By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर के बयान से बंगाल की राजनीति में हलचल, ‘बाबरी मस्जिद’ की नींव रखने के ऐलान पर ममता सरकार सतर्क
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > देश > टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर के बयान से बंगाल की राजनीति में हलचल, ‘बाबरी मस्जिद’ की नींव रखने के ऐलान पर ममता सरकार सतर्क
देशफीचर्ड

टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर के बयान से बंगाल की राजनीति में हलचल, ‘बाबरी मस्जिद’ की नींव रखने के ऐलान पर ममता सरकार सतर्क

The Hill India News
Last updated: December 4, 2025 1:24 am
The Hill India News
Published: December 4, 2025
Share
SHARE

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सियासत एक बार फिर गर्मा गई है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायक हुमायूं कबीर द्वारा मुर्शिदाबाद में 6 दिसंबर को “बाबरी मस्जिद” की नींव रखने का ऐलान पार्टी नेतृत्व और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए नई चुनौती बनकर उभरा है। कबीर का यह बयान न केवल राजनीतिक स्तर पर हलचल पैदा कर रहा है, बल्कि राज्य सरकार के लिए कानून-व्यवस्था की दृष्टि से भी संवेदनशील माना जा रहा है।

Contents
हुमायूं कबीर का ऐलान और बढ़ती सियासी गर्माहटममता बनर्जी और टीएमसी का स्पष्ट रुख—“पार्टी दूर रहेगी”मुर्शिदाबाद की राजनीति और टीएमसी की चिंताकानून-व्यवस्था पर भी चिंतित हैं अधिकारीममता की रैली और कबीर की संभावित उपस्थिति राजनीतिक संकेत देगीविपक्ष का हमला—“टीएमसी दोहरा खेल खेल रही है”आगे क्या?

हुमायूं कबीर ने एनडीटीवी से एक्सक्लूसिव बातचीत में दावा किया था कि वह निर्धारित तिथि पर मस्जिद की नींव रखेंगे और उन्हें न तो पुलिस रोक पाएगी, न ही उनकी पार्टी। उनके इस साहसिक बयान के बाद से प्रदेश की राजनीति में नई उथल-पुथल देखी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस विवादित प्रस्ताव से बेहद नाराज़ हैं और उन्होंने पार्टी विधायकों को साफ संदेश दे दिया है कि टीएमसी का इस कार्यक्रम से कोई लेना–देना नहीं है।


हुमायूं कबीर का ऐलान और बढ़ती सियासी गर्माहट

टीएमसी विधायक कबीर ने दावा किया कि बाबरी मस्जिद के नाम से एक नए धार्मिक ढांचे की नींव रखकर वह “ऐतिहासिक न्याय” का प्रतीक खड़ा करना चाहते हैं। उनका कहना है कि यह कार्यक्रम सांप्रदायिक नहीं, बल्कि “न्याय की बहाली” का संदेश देगा। हालांकि, विपक्षी दल और राजनीतिक विश्लेषक इसे संवेदनशील मुद्दे को हवा देने के रूप में देख रहे हैं।

कबीर का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब प्रदेश में एसआईआर (Statutory Investigation Reforms) को लेकर पहले ही राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है। टीएमसी इसे केंद्र सरकार की दखलंदाजी बता रही है, जबकि भाजपा इसे प्रशासनिक पारदर्शिता का कदम बताती है। ऐसे हालात में कबीर के बयान ने सियासी तापमान और बढ़ा दिया है।


ममता बनर्जी और टीएमसी का स्पष्ट रुख—“पार्टी दूर रहेगी”

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्पष्ट कर दिया है कि टीएमसी किसी भी रूप में इस ‘बाबरी मस्जिद’ निर्माण कार्यक्रम से नहीं जुड़ेगी। पार्टी नेतृत्व ने सभी विधायकों और पदाधिकारियों को संदेश भेजकर हिदायत दी है कि किसी संवेदनशील धार्मिक कार्यक्रम से दूरी बनाए रखें।

