By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: नई दिल्ली: “अलविदा मेरे लाल…” 13 साल की उम्मीद, 13 दिनों में टूटी—मां-बाप की आंखों के सामने बुझ गई हरीश राणा की जिंदगी
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > दिल्ली > नई दिल्ली: “अलविदा मेरे लाल…” 13 साल की उम्मीद, 13 दिनों में टूटी—मां-बाप की आंखों के सामने बुझ गई हरीश राणा की जिंदगी
दिल्लीफीचर्ड

नई दिल्ली: “अलविदा मेरे लाल…” 13 साल की उम्मीद, 13 दिनों में टूटी—मां-बाप की आंखों के सामने बुझ गई हरीश राणा की जिंदगी

Rajesh Dabral
Last updated: March 25, 2026 8:12 am
Rajesh Dabral
Published: March 25, 2026
Share
SHARE

नई दिल्ली/गाजियाबाद: एक बेटे की जिंदगी बचाने के लिए 13 साल तक हर संभव प्रयास करने वाले माता-पिता को आखिरकार उसी बेटे को अलविदा कहना पड़ा। गाजियाबाद के हरीश राणा की कहानी केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि मानवीय धैर्य, त्याग और असहनीय पीड़ा की ऐसी मिसाल है, जिसने पूरे देश को भावुक कर दिया है।

हरीश राणा वर्ष 2013 में चंडीगढ़ स्थित एक हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए थे। इस हादसे के बाद वे परमानेंट कोमा में चले गए। उस दिन के बाद से उनका जीवन पूरी तरह मशीनों पर निर्भर हो गया। जहां आमतौर पर ऐसे मामलों में उम्मीदें जल्दी टूट जाती हैं, वहीं हरीश के माता-पिता ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने घर को ही अस्पताल में बदल दिया और दिन-रात बेटे की सेवा में जुटे रहे।

हरीश के पिता अशोक राणा, जो सेना में सूबेदार रह चुके हैं, ने अनुशासन और धैर्य के साथ बेटे की देखभाल की। वे रोज सुबह 4:30 बजे उठकर हरीश की फिजियोथेरेपी करते थे, इस उम्मीद में कि शायद किसी दिन उनके बेटे के शरीर में हलचल लौट आए। वहीं उनकी मां निर्मला देवी ने एक नर्स और मां दोनों की भूमिका निभाई। उन्होंने 13 साल तक बेटे को एक छोटे बच्चे की तरह संभाला—खाना खिलाना, साफ-सफाई रखना और संक्रमण से बचाना उनकी दिनचर्या बन गई थी।

इस लंबे संघर्ष में परिवार ने अपनी आर्थिक स्थिति भी दांव पर लगा दी। इलाज और देखभाल के लिए उन्होंने दिल्ली का अपना करोड़ों का घर बेच दिया और गाजियाबाद की एक छोटी सोसाइटी में शिफ्ट हो गए। पेंशन और जमा पूंजी का बड़ा हिस्सा मेडिकल उपकरणों और दवाइयों पर खर्च हो गया, लेकिन उन्होंने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी।

समय के साथ हरीश की स्थिति और बिगड़ती गई। उनके शरीर पर गहरे जख्म (बेडसोर) हो गए और पीड़ा असहनीय हो गई। जब डॉक्टरों ने भी जवाब दे दिया, तब परिवार ने भारी मन से इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) के लिए कानूनी रास्ता अपनाया। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद भी यह निर्णय उनके लिए आसान नहीं था।

आखिरी 13 दिन परिवार के लिए सबसे कठिन साबित हुए। एक ओर बेटे के प्रति मोह था, तो दूसरी ओर उसकी पीड़ा से मुक्ति दिलाने की विवशता। माता-पिता घंटों उसके पास बैठते, उसे देखते और हर गुजरते पल के साथ अपने जिगर के टुकड़े को दूर जाते महसूस करते रहे।

हरीश के छोटे भाई आशीष राणा ने भी इस कठिन समय में परिवार का पूरा साथ दिया। उन्होंने आर्थिक और भावनात्मक दोनों तरह से घर को संभाला और अपनी खुशियों को पीछे छोड़ दिया।

