
देहरादून/टनकपुर, 31 जुलाई 2025: उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र के लिए बड़ी राहत और विकास की सौगात बनने जा रही टनकपुर–बागेश्वर रेललाइन परियोजना को केंद्र सरकार से संचालन की अनुमति मिलने की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है। केंद्र ने राज्य सरकार से औपचारिक सहमति पत्र की मांग की है, जिससे इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर निर्माण कार्य जल्द शुरू हो सके।
राज्य जल्द भेजेगा सहमति पत्र, सीएम धामी ने दिए निर्देश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सचिव को निर्देशित किया है कि टनकपुर–बागेश्वर रेल परियोजना से जुड़ी सभी औपचारिकताएं शीघ्र पूरी की जाएं ताकि निर्माण प्रक्रिया जल्द से जल्द धरातल पर उतर सके। यह रेललाइन कुमाऊं के विकास और सामरिक दृष्टिकोण से भी अहम मानी जा रही है।
करीब 170 किलोमीटर लंबी इस प्रस्तावित रेललाइन का फाइनल सर्वे कार्य पहले ही पूरा हो चुका है। अब अगला चरण राज्य की सहमति और निर्माण प्रक्रिया की शुरुआत का है। विशेषज्ञ इसे उत्तराखंड के रेल इतिहास में गेम चेंजर प्रोजेक्ट मान रहे हैं।
गढ़वाल और कुमाऊं को रेलमार्ग से जोड़ने की दिशा में बड़ी पहल
टनकपुर–बागेश्वर लाइन के साथ कर्णप्रयाग रेललाइन और भविष्य की योजनाएं उत्तराखंड के लिए बहुआयामी लाभ लेकर आ रही हैं। ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेललाइन, जो सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है, पर युद्धस्तर पर कार्य जारी है और इसे 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
टनकपुर–बागेश्वर रेललाइन के पूरा होने के बाद कर्णप्रयाग–बागेश्वर को जोड़ते हुए गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्र सीधे रेल संपर्क से जुड़ सकेंगे, जो राज्य की एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी।
ऋषिकेश–उत्तरकाशी और देहरादून–सहारनपुर रूट की DPR भी तैयार
प्रदेश सरकार के अनुरोध पर केंद्र सरकार ऋषिकेश–उत्तरकाशी और देहरादून–सहारनपुर रेल मार्गों की भी फाइनल DPR तैयार करवा रही है।
विशेषकर 81 किलोमीटर लंबी देहरादून–सहारनपुर रेललाइन, जो शाकुंभरी देवी मंदिर मार्ग से होकर गुजरेगी, उसमें 11 किमी लंबी सुरंग का निर्माण प्रस्तावित है। यह रेलमार्ग हर्रावाला स्टेशन तक जुड़ते हुए राजधानी को पश्चिमी यूपी से रेल माध्यम से सीधे जोड़ेगा।
सीएम धामी का बयान: केंद्र से मिल रहा भरपूर सहयोग
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा:
“बागेश्वर–टनकपुर रेललाइन पर काम शुरू करने के लिए समस्त औपचारिकताएं तेजी से पूरी की जा रही हैं। केंद्र सरकार उत्तराखंड में रेल नेटवर्क को मजबूत करने में पूरा सहयोग प्रदान कर रही है। इसी तरह ऋषिकेश–उत्तरकाशी और देहरादून–सहारनपुर रेलवे लाइनों की भी फाइनल DPR तैयार की जा रही है।”
इस परियोजना से संभावित लाभ:
- कुमाऊं के पर्यटन स्थलों को बेहतर कनेक्टिविटी
- गढ़वाल–कुमाऊं के बीच यातायात का नया विकल्प
- सामरिक दृष्टिकोण से चीन सीमा तक पहुंच सुगम
- आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों में तेजी
- स्थानीय रोजगार के अवसरों में वृद्धि
टनकपुर–बागेश्वर रेललाइन पर केंद्र और राज्य के बीच समन्वय के बाद आने वाले महीनों में काम शुरू होने की पूरी संभावना है। उत्तराखंड के भौगोलिक और आर्थिक विकास की दिशा में यह रेल संपर्क मील का पत्थर साबित हो सकता है।