बंगाल के शिक्षा मंत्री और टीएमसी नेता ब्रत्य बसु ने भी बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पार्टी इस मामले पर “गंभीरता से ध्यान दे रही है।” उन्होंने स्वीकार किया कि हुमायूं कबीर अपनी स्थिति बार-बार बदल रहे हैं और उनसे बात की जा रही है। बसु ने यह भी उम्मीद जताई कि कबीर गुरुवार को मुर्शिदाबाद के बहरामपुर में होने वाले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे।

टीएमसी सूत्रों का दावा है कि पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता कि धार्मिक आधार पर कोई भी ऐसा कदम उठाया जाए, जिससे राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़े और राज्य की साम्प्रदायिक सद्भावना को नुकसान पहुंचे।


मुर्शिदाबाद की राजनीति और टीएमसी की चिंता

मुर्शिदाबाद—पश्चिम बंगाल का मुस्लिम बहुल जिला—की राजनीति हमेशा से बेहद संवेदनशील रही है। यहां राजनीतिक संदेशों का सामाजिक ताने-बाने पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे में हुमायूं कबीर का ‘बाबरी मस्जिद’ नामक ढांचे की नींव रखने का ऐलान टीएमसी के लिए जोखिम भरा माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, टीएमसी डर रही है कि किसी भी धार्मिक विवाद से विरोधी दलों को मौका मिल सकता है कि वे इसे “तुष्टिकरण” या “धार्मिक राजनीति” के रूप में पेश करें। वहीं भाजपा लगातार टीएमसी पर मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति का आरोप लगाती रही है। ऐसे में ममता बनर्जी इस मुद्दे पर पार्टी की छवि को बचाने में जुट गई हैं।


कानून-व्यवस्था पर भी चिंतित हैं अधिकारी

राज्य पुलिस और प्रशासन इस कार्यक्रम को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है। 6 दिसंबर की तारीख अपने आप में संवेदनशील है—क्योंकि अयोध्या में बाबरी ढांचे के विवाद से यह दिन ऐतिहासिक रूप से जुड़ा है। यदि कबीर अपने कार्यक्रम पर अड़े रहते हैं, तो प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी तैयारी करनी पड़ सकती है।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए स्थानीय थानों को अलर्ट पर रखा गया है। वरिष्ठ अधिकारियों की नजर कार्यक्रम स्थल और आसपास के इलाकों पर रहेगी।


ममता की रैली और कबीर की संभावित उपस्थिति राजनीतिक संकेत देगी

उधर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी गुरुवार को एसआईआर के विरोध में मुर्शिदाबाद की बांग्लादेश सीमा से सटे इलाके में एक बड़ी रैली करने वाली हैं। पार्टी ने भरतपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक हुमायूं कबीर को भी रैली के लिए आमंत्रित किया है।

टीएमसी के अंदर माना जा रहा है कि यदि कबीर रैली में मंच पर दिखाई देते हैं, तो यह संदेश जाएगा कि मामला पार्टी के भीतर ही सुलझ गया है और विधायक कार्यक्रम को लेकर नरम रुख अपना रहे हैं। लेकिन यदि वह रैली से दूरी बनाए रखते हैं, तो यह उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच तनाव का संकेत होगा।


विपक्ष का हमला—“टीएमसी दोहरा खेल खेल रही है”

बीजेपी और कांग्रेस ने हुमायूं कबीर के बयान को लेकर टीएमसी पर हमला किया है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि यह टीएमसी की “वोट बैंक” राजनीति का नया अध्याय है। उनका कहना है कि विधायक का यह बयान सुनियोजित है और पार्टी अंदरूनी तौर पर इसे बढ़ावा दे रही है, भले ही सार्वजनिक रूप से दूरी बना रही हो।

वहीं कांग्रेस ने कहा कि बंगाल में धार्मिक भावनाओं के साथ खेलने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो चिंताजनक है।


आगे क्या?

