मिडटर्म चुनाव में करारी शिकस्त के बाद ट्रंप की पार्टी में मचा घमासान, ईरान के साथ युद्ध को हार की बड़ी वजह मान रहे ट्रंप और जेडी वेंस; रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ पर उठने लगे सवाल, सांसदों ने भी बढ़ाया दबाव
वॉशिंगटन: अमेरिका की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा सवाल चर्चा के केंद्र में है। क्या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को पद से हटाने की तैयारी कर रहे हैं? मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को मिली करारी हार के बाद यह सवाल और भी महत्वपूर्ण हो गया है। चुनावी नतीजों ने न केवल ट्रंप प्रशासन की राजनीतिक ताकत को चुनौती दी है, बल्कि उनकी विदेश और रक्षा नीति को लेकर भी पार्टी के भीतर असंतोष उजागर कर दिया है। खासतौर पर ईरान के साथ युद्ध अब रिपब्लिकन पार्टी के लिए राजनीतिक मुसीबत बनता दिखाई दे रहा है।
अमेरिकी चुनाव में मिली हार के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से लेकर उपराष्ट्रपति जेडी वेंस तक इस बात को स्वीकार करते नजर आ रहे हैं कि ईरान के साथ युद्ध का पार्टी को भारी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा है। चुनावी परिणामों के बाद पार्टी के भीतर अब जिम्मेदारी तय करने की चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि युद्ध की रणनीति, उसके उद्देश्यों और समयसीमा को लेकर रक्षा विभाग का नेतृत्व सही तरीके से स्थिति स्पष्ट नहीं कर पाया।
हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप सार्वजनिक रूप से हेगसेथ का बचाव कर रहे हैं, लेकिन रिपब्लिकन पार्टी के कुछ नेताओं और सांसदों के बयान संकेत दे रहे हैं कि रक्षा मंत्री के लिए आने वाला समय आसान नहीं रहने वाला है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या ट्रंप अपने करीबी सहयोगी को बचा पाएंगे या फिर चुनावी हार का राजनीतिक दबाव आखिरकार हेगसेथ की कुर्सी पर भारी पड़ेगा?
मिडटर्म चुनाव में हार के बाद रिपब्लिकन पार्टी में मचा घमासान
अमेरिका के मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को मिली हार ने राष्ट्रपति ट्रंप के राजनीतिक नेतृत्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की सफलता से कांग्रेस के दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी की स्थिति कमजोर हो गई है। इसका सीधा असर ट्रंप प्रशासन के राजनीतिक एजेंडे और आने वाले विधायी फैसलों पर पड़ सकता है।
चुनाव के नतीजों के बाद रिपब्लिकन पार्टी के भीतर हार के कारणों पर चर्चा शुरू हो गई है। पार्टी के कई नेताओं का मानना है कि ईरान के साथ युद्ध को लेकर सरकार का फैसला जनता के बीच सही संदेश नहीं दे पाया। महंगाई, घरेलू मुद्दों और आर्थिक चिंताओं के बीच विदेश में सैन्य संघर्ष ने भी मतदाताओं की नाराजगी बढ़ाने में भूमिका निभाई।
राष्ट्रपति ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बयानों से भी संकेत मिला है कि ईरान युद्ध का चुनावी असर पार्टी के लिए गंभीर रहा। अब पार्टी के भीतर यह सवाल उठ रहा है कि युद्ध को लेकर लिए गए फैसलों की जिम्मेदारी किसकी होनी चाहिए।
इसी बहस में रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। आलोचकों का आरोप है कि युद्ध की रणनीति और उसके उद्देश्यों को लेकर रक्षा विभाग की तरफ से स्पष्टता नहीं दिखाई गई। इससे न केवल राजनीतिक नेतृत्व को मुश्किलों का सामना करना पड़ा, बल्कि पार्टी के भीतर भी असंतोष बढ़ा।
पीट हेगसेथ पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
पीट हेगसेथ ट्रंप प्रशासन में रक्षा मंत्री की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ईरान के साथ सैन्य संघर्ष में पेंटागन की भूमिका बेहद अहम रही है। ऐसे में युद्ध की रणनीति, सैन्य कार्रवाई के उद्देश्यों और अमेरिकी सेना की भूमिका को लेकर रक्षा मंत्री पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ईरान युद्ध मुख्य रूप से युद्ध विभाग के नेतृत्व में चलाया गया प्रयास रहा है। उनका तर्क था कि जब विदेश नीति से जुड़े किसी विवाद को सैन्य कार्रवाई के जरिए सुलझाने का विकल्प चुना गया, तो इसमें रक्षा विभाग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई।
वहीं, व्हाइट हाउस के करीबी एक रिपब्लिकन नेता ने CNN से बातचीत में कहा कि अगर राष्ट्रपति इस युद्ध के लिए किसी को जिम्मेदार ठहराना चाहते हैं तो पीट हेगसेथ का नाम सामने आ सकता है।