जब आखिरकार हरीश ने अंतिम सांस ली, तो यह पल परिवार के लिए एक साथ दुख और सुकून दोनों लेकर आया। एक ओर बेटे को खोने का गहरा दर्द था, तो दूसरी ओर इस बात की तसल्ली कि अब वह असहनीय पीड़ा से मुक्त हो गया है।

हरीश राणा की कहानी केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि उस सवाल की भी है जो समाज और न्याय व्यवस्था के सामने खड़ा है—क्या असहनीय पीड़ा में जीना ही जीवन है, या गरिमामय मृत्यु भी एक अधिकार होना चाहिए? इस घटना ने इच्छामृत्यु जैसे संवेदनशील मुद्दे पर नई बहस को जन्म दिया है।

अंततः, यह कहानी एक पिता की 13 साल की तपस्या, एक मां की असीम ममता और एक परिवार के अटूट प्रेम की है—जो यह साबित करती है कि इंसान दर्द में भी उम्मीद का दामन नहीं छोड़ता, भले ही अंत में उसे अपने सबसे बड़े सहारे को ही विदा क्यों न करना पड़े।

You Might Also Like

हरेला पर्व पर उत्तराखंड बनाएगा नया रिकॉर्ड, एक दिन में लगेंगे 5 लाख पौधे
Big Breaking: फिर मंडराया ‘निपाह वायरस’ का खतरा, केरल में दो लोगों की मौत, अलर्ट जारी
Uttarakhand Weather Update: पूरे प्रदेश में झमाझम बारिश, पहाड़ों पर जमी बर्फ की चादर; जानें कब थमेगा यह दौर
नई दिल्ली : कृषि क्षेत्र में श्रेष्ठता हासिल करने के लिए किसान से लेकर इंडस्ट्रीज सब मिलकर काम करें- तोमर
Uttarakhand Big Breaking: युवा क्रिकेटर सुमित जुयाल को 10 साल कैद की सजा, पढ़े पूरी खबर…
TAGGED:Family TragedyHarish RanaSad NewsTragic Death
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
उत्तराखंडफीचर्ड

निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर नैनीताल जिला प्रशासन का बड़ा प्रहार; डीएम का सख्त आदेश- अतिरिक्त शुल्क लौटाएं या एडजस्ट करें, उल्लंघन पर 5 लाख तक जुर्माना

The Hill India News
The Hill India News
June 27, 2026
अंगदान मानव सेवा का सर्वोच्च व पुनीत कार्य, जनभागीदारी से इसे राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन बनाना आवश्यक: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा
फीफा वर्ल्ड कप 2026: डेम्बेले की खौफनाक हैट्रिक से फ्रांस ने नॉर्वे को उड़ाया, सेनेगल ने इराक को 5-0 से रौंदकर जिंदा रखीं उम्मीदें
अलीगढ़ में AIMIM नेता का खौफनाक एलान, BJP नेता नाजिया इलाही की जुबान काटने वाले को 1 लाख का इनाम
रुड़की में मामा की बेटी से लव मैरिज की खौफनाक सजा, सगे मामा ने बीच बाजार भांजे को चाकुओं से गोदकर मार डाला
मध्य भारत को पार कर यूपी-उत्तराखंड की ओर बढ़ा मानसून, मुंबई में भारी आफत का ‘ऑरेंज अलर्ट’, दिल्ली-NCR में भी बदलेगा मौसम
वेनेजुएला में कुछ ही मिनटों में आए दो शक्तिशाली भूकंप, राजधानी काराकास में इमारतें जमींदोज, सुनामी का हाई अलर्ट
हरिद्वार में बड़ा हादसा टला: BHEL क्षेत्र में नर्सिंग छात्राओं से भरी कॉलेज बस का CNG सिलेंडर लीक, मची अफरा-तफरी
डिजिटल गवर्नेंस की ओर देहरादून के बढ़ते कदम: सरकारी दफ्तरों को पूरी तरह ‘पेपरलेस’ बनाने की तैयारी, अफसरों को मिला ई-ऑफिस का व्यावहारिक पाठ
उत्तराखंड में हाई अलर्ट: चारधाम समेत धार्मिक स्थलों को बम से उड़ाने की धमकी, अभेद्य किले में तब्दील हुए केदारनाथ-बदरीनाथ; सुरक्षा एजेंसियां मुस्तैद
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?