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देहरादून: कोरोनेशन अस्पताल में ‘ब्लड बैंक’ का काम युद्धस्तर पर, अब नहीं भटकेंगे मरीज; SNCU की क्षमता भी हुई दोगुनी

देहरादून | दिनांक: 03 जनवरी 2026 उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण की दिशा में जिला प्रशासन ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन और जिलाधिकारी सविन बंसल की सक्रिय निगरानी में जिला चिकित्सालय कोरोनेशन अब अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होने जा रहा है। लंबे समय से प्रतीक्षित अस्पताल का अपना ब्लड बैंक अब अंतिम चरण में है, जो इसी वित्तीय वर्ष में जनता को समर्पित कर दिया जाएगा।

₹142.91 लाख की लागत से तैयार हो रहा अत्याधुनिक ब्लड बैंक

कोरोनेशन अस्पताल में ब्लड बैंक की अनुपलब्धता मरीजों और उनके परिजनों के लिए बड़ी चुनौती थी। जिलाधिकारी सविन बंसल ने इसे अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रखते हुए ₹142.91 लाख की धनराशि स्वीकृत कराई थी।

ब्लड बैंक के फायदे:

  • आपातकालीन स्थिति में रक्त के लिए अन्य निजी अस्पतालों या केंद्रों पर निर्भरता खत्म होगी।

  • मरीजों को त्वरित उपचार मिलेगा और तीमारदारों की भागदौड़ कम होगी।

  • “रक्त गरुड़” इलेक्ट्रिक वाहन के जरिए रक्त के सुरक्षित आवागमन की सुविधा पहले ही शुरू की जा चुकी है।


नन्हे जीवन की सुरक्षा: SNCU में सुविधाएं हुई दोगुनी

मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य (Maternal and Child Health) को लेकर जिला प्रशासन के प्रयासों के सुखद परिणाम सामने आ रहे हैं।

  • क्षमता विस्तार: 12 नवंबर 2024 को महज 6 बेड से शुरू हुई स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU) की क्षमता अब दोगुनी कर दी गई है।

  • आधुनिक बुनियादी ढांचा: ₹17.03 लाख की लागत से यूनिट का विस्तारीकरण किया गया है, जिसमें अब दो मदर वार्ड, स्टाफ रूम और 24×7 सीसीटीवी निगरानी की व्यवस्था है।

  • रिकॉर्ड उपचार: आंकड़ों के अनुसार, शुरुआत से अब तक इस यूनिट में 491 से अधिक नवजातों का सफल उपचार किया गया है। अकेले जनवरी 2025 से अब तक 440 बच्चों को जीवनदायी उपचार मिला है।


डेडिकेटेड वाहन और आधुनिक सुविधाएं

जिलाधिकारी द्वारा नवजातों के लिए एक समर्पित (Dedicated) वाहन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इसके माध्यम से गंभीर स्थिति वाले शिशुओं को ईको परीक्षण या उच्च स्तरीय जांच के लिए कोरोनेशन अस्पताल और अन्य केंद्रों तक सुरक्षित पहुंचाया जा रहा है।

अस्पताल में अन्य विकास कार्य:

  1. ऑटोमेटेड पार्किंग: पार्किंग की समस्या को खत्म करने के लिए आधुनिक पार्किंग का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है।

  2. आधुनिक कैंटीन: मरीजों और तीमारदारों के लिए स्वच्छ और पौष्टिक भोजन हेतु नई कैंटीन तैयार की जा रही है।

  3. इलेक्ट्रिक मोबिलिटी: “रक्त गरुड़” वाहन के माध्यम से पर्यावरण अनुकूल और तेज सेवा सुनिश्चित की गई है।


प्रशासनिक मुस्तैदी का दिख रहा असर

जिलाधिकारी सविन बंसल स्वयं इन कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शासन स्तर पर समन्वय और फंड की समय पर उपलब्धता से विकास कार्यों की रफ्तार तेज हुई है। इन सुधारों के बाद कोरोनेशन अस्पताल अब देहरादून के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों के लिए भी एक मॉडल स्वास्थ्य केंद्र बनकर उभर रहा है।


स्वास्थ्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनता देहरादून

जिला अस्पताल का अपना ब्लड बैंक और सुदृढ़ एसएनसीयू यूनिट इस बात का प्रमाण है कि देहरादून जिला प्रशासन ‘अंतिम छोर’ तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। इन सुविधाओं के पूर्ण होने से जिले की स्वास्थ्य रैंकिंग में भी सुधार की उम्मीद है।

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