
नई दिल्ली/इस्लामाबाद: आतंकवाद की ‘नर्सरी’ कहे जाने वाले पाकिस्तान से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। भारत के लिए सिरदर्द बने आतंकी संगठनों को एक के बाद एक करारा झटका लग रहा है। ताजा घटनाक्रम में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के बेहद खतरनाक और टॉप कमांडर मौलाना सलमान अजहर की बहावलपुर में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। पाकिस्तान की धरती पर छिपे भारत के दुश्मनों के लिए ‘अज्ञात हमलावर’ (Unknown Men) काल बनकर उभर रहे हैं, जिससे वहां पनाह लिए हुए मोस्ट वांटेड आतंकियों में भारी दहशत का माहौल है।
हिट एंड रन का शिकार हुआ जैश कमांडर सलमान अजहर
बहावलपुर से मिली शुरुआती जानकारियों के मुताबिक, मौलाना सलमान अजहर की मौत एक सड़क हादसे में हुई है। दावा किया जा रहा है कि एक तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने उसे जोरदार टक्कर मारी, जिससे उसकी मौके पर ही जान चली गई। हालांकि, जिस तरह से पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान के भीतर चुन-चुनकर आतंकियों का खात्मा हो रहा है, उसे देखते हुए सुरक्षा विशेषज्ञ इसे महज एक दुर्घटना मानने को तैयार नहीं हैं। सलमान अजहर को जैश-ए-मोहम्मद के नेटवर्क को मजबूत करने और भारत के खिलाफ साजिशें रचने में माहिर माना जाता था। उसकी मौत जैश के सरगना मसूद अजहर के लिए एक बड़ी व्यक्तिगत और रणनीतिक क्षति है।
‘अज्ञात’ का खौफ: अब तक कौन-कौन हुए शिकार?
पाकिस्तान में आतंकियों की मौत का यह कोई पहला मामला नहीं है। बीते दो वर्षों में कम से कम दो दर्जन से अधिक ऐसे आतंकी मारे गए हैं, जो भारत के खिलाफ आतंकी हमलों में शामिल थे। इन हत्याओं का तरीका लगभग एक जैसा होता है—बाइक पर आए अज्ञात हमलावर गोलियां चलाते हैं और गायब हो जाते हैं, या फिर संदिग्ध ‘दुर्घटनाओं’ में आतंकियों का अंत हो जाता है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) अब तक एक भी ऐसे मामले को सुलझाने या हमलावरों को पकड़ने में नाकाम रही है।
आमिर हमजा पर जानलेवा हमला: लश्कर को लगा बड़ा झटका
अभी सलमान अजहर की मौत की खबरें ठंडी भी नहीं हुई थीं कि लाहौर से एक और बड़ी खबर आई। लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के सह-संस्थापक और हाफिज सईद के सबसे भरोसेमंद साथी आमिर हमजा पर जानलेवा हमला किया गया। हमजा, जिसे अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित कर रखा है, लाहौर में एक निजी टीवी चैनल के दफ्तर के पास पेको रोड पर अपनी गाड़ी में सवार था।
अज्ञात बंदूकधारियों ने उसकी गाड़ी पर अंधाधुंध फायरिंग की। इस हमले में हमजा को कई गोलियां लगीं। घायल अवस्था में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इलाज के बाद उसे उसके सुरक्षित ठिकाने (जौहर टाउन) पर शिफ्ट कर दिया गया। खास बात यह है कि इस हमले के बाद हाफिज सईद के बेटे हाफिज तल्हा सईद ने खुद उससे मुलाकात की, जो लश्कर के भीतर हमजा के ऊंचे कद को दर्शाता है। आमिर हमजा को हाफिज सईद के बाद संगठन का दूसरा सबसे अहम रणनीतिकार माना जाता है।
आतंकियों के सुरक्षित ठिकानों पर ‘सेंध’
लश्कर और जैश जैसे संगठनों के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि ये हमले उनके सबसे सुरक्षित माने जाने वाले ठिकानों—लाहौर, बहावलपुर और कराची में हो रहे हैं। आमिर हमजा जिस समय हमले का शिकार हुआ, वह एक टीवी चैनल ’24NewsHD TV’ के कार्यक्रम होस्ट जस्टिस (रिटायर्ड) नजीर अहमद गाजी के साथ था। इससे यह स्पष्ट होता है कि ‘अज्ञात लोग’ न केवल आतंकियों की लोकेशन जानते हैं, बल्कि उनकी गतिविधियों पर भी पैनी नजर रख रहे हैं।
पाकिस्तान की मजबूरी और वैश्विक दबाव
पाकिस्तान में आतंकियों की मौत की बढ़ती घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की स्थिति को और भी असहज कर दिया है। एक तरफ वह दुनिया से कहता है कि उसकी धरती पर आतंकी नहीं हैं, वहीं दूसरी तरफ जब ये आतंकी सरेआम मारे जाते हैं, तो पाकिस्तान को जवाब देते नहीं बनता।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन हत्याओं के पीछे कई कारण हो सकते हैं:
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आतंकी गुटों की आपसी रंजिश: संसाधनों और वर्चस्व को लेकर आतंकी संगठनों के बीच खूनी जंग।
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Unknown Men का सिद्धांत: पाकिस्तान में रह रहे भारत विरोधी तत्वों का रहस्यमयी तरीके से सफाया होना।
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ISI का क्लीनअप ऑपरेशन: अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण पुराने और अनुपयोगी हो चुके आतंकियों को रास्ते से हटाना।
भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?
भारत लंबे समय से पाकिस्तान को आतंकियों की लिस्ट सौंपता रहा है, लेकिन पाकिस्तान ने कभी कार्रवाई नहीं की। अब जबकि ये आतंकी खुद-ब-खुद ‘गायब’ हो रहे हैं, तो यह भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त है। सलमान अजहर और आमिर हमजा जैसे आतंकियों का हश्र पाकिस्तान में छिपे अन्य आतंकियों जैसे दाऊद इब्राहिम और मसूद अजहर के लिए एक कड़ा संदेश है कि वे अब सुरक्षित नहीं हैं।
बहावलपुर में सलमान अजहर का खात्मा और लाहौर में आमिर हमजा पर हमला, यह दर्शाता है कि पाकिस्तान की सरजमीं अब आतंकवादियों के लिए ‘सेफ हेवन’ नहीं रही। ‘अज्ञात लोगों’ की दहशत ने उन चेहरों को बेनकाब कर दिया है जो कभी पर्दे के पीछे बैठकर सीमा पार हिंसा का खेल खेलते थे। पाकिस्तान भले ही इन घटनाओं को संदिग्ध मौत या निजी दुश्मनी करार दे, लेकिन सच यही है कि आतंक के आकाओं का अंत अब उनके ही घर में शुरू हो चुका है।



