
देहरादून, 15 नवंबर 2025। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में यातायात प्रबंधन, सौंदर्यीकरण और क्षेत्रीय सांस्कृतिक विरासत को एक साथ जोड़ने वाली एक अनोखी परियोजना ने नया स्वरूप ले लिया है। मात्र छह महीनों के भीतर जिला प्रशासन ने कुठालगेट और साईं मंदिर तिराहा के व्यापक चौड़ीकरण, आधुनिक राउंडअबाउट निर्माण और पहाड़ी स्थापत्य शैली पर आधारित सौंदर्यीकरण के कार्य पूरे कर इन्हें जनमानस को समर्पित कर दिया है। इन परियोजनाओं ने शहर के प्रमुख चौराहों की छवि को पूरी तरह बदल दिया है—अब ये चौराहे केवल यातायात केंद्र नहीं, बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति, लोक परंपरा और राज्य आंदोलन के इतिहास के जीवंत प्रतीक बनकर उभरे हैं।
लोकार्पण कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री सुबोध उनियाल, कृषि एवं ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी, और राज्यसभा सांसद नरेश बंसल विशेष रूप से उपस्थित रहे। स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा वित्तपोषित इन दोनों परियोजनाओं में कुल मिलाकर लगभग 220 लाख रुपये खर्च किए गए हैं—कुठालगेट पर 135 लाख और साईं मंदिर तिराहे पर 85 लाख।
राजधानी देहरादून को नया रूप: मुख्यमंत्री की प्रेरणा से “शोकेस चौराहों” का निर्माण
राज्य में “सुंदर, सुरक्षित और सांस्कृतिक राजधानी” के लक्ष्य के तहत मुख्यमंत्री की प्रेरणा से यह कार्य प्रारंभ हुआ था। जिला प्रशासन ने इस दृष्टिकोण को क्रियान्वित करते हुए न केवल यातायात व्यवस्था को सुगम बनाया, बल्कि चौराहों को इस तरह विकसित किया कि वे उत्तराखंड की पहचान का शोकेस बनकर सामने आएँ।
कुठालगेट और साईं मंदिर तिराहे पर—
- अतिरिक्त 10 मीटर चौड़ी मोटरेबल स्लिप रोड्स बनाई गईं
- आधुनिक राउंडअबाउट सिस्टम विकसित किया गया
- पहाड़ी स्थापत्य शैली पर आधारित कलात्मक संरचनाएँ स्थापित की गईं
- गढ़वाल–कुमाऊँ की संस्कृति को दर्शाने वाले भित्ति-चित्र, मूर्तियाँ और कलाकृतियाँ लगाई गईं
- राज्य आंदोलनकारियों की स्मृतियों को चौराहों पर स्थान दिया गया
- चौराहों की लाइटिंग, साइनेज और आपातकालीन सुरक्षा को उन्नत किया गया
यह पहली बार है जब देहरादून में यातायात सुगमता, जनसुरक्षा और पारंपरिक लोक-संस्कृति दर्शन—तीनों को एक साथ शामिल करते हुए किसी परियोजना को इतने बड़े स्तर पर लागू किया गया है।
प्रभारी मंत्री सुबोध उनियाल: “ये चौराहे राज्य संस्कृति और संघर्ष की कहानी कहते हैं”
लोकार्पण कार्यक्रम में संबोधित करते हुए प्रभारी मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा:
“कुठालगेट और साईं मंदिर चौराहे केवल निर्माण परियोजनाएँ नहीं, बल्कि उत्तराखंड के लोक-संघर्ष, लोक-संस्कृति और राज्य निर्माण यात्रा के प्रतीक हैं। यहां आने वाले पर्यटक अब सिर्फ सड़क पार नहीं करेंगे, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर का साक्षात्कार भी करेंगे।”
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन की अभिनव सोच से यह परियोजना न सिर्फ यातायात सुगमता को बढ़ाती है, बल्कि यह देहरादून की पहचान को एक नई दिशा देती है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में ये चौराहे राज्य पर्यटन को आगे बढ़ाने वाले “कल्चरल एम्बेसडर” के रूप में काम करेंगे।
मंत्री गणेश जोशी: “यह विकास ही नहीं, संस्कृति को सहेजने का प्रयास है”
