
ऋषिकेश/मुनि की रेती: तीर्थ नगरी ऋषिकेश के द्वार कहे जाने वाले मुनि की रेती क्षेत्र में सियासी पारा गरमा गया है। जनपद टिहरी के अंतर्गत आने वाली मुनि की रेती नगर पालिका प्रशासन पर टेंडर प्रक्रिया में पक्षपात और परिवारवाद को बढ़ावा देने के गंभीर आरोप लगे हैं। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने मंगलवार को नगर पालिका कार्यालय में जोरदार प्रदर्शन करते हुए पालिका प्रशासन के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है।
टेंडर प्रक्रिया में धांधली का आरोप: पालिका कार्यालय में भारी हंगामा
मंगलवार को इंडियन यूथ कांग्रेस के प्रदेश महासचिव अंशुल रावत के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता नगर पालिका कार्यालय परिसर पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने पालिका प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और टेंडर प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पिछले एक साल के भीतर केवल दो बड़े टेंडर किए गए हैं और दोनों में ही नियमों को ताक पर रखकर ‘अपने लोगों’ को उपकृत किया गया है।
पार्किंग टेंडर से शुरू हुआ विवाद, ‘विवेक’ की पावर पर सवाल
यूथ कांग्रेस के प्रदेश महासचिव अंशुल रावत ने पालिका अध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने मीडिया से बातचीत में दो मुख्य घटनाओं का जिक्र किया:
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पार्किंग निविदा निरस्तीकरण: रावत के अनुसार, सबसे पहले पार्किंग के लिए टेंडर निकाला गया था। तकनीकी समिति ने जांच के बाद दो निविदादाताओं (Bidders) को योग्य पाया। आरोप है कि पालिका अध्यक्ष ने जब देखा कि उनके किसी चहेते की निविदा पास नहीं हो रही है, तो उन्होंने अपने ‘विशेषाधिकार’ (Power of Discretion) का हवाला देते हुए पूरी प्रक्रिया को ही निरस्त कर दिया।
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निर्माण कार्य निविदा (जनवरी 2026): ताजा विवाद जनवरी 2026 में खोली गई निर्माण कार्य की निविदा को लेकर है। कांग्रेस का आरोप है कि इसमें भी तकनीकी समिति ने दो ठेकेदारों को पात्र माना था, लेकिन पालिका अध्यक्ष ने कथित तौर पर ‘सेटिंग’ के जरिए अपने पसंदीदा ठेकेदार को फायदा पहुँचाने के लिए निविदा स्वीकृत कर दी।
अंशुल रावत ने बड़ा दावा करते हुए कहा, “हमारे पास इन पूरी घटनाओं की वीडियो रिकॉर्डिंग सुरक्षित है। जब हमने अधिकारियों से पूछा तो उन्होंने इसे ‘अपने विवेक की पावर’ बताया। हम यह साक्ष्य जिलाधिकारी (DM) टिहरी को भेज रहे हैं और मांग करते हैं कि इसकी उच्च स्तरीय जांच हो।”
भ्रष्टाचार और परिवारवाद के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया
कांग्रेसियों ने आरोप लगाया कि मुनि की रेती नगर पालिका में विकास कार्यों के नाम पर केवल चहेते ठेकेदारों और परिवारवाद से जुड़े लोगों को ही काम दिया जा रहा है। पूर्व सभासदों ने भी इस मामले में आधिकारिक आपत्ति दर्ज कराई है। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि टेंडर प्रक्रिया में सुधार नहीं किया गया और निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो वे चुप नहीं बैठेंगे और मुनि की रेती की सड़कों पर उग्र आंदोलन करेंगे।
प्रशासन का पक्ष: ‘सभी आरोप बेबुनियाद’
दूसरी ओर, नगर पालिका के अधिकारियों ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। मुनि की रेती नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (EO) अंकित जोशी ने स्पष्ट किया कि टेंडर की सभी प्रक्रियाएं शासन द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार ही संपन्न की गई हैं। उन्होंने कहा, “नगर पालिका की छवि खराब करने के लिए बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं। तकनीकी समिति और बोर्ड की संस्तुति के आधार पर ही निर्णय लिए जाते हैं। इसमें किसी भी तरह का पक्षपात नहीं हुआ है।”
स्थानीय राजनीति में बढ़ती गर्माहट
मुनि की रेती नगर पालिका उत्तराखंड की महत्वपूर्ण पालिकाओं में से एक है, क्योंकि यहाँ पर्यटन और पार्किंग से बड़ी आय होती है। ऐसे में टेंडर प्रक्रिया में पक्षपात के आरोप लगना और मामला जिलाधिकारी तक पहुँचना, आने वाले दिनों में स्थानीय निकाय चुनाव की सुगबुगाहट के बीच बड़ी राजनीतिक लड़ाई का रूप ले सकता है।
पारदर्शिता पर उठते सवाल
लोकतंत्र में सरकारी धन के उपयोग के लिए ‘टेंडर’ सबसे पारदर्शी तरीका माना जाता है। लेकिन जब सत्ता पर बैठे लोग ‘विवेक’ का हवाला देकर प्रक्रियाओं को प्रभावित करने लगते हैं, तो जनमानस में संदेह पैदा होना स्वाभाविक है। मुनि की रेती का यह मामला अब जांच के दायरे में है। क्या वीडियो रिकॉर्डिंग से कोई बड़ा खुलासा होगा? या यह केवल चुनावी राजनीति का हिस्सा है? यह तो जांच के बाद ही साफ होगा।