इस नेता ने आरोप लगाया कि युद्ध की शुरुआत से ही उसकी समयसीमा, लक्ष्यों और उद्देश्यों को लेकर हेगसेथ ने या तो सही जानकारी नहीं दी या फिर उनके बयान वास्तविक परिस्थितियों से मेल नहीं खाते थे। उनके मुताबिक, दोनों ही स्थितियां स्वीकार्य नहीं हैं।
इन आरोपों ने हेगसेथ की राजनीतिक स्थिति को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि राष्ट्रपति ट्रंप उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करेंगे या नहीं, लेकिन पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी उनके लिए परेशानी पैदा कर सकती है।
जेडी वेंस ने भी उठाए युद्ध के फैसले पर सवाल
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का बयान काफी अहम माना जा रहा है। चुनावी नतीजों के बाद उन्होंने ईरान के साथ युद्ध के फैसले पर सवाल उठाए और इस बात की चर्चा की कि क्या सैन्य कार्रवाई का विकल्प चुनना सही निर्णय था।
वेंस के बयान से यह संकेत मिला कि रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी ईरान युद्ध को लेकर एकराय नहीं है। चुनावी हार के बाद पार्टी के नेताओं को यह महसूस होने लगा है कि विदेश नीति से जुड़े इस फैसले ने घरेलू राजनीति को प्रभावित किया है।
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति के लिए राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इन चुनावों के जरिए मतदाता यह संदेश देते हैं कि वे मौजूदा सरकार के कामकाज से कितने संतुष्ट हैं। यदि सत्ताधारी पार्टी को बड़ा नुकसान होता है तो राष्ट्रपति के लिए आगे के फैसले लेना मुश्किल हो सकता है।
यही स्थिति अब ट्रंप प्रशासन के सामने भी दिखाई दे रही है। कांग्रेस में रिपब्लिकन पार्टी की कमजोर स्थिति के कारण सरकार के रक्षा बजट, सैन्य नीतियों और अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों को आगे बढ़ाने में कठिनाई आ सकती है।
सांसद थॉमस मैसी ने हेगसेथ के खिलाफ खोला मोर्चा
पीट हेगसेथ की मुश्किलें केवल राजनीतिक बयानों तक सीमित नहीं हैं। केंटकी से रिपब्लिकन सांसद थॉमस मैसी ने उनके खिलाफ महाभियोग के आठ आरोप दायर किए हैं। वह जल्द ही प्रतिनिधि सभा में इस मुद्दे पर मतदान कराने की योजना बना रहे हैं।
यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि हेगसेथ को लेकर विरोध केवल विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी तक सीमित नहीं है। उनकी अपनी रिपब्लिकन पार्टी के कुछ नेता भी उनके कामकाज पर सवाल उठा रहे हैं।
हालांकि महाभियोग के आरोप दायर होना और किसी मंत्री को पद से हटाया जाना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। लेकिन इससे यह साफ होता है कि हेगसेथ के नेतृत्व को लेकर राजनीतिक असंतोष बढ़ रहा है।
अगर कांग्रेस में उनके खिलाफ सवाल और तेज होते हैं तो ट्रंप प्रशासन पर रक्षा विभाग के कामकाज को लेकर जवाब देने का दबाव बढ़ सकता है।
ट्रंप ने किया बचाव, बोले- पीट हेगसेथ अच्छा काम कर रहे हैं
एक तरफ जहां रिपब्लिकन पार्टी के भीतर हेगसेथ के खिलाफ आवाजें तेज हो रही हैं, वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार उनका बचाव कर रहे हैं।
पत्रकारों ने जब ट्रंप से पूछा कि क्या वह रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को पद से हटाने के बारे में सोच रहे हैं, तो उन्होंने इस संभावना से इनकार किया। ट्रंप ने कहा कि उन्हें लगता है कि हेगसेथ बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।
ट्रंप ने अपने रक्षा मंत्री को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का प्रमुख समर्थक भी बताया। 23 मार्च को हेगसेथ की भूमिका का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा था कि सबसे पहले उन्होंने ही सैन्य कार्रवाई के पक्ष में आवाज उठाई थी।
ट्रंप के इस बयान से स्पष्ट है कि वह सार्वजनिक तौर पर अपने रक्षा मंत्री के साथ खड़े दिखाई देना चाहते हैं। लेकिन राजनीति में सार्वजनिक समर्थन और अंदरूनी रणनीति कई बार अलग-अलग हो सकती हैं।
ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में राष्ट्रपति अपने इस भरोसे को बरकरार रखते हैं या फिर पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष को देखते हुए कोई बड़ा फैसला लेते हैं।
सीनेटर थॉम टिलिस का बयान, हेगसेथ का होने वाला है हिसाब!