सभी की नजरें 6 दिसंबर पर टिकी हैं। क्या हुमायूं कबीर वास्तव में मस्जिद की नींव रखेंगे? क्या टीएमसी उन्हें अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी देगी? और सबसे महत्वपूर्ण—क्या इस विवाद से राज्य की राजनीति में नया मोड़ आएगा?

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि बंगाल की राजनीति में धार्मिक और संवेदनशील मुद्दे एक बार फिर केंद्र में आ गए हैं। ममता सरकार संतुलन साधने में लगी है, जबकि विपक्ष इसे भुनाने में जुटा है। हुमायूं कबीर का कदम और उनकी पार्टी की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में राजनीतिक समीकरणों को फिर बदल सकती है।

You Might Also Like

उत्तराखण्ड: मुख्यमंत्री धामी ने हरिद्वार में देव संस्कृति विश्वविद्यालय के 40वें ज्ञानदीक्षा समारोह में प्रतिभाग किया किया।
लोकसभा में बजट पर चर्चा के दौरान, ओम बिरला से भिड़े TMC सांसद अभिषेक बनर्जी
नई दिल्ली : कोविड-19 अपडेट :स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय
Himachal Pradesh: शिमला में सड़क हादसा, यात्रियों को ले जा रही बस पलटी 4 की मौत 3 गंभीर रूप से घायल
दिल्ली आबकारी मामला: हाईकोर्ट में आज फिर दलीलें रख सकते हैं अरविंद केजरीवाल, जवाबी हलफनामा रिकॉर्ड पर लेने की मांग तेज
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
फीचर्डविदेशस्पोर्ट्स

तेहरान से वर्ल्ड कप तक: क्या अमेरिका-ईरान तनाव की कीमत चुका रही है ईरानी फुटबॉल टीम?

The Hill India News
The Hill India News
June 17, 2026
राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: फॉर्महाउस, बंगले और करोड़ों की संपत्ति के आरोपों में घिरे 6 अहम किरदार, एसआईटी जांच से बढ़ी हलचल
पेपर लीक से डेटा लीक तक: क्यों सवालों के घेरे में है टेलीग्राम? भारत समेत कई देशों ने दिखाई सख्ती, जानिए पूरा मामला
लखनऊ मेट्रो का महाविस्तार: 10 नए कॉरिडोर से बदलेगी राजधानी की तस्वीर, बाराबंकी से उन्नाव तक दौड़ेगी मेट्रो
किशाऊ बांध परियोजना का रास्ता साफ: अमित शाह के हस्तक्षेप से खत्म हुआ वर्षों पुराना विवाद, उत्तराखंड को बड़ी राहत
व्हाइट हाउस में ट्रंप पर हमले की बड़ी साजिश नाकाम, ड्रोन और स्नाइपर से जन्मदिन समारोह को दहलाने की थी तैयारी, मां की सूचना से पकड़े गए 5 आरोपी
उत्तराखंड में एसटी प्रमाण पत्रों पर बड़ा विवाद: राज्य गठन के बाद जारी सभी प्रमाण पत्रों की जांच की मांग, सरकारी लाभों की भी हो सकती है समीक्षा
उत्तराखंड: कर्णप्रयाग हिंसा के बाद हेमकुंड साहिब ट्रस्ट की बड़ी अपील, धर्म रक्षा के लिए हैं शस्त्र, दुरुपयोग से बचें श्रद्धालु
मेसी का महाविस्फोट: विश्व कप में रचा इतिहास, सबसे अधिक गोल करने वाले संयुक्त रूप से पहले खिलाड़ी बने
शिवसेना UBT में बढ़ी अंदरूनी नाराजगी! आखिर क्यों उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ने को तैयार दिख रहे हैं सांसद?
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?