकि कार्यों की गुणवत्ता और उपयोगिता सुनिश्चित हो सके।
नदियों का चैनलाइजेशन और वैज्ञानिक समाधान
उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए मुख्य सचिव ने एक दूरगामी निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जिन नदियों के कारण हर साल कटाव की समस्या पैदा होती है और बार-बार मरम्मत कार्य करना पड़ता है, वहां ‘तदर्थ’ (Ad-hoc) कार्यों के बजाय स्थायी समाधान निकाला जाए। ऐसी नदियों को चिन्हित कर उनके ‘चैनलाईजेशन’ (Channelization) की विस्तृत योजना तैयार की जाएगी। विशेष रूप से उधम सिंह नगर के सितारगंज में बैगुल नदी की उग्रता को देखते हुए उन्होंने इसके विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन के निर्देश दिए हैं।
जनपदों के लिए सौगातों की बौछार
बैठक के दौरान कुमाऊं से लेकर गढ़वाल तक के विभिन्न जनपदों के लिए भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया। स्वीकृत किए गए मुख्य कार्यों का विवरण निम्नलिखित है:
1. नैनीताल और पिथौरागढ़: भूस्खलन से मिलेगी मुक्ति नैनीताल के ऐतिहासिक चार्टन लॉज क्षेत्र को भूस्खलन से बचाने के लिए ₹699.98 लाख की भारी राशि स्वीकृत की गई है। वहीं, सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के धारचूला स्थित खोटिला लैंड, घटधार और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रेनेज और भूस्खलन सुरक्षा के लिए ₹3840.78 लाख के बड़े प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली है।
2. हरिद्वार और अल्मोड़ा: जल निकासी पर जोर धर्मनगरी हरिद्वार में मनसा देवी हिल बाईपास रोड पर जल भराव और भूस्खलन एक बड़ी समस्या रही है। इसके समाधान के लिए ₹4124.83 लाख के प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई। अल्मोड़ा के दुधौली बैण्ड क्षेत्र में मार्ग सुरक्षात्मक कार्यों के लिए भी बजट आवंटित किया गया है।
3. उत्तरकाशी: सीमांत क्षेत्रों की सुरक्षा उत्तरकाशी जिले के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं, जिनमें धराली झूला पुल का सुरक्षा कार्य (₹147.13 लाख), पुरोला टैक्सी स्टैंड के पास भूस्खलन रोकथाम (₹128.37 लाख) और प्रसिद्ध हर्षिल-मुखवा मोटर मार्ग की सुरक्षा (₹472.00 लाख) शामिल है।
4. तराई क्षेत्र: बाढ़ से मिलेगी राहत सितारगंज और जसपुर में बाढ़ सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। बैगुल नदी के तटवर्ती क्षेत्रों जैसे रुद्रपुर और बीसर्क्वाटर के लिए लगभग ₹300 लाख और जसपुर की फीका नदी से हजीरों गांव को बचाने के लिए ₹419.82 लाख की योजना स्वीकृत हुई है।
5. राजधानी देहरादून: शहरी बाढ़ का समाधान देहरादून के रायपुर, जोगीवाला, बद्रीपुर और डोईवाला क्षेत्रों में दुल्हनी व टोंस नदी के किनारे स्थित बस्तियों को बाढ़ से बचाने के लिए करोड़ों के सुरक्षात्मक दीवार निर्माण कार्यों को स्वीकृति दी गई है। जलवायु टावर और स्वर्गाश्रम जैसे क्षेत्रों को भी इसमें सुरक्षित किया जाएगा।
वित्तीय सुदृढ़ीकरण और प्रशासनिक उपस्थिति
बैठक में राज्य आपदा मोचन निधि के अंतर्गत विभिन्न मदों में अतिरिक्त धनराशि के आवंटन हेतु कुल ₹34.00 करोड़ की कार्योत्तर वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई। यह राशि आपदा प्रबंधन तंत्र को आधुनिक उपकरणों और त्वरित राहत कार्यों के लिए मजबूती प्रदान करेगी।
इस उच्चस्तरीय बैठक में सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, सचिव विनोद कुमार सुमन सहित सिंचाई, लोक निर्माण विभाग और आपदा प्रबंधन के तमाम वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड आपदा न्यूनीकरण बैठक 2026 के ये निर्णय आने वाले मानसून सत्र में जान-माल के नुकसान को कम करने में निर्णायक साबित होंगे।