हेगसेथ की मुश्किलें बढ़ाने वाला एक और बयान रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस की तरफ से आया है। उन्होंने CBS न्यूज से बातचीत में कहा कि पीट हेगसेथ का हिसाब होने वाला है।
टिलिस ने संकेत दिया कि सांसदों के साथ हेगसेथ के खराब संबंध ट्रंप प्रशासन के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। खासकर रक्षा खर्च से जुड़े प्रस्तावों को कांग्रेस में आगे बढ़ाने में इसका असर पड़ सकता है।
मामला अमेरिका के करीब 1.5 ट्रिलियन डॉलर के रक्षा खर्च वाले पैकेज से जुड़ा है। टिलिस के मुताबिक, यदि हेगसेथ सांसदों के साथ बेहतर तालमेल नहीं बना पाते हैं तो सरकार के लिए इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाना कठिन हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव के बाद यह तय करना जरूरी होगा कि क्या हेगसेथ ही ऐसे व्यक्ति हैं, जो कांग्रेस तक रक्षा विभाग की जरूरतों को प्रभावी तरीके से पहुंचा सकते हैं।
यह बयान इसलिए अहम है, क्योंकि अमेरिका में रक्षा बजट और सैन्य खर्च को मंजूरी दिलाने के लिए कांग्रेस का समर्थन बेहद जरूरी होता है। यदि रक्षा मंत्री और सांसदों के बीच तालमेल कमजोर होता है तो इसका असर सरकार की सैन्य योजनाओं पर भी पड़ सकता है।
डेमोक्रेट्स भी करेंगे पेंटागन के कामकाज की जांच
मिडटर्म चुनाव में सफलता के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी भी ट्रंप प्रशासन को घेरने की तैयारी में है। विपक्षी नेताओं ने पीट हेगसेथ और पेंटागन के कामकाज की जांच करने का वादा किया है।
इस जांच का दायरा केवल ईरान युद्ध तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। इसमें युद्ध के दौरान लिए गए फैसलों, सैन्य रणनीति, रक्षा विभाग के नेतृत्व और शीर्ष सैन्य अधिकारियों को हटाने जैसे मुद्दे भी शामिल हो सकते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में उन फैसलों पर भी सवाल उठ सकते हैं, जिनके तहत शीर्ष सैन्य अधिकारियों में बदलाव किए गए। इनमें जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष से जुड़ा मामला भी शामिल हो सकता है।
डेमोक्रेट्स के पास कांग्रेस में मजबूत स्थिति होने से ट्रंप प्रशासन के सामने जवाबदेही का दबाव बढ़ सकता है। रक्षा विभाग के फैसलों और सैन्य कार्रवाई से जुड़े सवालों पर सुनवाई होने की स्थिति में हेगसेथ को भी अपना पक्ष रखना पड़ सकता है।
क्या चुनावी हार का पूरा ठीकरा हेगसेथ पर फोड़ा जाएगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रिपब्लिकन पार्टी की चुनावी हार के लिए पीट हेगसेथ को जिम्मेदार ठहराया जाएगा? राजनीतिक विश्लेषण के लिहाज से यह मामला इतना सीधा नहीं है।
किसी भी चुनाव में हार के पीछे कई कारण होते हैं। मतदाताओं की नाराजगी, आर्थिक स्थिति, महंगाई, रोजगार, सरकार की नीतियां और विदेश नीति जैसे मुद्दे चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं। ऐसे में ईरान युद्ध को हार का एक बड़ा कारण माना जा रहा है, लेकिन पूरी जिम्मेदारी केवल रक्षा मंत्री पर डालना राजनीतिक रूप से आसान नहीं होगा।
फिर भी हेगसेथ के लिए चुनौतियां बढ़ती दिखाई दे रही हैं। एक तरफ उन्हें विपक्ष के सवालों का सामना करना पड़ सकता है, वहीं दूसरी तरफ अपनी ही पार्टी के कुछ सांसदों के साथ संबंध सुधारने की जरूरत होगी।
राष्ट्रपति ट्रंप का समर्थन फिलहाल उनके लिए सबसे बड़ी राहत है। लेकिन यदि कांग्रेस में रक्षा बजट और सैन्य नीतियों को लेकर गतिरोध बढ़ता है तो ट्रंप को अपनी टीम में बदलाव पर विचार करना पड़ सकता है।
आने वाले दिनों में ट्रंप के सामने होगी दोहरी चुनौती
मिडटर्म चुनाव के नतीजों के बाद ट्रंप प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। पहली चुनौती ईरान युद्ध को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देना और दूसरी कांग्रेस में कमजोर राजनीतिक स्थिति के बावजूद अपने एजेंडे को आगे बढ़ाना।
रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की भूमिका इन दोनों मामलों में महत्वपूर्ण है। उन्हें न केवल सैन्य रणनीति को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देना होगा, बल्कि सांसदों के साथ बेहतर तालमेल भी बनाना होगा।
फिलहाल ट्रंप ने उनके पद पर बने रहने का समर्थन किया है और उन्हें हटाने की किसी योजना से इनकार किया है। लेकिन रिपब्लिकन सांसदों की नाराजगी, महाभियोग के आरोप और डेमोक्रेट्स की जांच की तैयारी ने हेगसेथ के सामने राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौतियां बढ़ा दी हैं।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ट्रंप अपने रक्षा मंत्री पर भरोसा कायम रखते हैं या चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर बढ़ते दबाव को देखते हुए कोई बड़ा बदलाव करते हैं। इतना तय है कि ईरान युद्ध अब केवल अमेरिका की विदेश नीति का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह ट्रंप प्रशासन की घरेलू राजनीति और सत्ता की रणनीति के लिए भी बड़ी परीक्षा बन चुका है।
