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उत्तराखंड: आर्थिक चुनौतियों के बीच मंत्रियों के यात्रा भत्ते में 50% का इजाफा, अब हर महीने मिलेंगे 90 हजार रुपये

देहरादून | 29 जनवरी, 2026 उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने नए साल की शुरुआत के साथ ही मंत्रियों के लिए अपने खजाने के द्वार खोल दिए हैं। राज्य सरकार ने मंत्रियों को मिलने वाले मासिक यात्रा भत्ते (Traveling Allowance) में भारी बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया है। शासन द्वारा जारी ताजा अधिसूचना के अनुसार, मंत्रियों का यात्रा भत्ता अब 60,000 रुपये से बढ़ाकर 90,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है।

एक तरफ जहां राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर शासन स्तर पर चिंता जताई जा रही है, वहीं दूसरी ओर मंत्रियों की सुविधाओं में किए गए इस इजाफे ने राजनीतिक गलियारों और आम जनता के बीच चर्चा छेड़ दी है।

अधिसूचना जारी: नियमावली में हुआ बड़ा संशोधन

उत्तराखंड शासन के मंत्रि परिषद अनुभाग द्वारा गुरुवार, 29 जनवरी 2026 को इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना जारी की गई। इस निर्णय को कानूनी रूप देने के लिए सरकार ने ‘उत्तर प्रदेश मंत्री (यात्रा भत्ता) नियमावली 1997’ में संशोधन किया है। अब इसे ‘उत्तर प्रदेश मंत्री (यात्रा भत्ता) (संशोधन) नियमावली 2026’ के नाम से जाना जाएगा।

संशोधन के तहत नियमावली के ‘नियम 4’ में बदलाव किया गया है। इस बदलाव का सीधा लाभ मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्रियों, राज्य मंत्रियों और उप मंत्रियों को मिलेगा। अधिसूचना के स्पष्ट निर्देश हैं कि राज्य के भीतर या देश के किसी भी हिस्से में पदेन दायित्वों के निर्वहन हेतु की गई यात्राओं के लिए अब अधिकतम 90 हजार रुपये प्रतिमाह का क्लेम किया जा सकेगा।

खजाने पर बढ़ेगा बोझ: 30 हजार रुपये की सीधी वृद्धि

इस फैसले के लागू होने से प्रत्येक मंत्री के यात्रा भत्ते में सीधे तौर पर 30,000 रुपये की मासिक बढ़ोतरी हुई है। प्रतिशत के लिहाज से देखें तो यह करीब 50 फीसदी का उछाल है। गौरतलब है कि इससे पहले यात्रा भत्ते की यह सीमा 60 हजार रुपये निर्धारित थी, जो लंबे समय से चली आ रही थी। सरकार के इस कदम से राजकोष पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ना तय है।

पद पुराना भत्ता (प्रति माह) नया भत्ता (प्रति माह) कुल वृद्धि
मुख्यमंत्री/मंत्री ₹60,000 ₹90,000 ₹30,000
राज्य मंत्री/उप मंत्री ₹60,000 ₹90,000 ₹30,000

आर्थिक संकट बनाम मंत्रियों की सहूलियत

उत्तराखंड सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब प्रदेश की वित्तीय सेहत को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। शासन के विभिन्न मंचों पर राज्य की आर्थिक स्थिति को “चुनौतीपूर्ण” बताया जाता रहा है। कई विकास परियोजनाओं के लिए बजट की कमी और बढ़ते कर्ज के बोझ के बीच मंत्रियों के भत्तों में इस तरह की वृद्धि को लेकर विपक्ष ने भी तेवर कड़े करने शुरू कर दिए हैं।

जानकारों का कहना है कि पर्वतीय राज्य होने के कारण उत्तराखंड में मंत्रियों को लगातार दुर्गम क्षेत्रों का दौरा करना पड़ता है। तेल की बढ़ती कीमतों और अन्य यात्रा व्ययों को देखते हुए सरकार ने इस सीमा को बढ़ाने का तर्क दिया है। हालांकि, आलोचकों का मानना है कि ‘मितव्ययिता’ का संदेश देने वाली सरकार को पहले अपने खर्चों में कटौती करनी चाहिए थी।

क्या कहता है नया नियम?

संशोधित नियमावली के अनुसार, यात्रा भत्ता केवल उन्हीं दौरों के लिए देय होगा जो सरकारी कार्यों या पदेन दायित्वों से संबंधित होंगे।

  1. दायरा: उत्तराखंड के भीतर और भारत के अन्य राज्यों की यात्राएं।

  2. पात्रता: मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद के सभी सदस्य।

  3. प्रभावी तिथि: यह आदेश 29 जनवरी 2026 से तत्काल प्रभाव से लागू माना जाएगा।

साल 2026 में लिया गया यह फैसला आगामी चुनावों और सांगठनिक दौरों की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मंत्रियों के बढ़ते दौरों और जनसंपर्क कार्यक्रमों को सुगम बनाने के लिए सरकार ने इस वित्तीय बाधा को दूर कर दिया है। लेकिन, अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार अन्य विभागों के कर्मचारियों के लंबित भत्तों पर भी इसी तरह की दरियादिली दिखाती है या नहीं।

फिलहाल, शासन की इस अधिसूचना ने यह साफ कर दिया है कि मंत्रियों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए सरकार संसाधनों की कमी को आड़े नहीं आने देना चाहती।

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