कृषि एवं ग्राम्य विकास मंत्री और स्थानीय विधायक गणेश जोशी ने परियोजना की सराहना करते हुए कहा कि यह सिर्फ सड़क चौड़ीकरण या सौंदर्यीकरण का कार्य नहीं है। यह प्रदेश की सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का प्रयास है।
उन्होंने कहा:
“कुठालगेट और साईं मंदिर चौराहों का नया स्वरूप पहाड़ की स्थापत्य विरासत, पारंपरिक कलाकारी और लोक-संस्कृति का जीवंत उदाहरण है। यहां की नई संरचनाएँ स्थानीय नागरिकों को सुविधा ही नहीं देंगी, बल्कि क्षेत्र की सुंदरता और पर्यटन संभावनाओं को भी बढ़ाएँगी।”
जिलाधिकारी सविन बंसल: ‘चार मुख्य चौराहों का मॉडल विकसित कर रहे हैं’
जिलाधिकारी सविन बंसल ने बताया कि यह कार्य देहरादून में यातायात सुधार की व्यापक योजना का हिस्सा है। प्रथम चरण में शहर के चार प्रमुख चौराहों—कुठालगेट, साईं मंदिर, दिलाराम और एक अन्य चौराहे—को आधुनिक रूप में विकसित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया:
- कुठालगेट और साईं मंदिर तिराहे पर
- 10 मीटर अतिरिक्त स्लिप रोड
- आधुनिक राउंडअबाउट
- सांस्कृतिक सौंदर्यीकरण
- पैदल सुरक्षा प्रबंध
- नई लाइटिंग व्यवस्था
- पहाड़ी थीम पर आधारित स्टोन–वुड वर्क
- राज्य आंदोलनकारियों और महान विभूतियों की मूर्तियाँ
- दिलाराम चौक पर उन्नत मॉडर्न ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लगभग पूरा हो चुका है।
उन्होंने कहा कि इन सभी कार्यों का उद्देश्य—
- शहर में यातायात सुगमता बढ़ाना,
- दुर्घटनाओं की संभावना कम करना,
- और देहरादून में प्रवेश करने वाले पर्यटकों को राज्य की पारंपरिक कला और इतिहास से परिचित कराना है।
छह महीने में पूरा हुआ मॉडल प्रोजेक्ट: ‘आईडिया से क्रियान्वयन तक जिला प्रशासन की टीम का काम’
जिला प्रशासन ने यह विशेष रूप से स्पष्ट किया कि—
- आइडिया
- डिज़ाइन
- कलात्मक अवधारणा
- साइट प्लान
- क्रियान्वयन
ये सभी कार्य प्रशासन की टीम द्वारा ही किए गए। स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने केवल वित्तपोषण प्रदान किया।
यह उत्तराखंड में प्रशासनिक नवाचार का एक दुर्लभ उदाहरण है, जहां इन्फ्रास्ट्रक्चर और सांस्कृतिक तत्वों को साथ लाकर “मॉडल चौराहा प्रणाली” विकसित की गई है।
देहरादून के प्रवेश द्वारों और चौराहों का नया भविष्य
इस परियोजना को शहर के विकास के नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। पहाड़ी शैली के भित्ति-चित्र, लोक कलाकृतियाँ, शिल्पकला आधारित संरचनाएँ, राउंडअबाउट मॉडल और विस्तृत स्लिप रोड्स न केवल यातायात को सुगम बनाएँगे बल्कि—
- देहरादून की पहचान मजबूत करेंगे
- राज्य की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखेंगे
- और शहर को “स्मार्ट” से आगे बढ़कर “संस्कृतिक राजधानी” के रूप में स्थापित करेंगे
यह मॉडल उत्तराखंड के अन्य शहरों में भी दोहराया जा सकता है।
देहरादून का बदलता चेहरा
कुठालगेट और साईं मंदिर तिराहे का नया स्वरूप इस बात का प्रमाण है कि यदि प्रशासनिक दक्षता, डिज़ाइन दृष्टि, सांस्कृतिक जुड़ाव और स्मार्ट फंडिंग एक साथ आएँ तो शहर न केवल सुंदर बनते हैं, बल्कि अपनी विरासत को भी नई पीढ़ी तक पहुँचा पाते हैं।
देहरादून अब केवल बढ़ता हुआ शहर नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक, आधुनिक और सुरक्षित राजधानी के रूप में पुनर्परिभाषित हो रहा है।



